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अलीपुर में मौत बांट रहा हेपेटाइटिस सी
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Sat, 09 Jul 2016 11:44 PM IST
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अलीपुर गांव में जांच रिपोर्ट दिखाते हुए हेपेटाइटिस सी से पीड़ित लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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शामली के कैराना कस्बे से पांच और जिला मुख्यालय से सात किलोमीटर दूर स्थित गांव अलीपुर। जहां खतरनाक बीमारी हेपेटाइटिस सी ने ऐसे पैर पसारे कि देखते-देखते आधी आबादी को अपनी चपेट में ले लिया। यहीं नहीं इस बीमारी के चलते पिछले करीब एक साल में एक दर्जन से अधिक मौतें हो चुकी हैं।
शनिवार को अमर उजाला टीम गांव में पहुंची तो अलीपुर गांव में लोगों के चेहरों पर हेपेटाइटिस सी का खौफ साफ नजर आया।
लोगों ने बताया कि कुछ लोग तो दूसरे शहरों में बडे़ अस्पतालों में महंगा उपचार करा रहे हैं, लेकिन गांव के ज्यादातर लोग हेपेटाइटिस सी पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद भी पैसों के अभाव में उपचार कराने से वंचित है ।
हेपेटाइटिस सी के मरीजों की लंबी फेहरिस्त ः नवाब व उसकी पत्नी मुनाजरा दोनों इस बीमारी से पीड़ित हैं। नवाब ने बताया कि 15 दिन पूर्व गांव में लगे कैम्प में जांच के बाद उन्हें जानलेवा बीमारी के बारे में पता चला, लेकिन इलाज के लिए रुपये नहीं है। खुर्शीद को भी हेपेटाइटिस सी पॉजिटिव आने के बाद रुपयों के अभाव में उपचार शुरू नहीं करा पाया।
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एक अन्य खुर्शीद को भी जांच में हेपेटाइटिस सी की पुष्टि हुुई। मेहताब तथा छोटे भाई मुन्शाद के ऊपर हेपेटाइटिस सी के उपचार में लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं। अरशद भी हेपेटाइटिस सी से पीड़ित है, जबकि इसी बीमारी के चलते उसके भाई अफसर की एक साल पहले मौत हो गई थी।
दिलशाद का शामली में प्राइवेट डाक्टर के पास उपचार चल रहा है, जबकि उसकी पत्नी खुर्शीदा पांच दिन मेरठ में एडमिट रही। यही नहीं इमराना, इसरत, खुर्शीदा, जमीला, मोमिना, नसीमा, साजिदा, सकीला, जासमीन, अफसाना, गुलशाना, हदीसा, अकबरी आदि को भी हेपेटाइटिस सी पॉजिटिव आया है, लेकिन उपचार महंगा होने के कारण सब ऊपर वाले के भरोसे हैं।
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शनिवार को अमर उजाला टीम गांव में पहुंची तो अलीपुर गांव में लोगों के चेहरों पर हेपेटाइटिस सी का खौफ साफ नजर आया।
लोगों ने बताया कि कुछ लोग तो दूसरे शहरों में बडे़ अस्पतालों में महंगा उपचार करा रहे हैं, लेकिन गांव के ज्यादातर लोग हेपेटाइटिस सी पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद भी पैसों के अभाव में उपचार कराने से वंचित है ।
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हेपेटाइटिस सी के मरीजों की लंबी फेहरिस्त ः नवाब व उसकी पत्नी मुनाजरा दोनों इस बीमारी से पीड़ित हैं। नवाब ने बताया कि 15 दिन पूर्व गांव में लगे कैम्प में जांच के बाद उन्हें जानलेवा बीमारी के बारे में पता चला, लेकिन इलाज के लिए रुपये नहीं है। खुर्शीद को भी हेपेटाइटिस सी पॉजिटिव आने के बाद रुपयों के अभाव में उपचार शुरू नहीं करा पाया।
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एक अन्य खुर्शीद को भी जांच में हेपेटाइटिस सी की पुष्टि हुुई। मेहताब तथा छोटे भाई मुन्शाद के ऊपर हेपेटाइटिस सी के उपचार में लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं। अरशद भी हेपेटाइटिस सी से पीड़ित है, जबकि इसी बीमारी के चलते उसके भाई अफसर की एक साल पहले मौत हो गई थी।
दिलशाद का शामली में प्राइवेट डाक्टर के पास उपचार चल रहा है, जबकि उसकी पत्नी खुर्शीदा पांच दिन मेरठ में एडमिट रही। यही नहीं इमराना, इसरत, खुर्शीदा, जमीला, मोमिना, नसीमा, साजिदा, सकीला, जासमीन, अफसाना, गुलशाना, हदीसा, अकबरी आदि को भी हेपेटाइटिस सी पॉजिटिव आया है, लेकिन उपचार महंगा होने के कारण सब ऊपर वाले के भरोसे हैं।