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Shamli News: डीएल में कोड वर्ड से चल रहा खेल, बिना लिए ही ड्राइविंग टेस्ट पास, सिस्टम फेल
Sun, 29 Oct 2023 12:34 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sun, 29 Oct 2023 12:34 AM IST
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शामली। नियमों को ताक पर रखकर परिवहन विभाग आवेदकों को ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर रहा है। परिवहन विभाग के पास अपना ड्राइविंग ट्रैक ही नहीं है जिसके कारण बिना टेस्ट लिए ही डीएल जारी किए जा रहे हैं। यही नहीं, जिस परीक्षा से गुजरना पड़ता है उसके बारे में उन्हें पता ही नहीं है। जिला बनने 11 साल से अधिक समय से यह खेल रुपयों के दम पर चल रहा है। बिना किए टेस्ट के हर माह 30 से लेकर 35 डीएल जारी किए जा रहे हैं। दलालों ने कोड वर्ड निर्धारित किए हुए हैं, जिन्हें देखते ही आरटीओ कार्यालय के अंदर फाइल आगे बढ़ा दी जाती है। संवाद
केस-1
झिंझाना निवासी याकूब ने बताया कि उसने दलाल को तीन हजार रुपये दिए। जिसके बदले डीएल बनवाना था। लर्निंग के बाद ड्राइविंग टेस्ट देना होता है, मगर उससे कोई टेस्ट नहीं लिया गया। एक माह बाद ही उसे डीएल दे दिया गया।
केस-2
टपराना निवासी शोएब ने बताया कि उसने तीन हजार रुपये में डीएल बनवाया। न तो उससे गाड़ी चलवाकर देखी गई न ही कोई सवाल-जवाब किए गए। दलाल ने कोड वर्ड फार्म पर लिखा और डीएल उसके हाथ में दे दिया गया।
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केस-3
कैराना निवासी प्रदीप ने बताया कि उसने हाल ही में डीएल बनवाया था। उससे न तो कोई गाड़ी चलवाकर देखी गई न ही सवाल-जवाब किए गए। रुपये दिए और उसका डीएल बन गया।
टेस्ट कहां हुआ, किसी को पता नहीं
शामली की यदि बात की जाए तो यहां पर एक साल में 500 से अधिक के डीएल बनाए जाते हैं। कई ने पूछने पर बताया कि उन्हें नहीं पता कि टेस्ट कहां पर हुआ और इसकी क्या प्रक्रिया होती है।
कोड वर्ड किए हुए हैं निर्धारित, तुरंत फाइल को आगे कर देते हैं कर्मचारी
पड़ताल के दौरान सामने आया है कि दलालों ने कोड वर्ड निर्धारित किए हुए हैं। जिनसे रुपये लिए जाते हैं, उनकी फाइलों पर दलाल 12 एबी, 13 बीसी आदि लिख देते हैं, आरटीओ कार्यालय के अंदर जाते ही जिस फाइल पर कोड वर्ड लिखे गए होते हैं, उन्हें आगे कर दिया जाता है। बाकी को पेंडिंग में रखा जाता है।
दलाल से हुई बातचीत के प्रमुख अंश
संवाददाता : भाई, मेरे से गाड़ी चलानी नहीं आती, आपने लर्निंग तो बनवा दिया मगर डीएल कैसे बनेगा
दलाल : टेंशन मत लें, 1800 रुपये दे रहे हो ना, सब हो जाएगा
संवाददाता : मगर कैसे ?
