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हाथों से फिसल गई विवेचना
ब्यूरो/अमर उजाला, शामली
Updated Sun, 01 May 2016 12:26 AM IST
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शामली। राजनीति का केंद्र बने पूर्व ईओ और चेयरमैन प्रकरण में नया मोड़ आया है। रिपोर्ट दर्ज होने के 22 दिन में कार्रवाई करने से ठिठकती रही शामली पुलिस से केस की विवेचना छिन गई। अब इस केस की विवेचना गाजियाबाद क्राइम ब्रांच करेगी।
दरअसल, नगरपालिका परिषद शामली की पूर्व अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण ने आठ अप्रैल को चेयरमैन अरविंद संगल के खिलाफ एससीएसटी एक्ट, छेड़छाड़ और सरकारी कार्य में बाधा डालने की रिपोर्ट शामली कोतवाली में दर्ज कराई थी। मामले की विवेचना सीओ सिटी निशांक शर्मा कर रहे थे। 22 दिन के भीतर इस केस में विवेचक ने सिर्फ पीड़िता अमिता वरुण का बयान दर्ज किया और चंद कदमों की दूरी पर स्थित नगर पालिका परिषद में पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया।
उधर, शनिवार को इस केस की विवेचना ट्रांसफर होने का आदेश शामली पुलिस अधिकारियों को प्राप्त हो गया। अपर पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार झा और केस के विवेचक सीओ निशांक शर्मा ने बताया कि विवेचना यहां से ट्रांसफर होकर गाजियाबाद क्राइम ब्रांच को चली गई है। गाजियाबाद क्राइम ब्रांच ही इसकी विवेचना करेगी। आला अफसरों के आदेश पर विवेचना ट्रांसफर हुई है। विवेचना ट्रांसफर की मांग किसने की, उन्हें नहीं मालूम।
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फिर किसने कराई विवेचना ट्रांसफर
आमतौर पर आपराधिक मामला दर्ज होने पर पीड़ित पक्ष की प्रार्थना पर ही विवेचना ट्रांसफर हो सकती है। केस की वादी पूर्व अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण ने विवेचना ट्रांसफर कराने के लिए किसी तरह का प्रार्थना पत्र देने से इंकार किया है। वहीं, चेयरमैन अरविंद संगल ने भी अनभिज्ञता जताई है। अब सवाल यह है कि विवेचना आखिर ट्रांसफर कैसे हुई। विवेचना ट्रांसफर का फायदा पीड़ित को या आरोपी पक्ष को, किसे होगा। क्या शामली पुलिस ही केस से पल्ला झाड़ना चाहती थी, या पर्दे के पीछे कोई और है।
विवेचना ट्रांसफर का नियम
किसी केस की विवेचना पीड़ित पक्ष के प्रार्थना पत्र के आधार पर ही ट्रांसफर हो सकती है। जिले में एक थाने से दूसरे थाने में की जाती है, तो यह अधिकार पुलिस अधीक्षक को होता है। दूसरे जिले में विवेचना ट्रांसफर करने का अधिकार पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी रेंज) को है। वहीं, जोन स्तर पर एक रेंज से दूसरी रेंज में विवेचना ट्रांसफर पुलिस महानिरीक्षक (आईजी जोन) कर सकते हैं। इस केस की विवेचना में रेंज ही बदल गई। शामली जिला सहारनपुर रेंज में आता है, जबकि गाजियाबाद जिला मेरठ रेंज में है।
विवेचना ट्रांसफर होने की मुझे जानकारी नहीं है और न मैंने कहीं पर इस बारे में प्रार्थना पत्र दिया। यदि विवेचना ट्रांसफर हुई है, तो एससीएसटी आयोग में शिकायत दर्ज कराऊंगी। - अमिता वरुण, पूर्व अधिशासी अधिकारी
