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Shamli News: बकाया गन्ना भुगतान से लेकर बेसहारा पशु चुनाव में नहीं बन रहे मुद्दा
Tue, 16 Apr 2024 03:46 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Tue, 16 Apr 2024 03:46 AM IST
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शामली शुगर मिल में चनावी चर्चा करते किसान
शामली। गन्ना बेल्ट में चुनाव है और गन्ने पर ही बात नहीं हो रही है। किसानों का अकेली शामली शुगर मिल पर 214 करोड़ रुपया बकाया है। हर साल किसान बकाया गन्ना भुगतान पाने के लिए सड़क पर उतरता है, लेकिन चुनावी माहौल में किसानों के बकाया भुगतान दिलाने, आवारा पशुओं से निजात दिलाने, फसलों का उचित भाव दिलवाने की बात कोई नहीं कर रहा है। अमर उजाला की टीम के सामने किसानों ने समस्याओं को उठाते हुए अपना दर्द बयां किया है। किसानों ने साफ कहा कि बकाया गन्ना भुगतान, बेसहारा पशुओं द्वारा फसलों को बर्बाद करने की समस्या उनकी प्रमुख है। मगर कोई दल समस्या का समाधान करने को तैयार नहीं है।
स्थान- शुगर मिल शामली
यहां पेराई वाले स्थान पर कुछ किसान बैठे हुए थे। सिंभालका गांव के किसान बलराज सिंह बोले, बकाया गन्ना भुगतान को लेकर जब मिल मालिक के साथ किसानों की वार्ता हुई थी तो कहा गया था कि जल्द ही पिछले सत्र का बकाया दिया जाएगा और 14 दिन के अंदर नए सत्र का बकाया भुगतान होगा। मगर एक माह 12 दिन से भुगतान नहीं मिला है। इसी दौरान बहावड़ी गांव के कुलबीर ने कहा कि एक तो गन्ना भुगतान नहीं किया जा रहा, दूसरा बेसहारा पशुओं ने जीना मुहाल कर दिया है। फसलों को बर्बाद करने के साथ किसानों पर हमला तक कर रहे हैँ। ताना गांव के छोटू, टिटौली के नीटू ने कहा कि किसानों को गन्ने का वाजिब दाम नहीं दिया जा रहा और इसकी बात भी कोई नहीं कर रहा है। राजीव शास्त्री कहते हैं कि मिल मालिक की नियत ठीक नहीं है। जिसके कारण बकाया गन्ना भुगतान नहीं हो रहा।
आत्माराम चौहान ने कहा कि मुद्दे तो बहुत हैं नेता वोट मांगने आते हैं और चले जाते हैं। बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर गन्ना मंत्री से भी मिले थे मगर कोई सुनवाई नहीं की गई।
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लिलौन के पुष्पेंद्र कहते हैं कि एक माह से इस सत्र का गन्ना भुगतान नहीं दिया गया। चार लाख से अधिक रुपये मिल पर बकाया है। बच्चों की फीस तक नहीं भर पा रहे है। खेड़ी गांव में काम कर रहे किसान लीलो, सोहनवीर ने कहा कि आवारा पशुओं से निजात दिलाने वाले को इस बार वह वोट देंगे।
वर्ष 1931 में हुई थी चीनी मिल की स्थापना
अपर दोआब शुगर मिल की स्थापना वर्ष 1931 में की गई थी। जबकि मिल 1933 में चालू हुई थी। मिल की पेराई क्षमता करीब 75 हजार क्विंटल है। मिल एशिया की सबसे पुरानी मिलो में गिनी जाती है।
सबसे पहले भुगतान के लिए जानी जाती थी मिल
एशिया की नामचीन शुगर मिलों में गिनी जाने वाली शामली की अपर दोआब शुगर मिल पहले सबसे पहले किसानों का गन्ना भुगतान करने के लिए जानी जाती थी। मगर 2017 के बाद मिल में तकनीकी खराबी के कारण किसानों का गन्ना भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा। इस सत्र में भी मिल छह बार खराब हो चुकी है।
पूर्व में किसानों द्वारा बकाया भुगतान को लेकर किए गए आंदोलन
- वर्ष 2017 में बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने 17 दिन तक धरना दिया था।
-वर्ष 2018 में बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सवित मलिक के नेतृत्व में किसानों ने कलक्ट्रेट पर 19 दिन तक धरना दिया था। जिसके बाद किसानों को बकाया 120 करोड़ का भुगतान दिया गया था।
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-वर्ष 2018 में ही बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने 12 दिन तक धरना दिया था।