दलाल : तुम्हारी फाइल पर हम एबीसी, या कोई कोड वर्ड लिखकर अंदर दे देंगे, कोड वर्ड देखते ही वे समझ जाएंगे कि आपके रुपये आए हुए हैं, आपको आसानी से बिना ड्राइविंग टेस्ट के लाइसेंस जारी हो जाएगा।
संवाददाता : ओके भाई।
दलाल-2
कागजों में चलाई जाती है गाड़ी
संवाददाता : भाई वैसे अपने यहां पर टेस्टिंग ट्रैक तो है नहीं, फिर यदि किसी से गाड़ी चलवानी होती है तो कैसे चलवाई जाती है
दलाल : कोई गाड़ी नहीं चलवाई जाती, रुपये देते ही काम हो जाता है
संवाददाता : जो दलाल को रुपये नहीं दे, वो कैसे करते हैं
दलाल: टेस्टिंग के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है, आपको एक माह में डीएल मिल जाएगा, टेंशन मत लो, वो हमारा काम है।
सिर्फ होती है कागजी कार्रवाई
लाइसेंस बनवाने के लिए आने वाले आवेदकों के वाहनों को सड़क पर ही खड़ा करवा दिया जाता है। कागजी कार्रवाई होती है ओर फिर लाइसेंस हाथ में आ जाता है। ऐसा नहीं है कि यह आलाधिकारी नहीं देख रहे, लेकिन कोई इसके लिए प्रयास नहीं कर रहा है। सब कुछ जानते हुए भी अनजान बने हुए हैं।
जानिए.. क्या होता है टेस्ट
: सबसे पहले आठ अंक जैसे ड्राइविंग ट्रैक पर ट्रायल होगा। इस पर गाड़ी सीधी और फिर पीछे लानी होगी। यहां 20 सेंसर लगे होंगे। जहां भी गलती होगी, सेंसर बज उठेगा।
: ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रैक पर पहली बार करीब पांच फिट गाड़ी आगे ले जानी होगी। बढ़ाते समय गाड़ी जरा पीछे आई या गलत दिशा में गई तो सेंसर बज उठेगा। : टेस्ट में गाड़ी को एक बार सीधा, दूसरी बार पीछे के लिए आठ के अंक में पार्क करना होगा। यदि कोई गड़बड़ी हुई तो लाइसेंस नहीं बनेगा।
हर माह 30 से लेकर 35 डीएल बनाए जाते हैं। विभाग के पास टेस्टिंग ट्रैक नहीं है, जिसके कारण सड़क पर ही अभ्यर्थियों से गाड़ी चलवाकर देखी जाती है। मैं खुद भी सवाल-जवाब करता हूं। नई बिल्डिंग के पास ही टेस्टिंग ट्रैक की सुविधा भी प्रदान कराई जाएगी। बिना ड्राइविंग टेस्ट के लाइसेंस जारी करने के मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-रोहित राजपूत, एआरटीओ शामली
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केस-1
झिंझाना निवासी याकूब ने बताया कि उसने दलाल को तीन हजार रुपये दिए। जिसके बदले डीएल बनवाना था। लर्निंग के बाद ड्राइविंग टेस्ट देना होता है, मगर उससे कोई टेस्ट नहीं लिया गया। एक माह बाद ही उसे डीएल दे दिया गया।
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केस-2
टपराना निवासी शोएब ने बताया कि उसने तीन हजार रुपये में डीएल बनवाया। न तो उससे गाड़ी चलवाकर देखी गई न ही कोई सवाल-जवाब किए गए। दलाल ने कोड वर्ड फार्म पर लिखा और डीएल उसके हाथ में दे दिया गया।
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केस-3
कैराना निवासी प्रदीप ने बताया कि उसने हाल ही में डीएल बनवाया था। उससे न तो कोई गाड़ी चलवाकर देखी गई न ही सवाल-जवाब किए गए। रुपये दिए और उसका डीएल बन गया।
टेस्ट कहां हुआ, किसी को पता नहीं
शामली की यदि बात की जाए तो यहां पर एक साल में 500 से अधिक के डीएल बनाए जाते हैं। कई ने पूछने पर बताया कि उन्हें नहीं पता कि टेस्ट कहां पर हुआ और इसकी क्या प्रक्रिया होती है।
कोड वर्ड किए हुए हैं निर्धारित, तुरंत फाइल को आगे कर देते हैं कर्मचारी
पड़ताल के दौरान सामने आया है कि दलालों ने कोड वर्ड निर्धारित किए हुए हैं। जिनसे रुपये लिए जाते हैं, उनकी फाइलों पर दलाल 12 एबी, 13 बीसी आदि लिख देते हैं, आरटीओ कार्यालय के अंदर जाते ही जिस फाइल पर कोड वर्ड लिखे गए होते हैं, उन्हें आगे कर दिया जाता है। बाकी को पेंडिंग में रखा जाता है।
दलाल से हुई बातचीत के प्रमुख अंश
संवाददाता : भाई, मेरे से गाड़ी चलानी नहीं आती, आपने लर्निंग तो बनवा दिया मगर डीएल कैसे बनेगा
दलाल : टेंशन मत लें, 1800 रुपये दे रहे हो ना, सब हो जाएगा
संवाददाता : मगर कैसे ?
