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Shamli News: मुकीम से अलग होकर बनाया था गैंग्स ऑफ कैराना
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शामली। मुकीम काला गिरोह का शार्प शूटर रहा एक लाख का इनामी बदमाश फुरकान समय के साथ खुद गैंग का सरगना बन बैठा था। पुलिस अधीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार मुकीम काला से मतभेद होने के बाद फुरकान ने अपना अलग आपराधिक नेटवर्क खड़ा किया। साथ ही ''गैंग्स ऑफ कैराना'' के नाम से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में रंगदारी, हत्या, लूट और अवैध हथियारों के दम पर दहशत का साम्राज्य कायम करने की कोशिश की।
एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि अलग-अलग गिरोह होने के बावजूद जब किसी बड़ी वारदात की साजिश बनती थी तो फुरकान और मुकीम काला गिरोह एक-दूसरे का हाथ थाम लेते थे। हत्या, रंगदारी और हथियारों की सप्लाई जैसी बड़ी वारदातों में दोनों गिरोह के अपराधी मिलकर काम करते थे। यही वजह थी कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब तक इनकी दहशत फैली हुई थी।
पुलिस का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में लगातार कार्रवाई कर फुरकान गिरोह की कमर तोड़ दी गई। गिरोह के कई सदस्य गिरफ्तार कर जेल भेजे गए, जबकि कई पर गैंगस्टर और एनएसए जैसी कार्रवाई भी की गई। अब फुरकान के एनकाउंटर के बाद पुलिस का लक्ष्य उसके फरार साथियों को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना है। पूर्व में एक बार मुकीम और फुरकान का विवाद भी क्षेत्र में अपराध करने को लेकर हुआ था।
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-20 से ज्यादा बदमाश थे मुकीम काला गिरोह में
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मुकीम काला गिरोह में 20 से अधिक शातिर अपराधी शामिल थे। गिरोह का सरगना मुकीम काला निवासी जहानपुरा (कैराना) था। उसके साथ अरशद (बढ़ी माजरा), साबिर (तिगरी), साबिर जंधेड़ी, रिजवान (जहानपुरा), काला उर्फ वाजिद (जंधेड़ी), सादर और हैदर (तीतरो), महताब (बलवा), नीरज (लांक), फरमान (भूरा), अकबर और हारुन (बरनावी), आसिफ व मुनशाद (खंद्रावली), हारुन और अजरू (हाजीपुर) समेत 20 से अधिक बदमाश सक्रिय रहे। इनमें से कई पुलिस कार्रवाई में गिरफ्तार हुए, जबकि कई मुठभेड़ों में मारे गए या लंबे समय तक जेल में रहे। बाद में फुरकान भी गिरोह में शामिल हो गया था।
-अनिल दुजाना गैंग से भी मिला लिया था हाथ
एसपी ने बताया कि वर्ष 2015 में एसटीएफ ने मुकीम काला और साबिर जंधेड़ी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में खुलासा हुआ था कि मुकीम काला गिरोह ने कुख्यात गैंगस्टर अनिल दुजाना गिरोह से हाथ मिला लिया था। गिरोह ने एके-47 खरीदने की भी तैयारी कर ली थी और कई बड़ी हत्याओं की साजिश रची जा रही थी। पुलिस की समय रहते की गई कार्रवाई से उस साजिश को विफल कर दिया गया था।
फुरकान के एनकाउंटर के बाद पुलिस का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय इस आपराधिक नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। अब पुलिस गिरोह के बचे हुए सदस्यों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
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एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि अलग-अलग गिरोह होने के बावजूद जब किसी बड़ी वारदात की साजिश बनती थी तो फुरकान और मुकीम काला गिरोह एक-दूसरे का हाथ थाम लेते थे। हत्या, रंगदारी और हथियारों की सप्लाई जैसी बड़ी वारदातों में दोनों गिरोह के अपराधी मिलकर काम करते थे। यही वजह थी कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब तक इनकी दहशत फैली हुई थी।
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पुलिस का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में लगातार कार्रवाई कर फुरकान गिरोह की कमर तोड़ दी गई। गिरोह के कई सदस्य गिरफ्तार कर जेल भेजे गए, जबकि कई पर गैंगस्टर और एनएसए जैसी कार्रवाई भी की गई। अब फुरकान के एनकाउंटर के बाद पुलिस का लक्ष्य उसके फरार साथियों को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना है। पूर्व में एक बार मुकीम और फुरकान का विवाद भी क्षेत्र में अपराध करने को लेकर हुआ था।
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-20 से ज्यादा बदमाश थे मुकीम काला गिरोह में
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मुकीम काला गिरोह में 20 से अधिक शातिर अपराधी शामिल थे। गिरोह का सरगना मुकीम काला निवासी जहानपुरा (कैराना) था। उसके साथ अरशद (बढ़ी माजरा), साबिर (तिगरी), साबिर जंधेड़ी, रिजवान (जहानपुरा), काला उर्फ वाजिद (जंधेड़ी), सादर और हैदर (तीतरो), महताब (बलवा), नीरज (लांक), फरमान (भूरा), अकबर और हारुन (बरनावी), आसिफ व मुनशाद (खंद्रावली), हारुन और अजरू (हाजीपुर) समेत 20 से अधिक बदमाश सक्रिय रहे। इनमें से कई पुलिस कार्रवाई में गिरफ्तार हुए, जबकि कई मुठभेड़ों में मारे गए या लंबे समय तक जेल में रहे। बाद में फुरकान भी गिरोह में शामिल हो गया था।
-अनिल दुजाना गैंग से भी मिला लिया था हाथ
एसपी ने बताया कि वर्ष 2015 में एसटीएफ ने मुकीम काला और साबिर जंधेड़ी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में खुलासा हुआ था कि मुकीम काला गिरोह ने कुख्यात गैंगस्टर अनिल दुजाना गिरोह से हाथ मिला लिया था। गिरोह ने एके-47 खरीदने की भी तैयारी कर ली थी और कई बड़ी हत्याओं की साजिश रची जा रही थी। पुलिस की समय रहते की गई कार्रवाई से उस साजिश को विफल कर दिया गया था।
फुरकान के एनकाउंटर के बाद पुलिस का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय इस आपराधिक नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। अब पुलिस गिरोह के बचे हुए सदस्यों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।