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तहसील जलाकर अंग्रेजों से लिया था लोहा
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शामली सहारनपुर तिराहे पर स्थित शहीद मोहर सिंह की प्रतिमा
- फोटो : SHAMLI
तहसील जलाकर अंग्रेजों से लिया था लोहा
शामली। भारत को आजादी दिलाने में कई वीरों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया है। शामली में भी कई वीरों ने अंग्रेजों से लोहा लिया और स्वतंत्रता की राह पर चलते हुए अपने प्राणों का न्यौछावर कर दिया। ऐसे ही वीर सपूतों में शामली के चौधरी मोहर सिंह भी ऐसे ही स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने क्रांतिकारियों के साथ वर्ष 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला था। उन्होंने अंग्रेजों से लोहा लेते हुए शामली तहसील और रेजीडेंसी को आग लगा दी थी। स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते हुए चौधरी मोहर सिंह शहीद हो गए। अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों में दहशत फैलाने के लिए उनका शव तीन दिन तक फांसी पर लटकाकर रखा गया था।
महान स्वतंत्रता सेनानी चौधरी मोहर सिंह की प्रतिमा एसटी तिराहा स्थित एकता में पार्क में स्थापित है। प्रतिमा के शिलापट पर उनकी बहादुरी की दास्तां लिखी है। चौधरी मोहर सिंह शामली के जमींदार चौधरी घासीराम के यहां जन्मे थे। उनका नाम आजादी के आंदोलन में अग्रणी सेनानियों में गिना जाता है। उन्होंने आंदोलन की योजना मथुरा में गुरु विरजानंद की कुटिया में बनाई थी।
अंग्रेजों के खिलाफ धधकती आग में चौधरी मोहर सिंह के साथ थानाभवन के काजी नियामत अली खां व महबूब अली खां ने मिलकर तहसील और रेजिडेंसी में आग लगा दी थी। उनकी अगुवाई में नौजवान अलग-अलग टुकड़ियों में अंग्रेजों से मुकाबला कर रहे थे। करीब दो महीने तक तहसील पर क्रांतिकारियों का कब्जा रहा था।
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फतेहपुर के जंगल में अंग्रेजों के साथ क्रांतिकारियों का संघर्ष हुआ था। यहां पर 225 पुरुष और 27 महिलाएं शहीद हुए थे। अंग्रेजों ने तोपें लगाकर शामली को चारों ओर से घेर लिया था। यहां पर थानाभवन के अब्दुल रहीम खां, सैदपुर के चौधरी भगवान सिंह, थानाभवन के चौधरी हरज्ञान सिंह, भैंसवाल के भवानी सिंह, आशा देवी, हरड़ के गेंदा सिंह, इंद्राकौर देवी, पुरबालियान के चौधरी हरपाल सिंह, शोभा देवी, परासौली के खैराती खां, शामली से मामकौर, सोरम से चौधरी लक्ष्मण सिंह, शामली से राजकौर, ढ़िकौली से शोभा सिंह के साथ चौधरी मोहर सिंह भी शहीद हो गए थे।
अंग्रेजों ने स्वतंत्रता सेनानियों में दहशत फैलाने के लिए झिंझाना-करनाल रोड पर एक वृक्ष पर शहीद मोहर सिंह के शव को तीन दिन तक फांसी पर लटकाकर रखा गया था। एकता पार्क में लगी शहीद मोहर सिंह की प्रतिमा युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी है।
दादा के बलिदान पर पूरे परिवार को गर्व
शहीद चौधरी मोहर सिंह के प्रपौत्र शहर के मोहल्ला रेलपार निवासी पूर्व सभासद सुरेंद्र आर्य ने बताया कि उनके दादा शहीद मोहर सिंह ने देश की आजादी में अपने प्राणों की आहुति दी है। उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। शहीद मोहर सिंह की देश के लिए कुर्बानी से पूरे परिवार को उन पर गर्व है। महान स्वतंत्रता सेनानी को उनका शत-शत नमन।
