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जन्नत की कुंजी चाहता हूं... मां के पैर दबाता हू...
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संवाद न्यूज एजेंसी
झिंझाना। सालाना उर्स के मौके पर झिंझाना में रविवार रात मुशायरे का आयोजन किया गया। इसमें पहुंचे दर्जनों शायरों ने गजल और कलाम पेश करके पंडाल में मौजूद लोगों की वाहवाही बटोरी। देर रात तक श्रोताओं की भीड़ मुशायरे में जमी रही।
फकरूल होलिया हजरत सैयद इमाम महमूद नसीरुद्दीन सब्जवारी शहीद रहमतुल्लाह अल्लेह के 856वें उर्स का आयोजन जारी है। रात करीब 11 बजे सहारनपुर से पहुंचे पूर्व विधायक इमरान मसूद ने शमां रोशन कर मुशायरे का आगाज किया। भाजपा जिलाध्यक्ष सत्येंद्र तोमर ने फीता काटा। इसके बाद बस गई मदीने की याद मेरे सीने में, ए हवा उड़ा ले चल हमको भी मदीने में... नात-ए-पाक से आजमगढ़ के दिल खैराबादी ने शुरुआत की। पुराने शायरों का जादू श्रोताओं के सिर चढ़कर बोला। नवाज देवबंदी ने जन्नत की कुंजी चाहता हूं ..मां के पैर दबाता हूं। मानवीय शिक्षा अपने शेरों शायरी में दी।
आसिफ फिरोजाबादी ने बहू-बेटियों की इज्जत पर हाथ डालने वालों को शायराना अंदाज में आडे़ हाथ लिया। सुनाया कि जो मौलाना हो या महाराज, लूटे जो बेटी की लाज, वह हिंदुस्तान छोड़ दे...। आगरा से आई आरिफा शबनम ने नींद आती नहीं रात भर... गजल से दर्शकों की वाहवाही बटोरी। महाराष्ट्र के इमरान सजर ने झिंझाना की दरगाह की तारीफ की। वसीम झिंझानवी ने नफरतें भुलाकर दोस्तों.. उल्फत किया करो, गजल से भाईचारे का संदेश दिया।
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इनके अतिरिक्त इमरान, अफजल, वसीम राजोपुरी, मुंबई की तबस्सुम राणा, बिलाल सहारनपुरी, अफजल मंगलोरी, मुजाविर मालेगांव ने कलाम पेश किए। मुशायरे की सदारत नौशाद ठेकेदार झिंझाना चेयरमैन तथा निजामत गुलजार ने की। मेला वक्फ बोर्ड कमेटी के सज्जादा नशीं दरगाह अमजद अली, सफदर हुसैन अल्वी, बाबर हुसैन कुद्दूसी का सहयोग रहा। मुशायरे में कैराना इकरा हसन, पूर्व चेयरमैन राकेश गोयल, आशीष मित्तल आदि मौजूद रहे।
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झिंझाना। सालाना उर्स के मौके पर झिंझाना में रविवार रात मुशायरे का आयोजन किया गया। इसमें पहुंचे दर्जनों शायरों ने गजल और कलाम पेश करके पंडाल में मौजूद लोगों की वाहवाही बटोरी। देर रात तक श्रोताओं की भीड़ मुशायरे में जमी रही।
फकरूल होलिया हजरत सैयद इमाम महमूद नसीरुद्दीन सब्जवारी शहीद रहमतुल्लाह अल्लेह के 856वें उर्स का आयोजन जारी है। रात करीब 11 बजे सहारनपुर से पहुंचे पूर्व विधायक इमरान मसूद ने शमां रोशन कर मुशायरे का आगाज किया। भाजपा जिलाध्यक्ष सत्येंद्र तोमर ने फीता काटा। इसके बाद बस गई मदीने की याद मेरे सीने में, ए हवा उड़ा ले चल हमको भी मदीने में... नात-ए-पाक से आजमगढ़ के दिल खैराबादी ने शुरुआत की। पुराने शायरों का जादू श्रोताओं के सिर चढ़कर बोला। नवाज देवबंदी ने जन्नत की कुंजी चाहता हूं ..मां के पैर दबाता हूं। मानवीय शिक्षा अपने शेरों शायरी में दी।
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आसिफ फिरोजाबादी ने बहू-बेटियों की इज्जत पर हाथ डालने वालों को शायराना अंदाज में आडे़ हाथ लिया। सुनाया कि जो मौलाना हो या महाराज, लूटे जो बेटी की लाज, वह हिंदुस्तान छोड़ दे...। आगरा से आई आरिफा शबनम ने नींद आती नहीं रात भर... गजल से दर्शकों की वाहवाही बटोरी। महाराष्ट्र के इमरान सजर ने झिंझाना की दरगाह की तारीफ की। वसीम झिंझानवी ने नफरतें भुलाकर दोस्तों.. उल्फत किया करो, गजल से भाईचारे का संदेश दिया।
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इनके अतिरिक्त इमरान, अफजल, वसीम राजोपुरी, मुंबई की तबस्सुम राणा, बिलाल सहारनपुरी, अफजल मंगलोरी, मुजाविर मालेगांव ने कलाम पेश किए। मुशायरे की सदारत नौशाद ठेकेदार झिंझाना चेयरमैन तथा निजामत गुलजार ने की। मेला वक्फ बोर्ड कमेटी के सज्जादा नशीं दरगाह अमजद अली, सफदर हुसैन अल्वी, बाबर हुसैन कुद्दूसी का सहयोग रहा। मुशायरे में कैराना इकरा हसन, पूर्व चेयरमैन राकेश गोयल, आशीष मित्तल आदि मौजूद रहे।