दलाल : तुम्हारी फाइल पर हम एबीसी, या कोई कोड वर्ड लिखकर अंदर दे देंगे, कोड वर्ड देखते ही वे समझ जाएंगे कि आपके रुपये आए हुए हैं, आपको आसानी से बिना ड्राइविंग टेस्ट के लाइसेंस जारी हो जाएगा।
संवाददाता : ओके भाई।
दलाल-2
कागजों में चलाई जाती है गाड़ी
संवाददाता : भाई वैसे अपने यहां पर टेस्टिंग ट्रैक तो है नहीं, फिर यदि किसी से गाड़ी चलवानी होती है तो कैसे चलवाई जाती है
दलाल : कोई गाड़ी नहीं चलवाई जाती, रुपये देते ही काम हो जाता है
संवाददाता : जो दलाल को रुपये नहीं दे, वो कैसे करते हैं
दलाल: टेस्टिंग के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है, आपको एक माह में डीएल मिल जाएगा, टेंशन मत लो, वो हमारा काम है।
सिर्फ होती है कागजी कार्रवाई
लाइसेंस बनवाने के लिए आने वाले आवेदकों के वाहनों को सड़क पर ही खड़ा करवा दिया जाता है। कागजी कार्रवाई होती है ओर फिर लाइसेंस हाथ में आ जाता है। ऐसा नहीं है कि यह आलाधिकारी नहीं देख रहे, लेकिन कोई इसके लिए प्रयास नहीं कर रहा है। सब कुछ जानते हुए भी अनजान बने हुए हैं।
जानिए.. क्या होता है टेस्ट
: सबसे पहले आठ अंक जैसे ड्राइविंग ट्रैक पर ट्रायल होगा। इस पर गाड़ी सीधी और फिर पीछे लानी होगी। यहां 20 सेंसर लगे होंगे। जहां भी गलती होगी, सेंसर बज उठेगा।
: ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रैक पर पहली बार करीब पांच फिट गाड़ी आगे ले जानी होगी। बढ़ाते समय गाड़ी जरा पीछे आई या गलत दिशा में गई तो सेंसर बज उठेगा। : टेस्ट में गाड़ी को एक बार सीधा, दूसरी बार पीछे के लिए आठ के अंक में पार्क करना होगा। यदि कोई गड़बड़ी हुई तो लाइसेंस नहीं बनेगा।
हर माह 30 से लेकर 35 डीएल बनाए जाते हैं। विभाग के पास टेस्टिंग ट्रैक नहीं है, जिसके कारण सड़क पर ही अभ्यर्थियों से गाड़ी चलवाकर देखी जाती है। मैं खुद भी सवाल-जवाब करता हूं। नई बिल्डिंग के पास ही टेस्टिंग ट्रैक की सुविधा भी प्रदान कराई जाएगी। बिना ड्राइविंग टेस्ट के लाइसेंस जारी करने के मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-रोहित राजपूत, एआरटीओ शामली