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शामली। भारत को आजादी दिलाने में कई वीरों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया है। शामली में भी कई वीरों ने अंग्रेजों से लोहा लिया और स्वतंत्रता की राह पर चलते हुए अपने प्राणों का न्यौछावर कर दिया। ऐसे ही वीर सपूतों में शामली के चौधरी मोहर सिंह भी ऐसे ही स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने क्रांतिकारियों के साथ वर्ष 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला था। उन्होंने अंग्रेजों से लोहा लेते हुए शामली तहसील और रेजीडेंसी को आग लगा दी थी। स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते हुए चौधरी मोहर सिंह शहीद हो गए। अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों में दहशत फैलाने के लिए उनका शव तीन दिन तक फांसी पर लटकाकर रखा गया था।
महान स्वतंत्रता सेनानी चौधरी मोहर सिंह की प्रतिमा एसटी तिराहा स्थित एकता में पार्क में स्थापित है। प्रतिमा के शिलापट पर उनकी बहादुरी की दास्तां लिखी है। चौधरी मोहर सिंह शामली के जमींदार चौधरी घासीराम के यहां जन्मे थे। उनका नाम आजादी के आंदोलन में अग्रणी सेनानियों में गिना जाता है। उन्होंने आंदोलन की योजना मथुरा में गुरु विरजानंद की कुटिया में बनाई थी।
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अंग्रेजों के खिलाफ धधकती आग में चौधरी मोहर सिंह के साथ थानाभवन के काजी नियामत अली खां व महबूब अली खां ने मिलकर तहसील और रेजिडेंसी में आग लगा दी थी। उनकी अगुवाई में नौजवान अलग-अलग टुकड़ियों में अंग्रेजों से मुकाबला कर रहे थे। करीब दो महीने तक तहसील पर क्रांतिकारियों का कब्जा रहा था।
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फतेहपुर के जंगल में अंग्रेजों के साथ क्रांतिकारियों का संघर्ष हुआ था। यहां पर 225 पुरुष और 27 महिलाएं शहीद हुए थे। अंग्रेजों ने तोपें लगाकर शामली को चारों ओर से घेर लिया था। यहां पर थानाभवन के अब्दुल रहीम खां, सैदपुर के चौधरी भगवान सिंह, थानाभवन के चौधरी हरज्ञान सिंह, भैंसवाल के भवानी सिंह, आशा देवी, हरड़ के गेंदा सिंह, इंद्राकौर देवी, पुरबालियान के चौधरी हरपाल सिंह, शोभा देवी, परासौली के खैराती खां, शामली से मामकौर, सोरम से चौधरी लक्ष्मण सिंह, शामली से राजकौर, ढ़िकौली से शोभा सिंह के साथ चौधरी मोहर सिंह भी शहीद हो गए थे।
अंग्रेजों ने स्वतंत्रता सेनानियों में दहशत फैलाने के लिए झिंझाना-करनाल रोड पर एक वृक्ष पर शहीद मोहर सिंह के शव को तीन दिन तक फांसी पर लटकाकर रखा गया था। एकता पार्क में लगी शहीद मोहर सिंह की प्रतिमा युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी है।
दादा के बलिदान पर पूरे परिवार को गर्व
शहीद चौधरी मोहर सिंह के प्रपौत्र शहर के मोहल्ला रेलपार निवासी पूर्व सभासद सुरेंद्र आर्य ने बताया कि उनके दादा शहीद मोहर सिंह ने देश की आजादी में अपने प्राणों की आहुति दी है। उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। शहीद मोहर सिंह की देश के लिए कुर्बानी से पूरे परिवार को उन पर गर्व है। महान स्वतंत्रता सेनानी को उनका शत-शत नमन।

शामली सहारनपुर तिराहे पर एकता पार्क- फोटो : SHAMLI