मुश्किल वक्त में कैसे छोड़ दें भाईचारा
शामली/झिंझाना अरे साहब इन बस्तियों के छोटी-छोटी दुकानों पर सालों से माल सप्लाई करते हैं। इन्हीं से उनका कारोबार है, इनसे हुई कमाई से ही उनके घर का चूल्हा जलता है। सालों ने इनसे कमा रहे हैं अब इन पर मुसीबत आई तो इनका साथ कैसे छोड़ दें। मजहब से बड़ी इंसानियत होती है, जो दुख दर्द में एक दूसरे के काम आना सिखाती है।
कोराना केस मिलने के कारण सीलिंग के दायरे में आए इलाकों को कुछ ऐसा ही सांप्रदायिक सौहार्द का नजारा देखने को मिल रहा है। जिन बस्तियों के आसपास भी संक्रमित होने के डर से कोई निकलने से परहेज कर रहा है, उन इलाकों में ये लोग दूध, ब्रेड, फल सब्जी की सप्लाई पहुंचा रहे हैं। अमर उजाला ने शामली और झिंझाना क्षेत्र सीलिंग क्षेत्रों के बाहर सड़क से ही हालात का जायजा लिया, पेश है रिपोर्ट-
सुबह करीब सवा सात बजे झिंझाना के सील हुई बस्तियों के अंदर से चरणदास नाम का दूधिया लोगों तक दूध पहुंचाकर लौट रहा था। बाइक पर दूध की खाली करेट थी। साइड में दो बडे़ थैले बंधे थे। पूछने पर बताया कि उसके पास दूध और ब्रेड का थोक का काम है। वो करीब साढ़े चार साल से इन सील हुई बस्तियों में लोगों की छोटी-छोटी दुकानों पर दूध की सप्लाई देता था। अब ये इलाके सील हो गए हैं। दुकाने बंद हैं। अधिकारियों ने उन्हें इस बस्तियों में डोर -टू-डोर दूध की होम डिलीवरी करने को कहा। कुछ परिचितों नजदीकी लोगों ने संक्रमण की वजह से इन बस्तियों में नहीं जाने की सलाह दी। रिश्तेदार भी परेशान हुए, लेकिन उन्हें लगा कि जिन बस्तियों में वह सालों से दूध, ब्रेड दे रहे हैं, भले ही वह दूसरे समुदाय के ही क्यों ना हो, इनकी कमाई से घर का चूल्हा जलता है तो अब मुश्किल वक्त में उन्हें कैसे मना कर दें। यही सोचकर वह सुबह और शाम दूध और ब्रेड डोर टू डोर दे रहा है।
सीलिंग एरिया में दूध की सप्लाई करके लौटे राहुल गोयल ने बताया कि वे लोग पांच साल से इन बस्तियों के दुकानदारों को दूध दे रहे हैं। यहां के लोग उनकी कमाई का जरिया है, यदि ऐसे वक्त में उन्होंने दूध नहीं दिया तो ये बहुत बड़ी गलती होगी। आखिर झिंझाना कस्बा तो हमेशा हिंदू मुस्लिम भाईचारे का प्रतीक रहा है। संक्रमण के डर से इस भाईचारे को खत्म कैसे कर दूं । उसके परिजनों ने कहा कि जिन लोगों से रोजगार है, मुश्किल में उनका साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
जिम्मेदारों के जरिए घरों तक पहुंचा दूध, सब्जी
शामली के नानूपुरा तिमरसा क्षेत्र की बस्तियों में सुबह सात से नौ बजे तक प्रशासन द्वारा अधिकृत किए फल, सब्जी और दूध विक्रेता गलियों के बाहर तक पहुंचे। लोगों ने प्रशासन द्वारा तय किए गए जिम्मेदारों को दूध के डिब्बे पहले से ही दे रखे थे। सील की गई गली के अंदर खड़े जिम्मेदार लोग एक एक करके लोगों के डिब्बे पकड़ाते रहे और दूधिया उनके लिखा नाम देखकर उसी हिसाब से दूध डालकर वापस देता रहा। इसी तरह ही फल और सब्जी वाले लोग जरूरत के हिसाब से गली के जिम्मेदारों के माध्यम से लोगों के घर तक पहुंचा रहे थे।
अंकल बताओ हम कब खेलेंगे अपनी गली में
घर में रहकर बच्चे भी बोर होने लगे हैं। उनका दोस्तों संग खेलना छूट गया है। हालांकि घर में वीडियो गेम, लूडो कैरम सब हैं लेकिन उन्हें अपने दोस्तों के साथ खेलने को नहीं मिल रहा। बच्चे घर की खिड़कियों से बाहर की ओर झांकते रहते हैं। शनिवार को कुछ ऊपरी मंजिल पर रहने वाले कुछ बच्चे दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर खड़े पुलिसकर्मियों से पूछ रहे थे कि पुलिस अंकल ये सब कब तक चलेगा, हम कब गली में खेलेंगे।

झिंझाना हॉस्पॉट इलाके में दूध विक्रेता चरणदास- फोटो : SHAMLI

झिंझाना हॉस्पॉट इलाके में जानकारी देता गोपाल- फोटो : SHAMLI

शामली में पुलिसकर्मियो को शरबत पिलाती बालिका- फोटो : SHAMLI

शामली नानूपरा तिमरासा हॉस्टपॉट इलाके में दूध के डब्बे देता वालियंटर्स- फोटो : SHAMLI

शामली नानूपरा तिमरासा हॉस्टपॉट इलाके में सब्जी देता वालियंटर्स- फोटो : SHAMLI

शामली नानूपरा तिमरासा हॉस्टपॉट इलाके में फल देता वालियंटर्स- फोटो : SHAMLI

शामली नानूपरा तिमरासा हॉस्टपॉट इलाके में छत से झांकते बच्चे- फोटो : SHAMLI

शामली नानूपरा तिमरासा हॉस्टपॉट इलाके में खिडकी से झांकता युवक- फोटो : SHAMLI

शामली नानूपरा तिमरासा हॉस्टपॉट इलाके में फल देता वालियंटर्स- फोटो : SHAMLI

ामली नानूपरा तिमरासा हॉस्टपॉट इलाके में दूध के पैकिट देता वालियंटर्स- फोटो : SHAMLI

शामली नानूपरा तिमरास हॉस्टपॉट इलाके में डूयूटी देता सिपाही- फोटो : SHAMLI

शामली में सुनसान पडा नानूपरा तिमरासा हॉस्टपॉट इलाका- फोटो : SHAMLI