उन्होंने विवेचना ट्रांसफर के लिए कोई प्रार्थना पत्र नहीं दिया और न उन्हें पता कि विवेचना किस आधार पर ट्रांसफर हुई है। इससे ज्यादा मैं इस बारे में कुछ नहीं जानता। - अरविंद संगल, चेयरमैन, नगर पालिका परिषद शामलीं
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दरअसल, नगरपालिका परिषद शामली की पूर्व अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण ने आठ अप्रैल को चेयरमैन अरविंद संगल के खिलाफ एससीएसटी एक्ट, छेड़छाड़ और सरकारी कार्य में बाधा डालने की रिपोर्ट शामली कोतवाली में दर्ज कराई थी। मामले की विवेचना सीओ सिटी निशांक शर्मा कर रहे थे। 22 दिन के भीतर इस केस में विवेचक ने सिर्फ पीड़िता अमिता वरुण का बयान दर्ज किया और चंद कदमों की दूरी पर स्थित नगर पालिका परिषद में पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया।
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उधर, शनिवार को इस केस की विवेचना ट्रांसफर होने का आदेश शामली पुलिस अधिकारियों को प्राप्त हो गया। अपर पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार झा और केस के विवेचक सीओ निशांक शर्मा ने बताया कि विवेचना यहां से ट्रांसफर होकर गाजियाबाद क्राइम ब्रांच को चली गई है। गाजियाबाद क्राइम ब्रांच ही इसकी विवेचना करेगी। आला अफसरों के आदेश पर विवेचना ट्रांसफर हुई है। विवेचना ट्रांसफर की मांग किसने की, उन्हें नहीं मालूम।
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फिर किसने कराई विवेचना ट्रांसफर
आमतौर पर आपराधिक मामला दर्ज होने पर पीड़ित पक्ष की प्रार्थना पर ही विवेचना ट्रांसफर हो सकती है। केस की वादी पूर्व अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण ने विवेचना ट्रांसफर कराने के लिए किसी तरह का प्रार्थना पत्र देने से इंकार किया है। वहीं, चेयरमैन अरविंद संगल ने भी अनभिज्ञता जताई है। अब सवाल यह है कि विवेचना आखिर ट्रांसफर कैसे हुई। विवेचना ट्रांसफर का फायदा पीड़ित को या आरोपी पक्ष को, किसे होगा। क्या शामली पुलिस ही केस से पल्ला झाड़ना चाहती थी, या पर्दे के पीछे कोई और है।
विवेचना ट्रांसफर का नियम
किसी केस की विवेचना पीड़ित पक्ष के प्रार्थना पत्र के आधार पर ही ट्रांसफर हो सकती है। जिले में एक थाने से दूसरे थाने में की जाती है, तो यह अधिकार पुलिस अधीक्षक को होता है। दूसरे जिले में विवेचना ट्रांसफर करने का अधिकार पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी रेंज) को है। वहीं, जोन स्तर पर एक रेंज से दूसरी रेंज में विवेचना ट्रांसफर पुलिस महानिरीक्षक (आईजी जोन) कर सकते हैं। इस केस की विवेचना में रेंज ही बदल गई। शामली जिला सहारनपुर रेंज में आता है, जबकि गाजियाबाद जिला मेरठ रेंज में है।
विवेचना ट्रांसफर होने की मुझे जानकारी नहीं है और न मैंने कहीं पर इस बारे में प्रार्थना पत्र दिया। यदि विवेचना ट्रांसफर हुई है, तो एससीएसटी आयोग में शिकायत दर्ज कराऊंगी। - अमिता वरुण, पूर्व अधिशासी अधिकारी
उन्होंने विवेचना ट्रांसफर के लिए कोई प्रार्थना पत्र नहीं दिया और न उन्हें पता कि विवेचना किस आधार पर ट्रांसफर हुई है। इससे ज्यादा मैं इस बारे में कुछ नहीं जानता। - अरविंद संगल, चेयरमैन, नगर पालिका परिषद शामलीं