2020 में 13 से 30 जनवरी तक किसानों ने बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर धरना दिया ।
: 2022 में तहसील में किसानों ने 6 दिन तक धरना दिया था।
मिल मालिकों से कई वार्ता, फिर भी नतीजा सिफर
शामली जिले के किसानों की सबसे बड़ी समस्या गन्ने का बकाया भुगतान है। मिल मालिकों से आठ वार्ता किसानों की हो चुकी। हर बार जल्द बकाया भुगतान की बात कहीं जाती है मगर भुगतान नहीं किया जाता।
बकाया गन्ना भुगतान के लिए मिल मालिकों से बात की जाएगी। इसके अलावा बेसहारा पशुओं को पकड़वाने के लिए अभियान चलाया गया है। प्रयास रहेगा कि जल्द ही सभी बेसहारा पशुओं को गोशालाओं में छुड़वाया जाएगा। एक हजार से अधिक पशु गोशाला में छुड़वाए जा चुके हैं।
- संतोष कुमार, एडीएम शामली
जिले में किसानों की संख्या : 1 लाख 35 हजार
गन्ने का रकबा : 79 हजार हेक्टेयर
गेहूं का रकबा : 55 हजार हेक्टेयर
सरसों का रकबा : 2270 हेक्टेयर
जिले की शामली, थानाभवन और ऊन तीनों मिलों से 77 हजार से अधिक किसान जुड़े हैं।
जिले में गोशालाओं की संख्या 27
प्राइवेट गोशाला : 4
गोशालाओं में पशुओं की संख्या- 5300
शुगर मिल में खराबी का प्रमुख कारण
शुगर मिल कई साल पुरानी हो चुकी है। जिसके कारण आए दिन मिल में खराबी आई रहती है, जिसके कारण शहर में जाम लगता है। लोगों को भी परेशानी होती है। पेराई क्षमता 75 हजार क्विंटल प्रतिदिन की है, मगर 40 से 45 हजार क्विंटल की पेराई ही हो पाती है। मेंटीनेंस पर ध्यान नहीं देना भी मिल में तकनीकी खराबी का एक प्रमुख कारण है।
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स्थान- शुगर मिल शामली
यहां पेराई वाले स्थान पर कुछ किसान बैठे हुए थे। सिंभालका गांव के किसान बलराज सिंह बोले, बकाया गन्ना भुगतान को लेकर जब मिल मालिक के साथ किसानों की वार्ता हुई थी तो कहा गया था कि जल्द ही पिछले सत्र का बकाया दिया जाएगा और 14 दिन के अंदर नए सत्र का बकाया भुगतान होगा। मगर एक माह 12 दिन से भुगतान नहीं मिला है। इसी दौरान बहावड़ी गांव के कुलबीर ने कहा कि एक तो गन्ना भुगतान नहीं किया जा रहा, दूसरा बेसहारा पशुओं ने जीना मुहाल कर दिया है। फसलों को बर्बाद करने के साथ किसानों पर हमला तक कर रहे हैँ। ताना गांव के छोटू, टिटौली के नीटू ने कहा कि किसानों को गन्ने का वाजिब दाम नहीं दिया जा रहा और इसकी बात भी कोई नहीं कर रहा है। राजीव शास्त्री कहते हैं कि मिल मालिक की नियत ठीक नहीं है। जिसके कारण बकाया गन्ना भुगतान नहीं हो रहा।
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आत्माराम चौहान ने कहा कि मुद्दे तो बहुत हैं नेता वोट मांगने आते हैं और चले जाते हैं। बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर गन्ना मंत्री से भी मिले थे मगर कोई सुनवाई नहीं की गई।
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लिलौन के पुष्पेंद्र कहते हैं कि एक माह से इस सत्र का गन्ना भुगतान नहीं दिया गया। चार लाख से अधिक रुपये मिल पर बकाया है। बच्चों की फीस तक नहीं भर पा रहे है। खेड़ी गांव में काम कर रहे किसान लीलो, सोहनवीर ने कहा कि आवारा पशुओं से निजात दिलाने वाले को इस बार वह वोट देंगे।
वर्ष 1931 में हुई थी चीनी मिल की स्थापना
अपर दोआब शुगर मिल की स्थापना वर्ष 1931 में की गई थी। जबकि मिल 1933 में चालू हुई थी। मिल की पेराई क्षमता करीब 75 हजार क्विंटल है। मिल एशिया की सबसे पुरानी मिलो में गिनी जाती है।
सबसे पहले भुगतान के लिए जानी जाती थी मिल
एशिया की नामचीन शुगर मिलों में गिनी जाने वाली शामली की अपर दोआब शुगर मिल पहले सबसे पहले किसानों का गन्ना भुगतान करने के लिए जानी जाती थी। मगर 2017 के बाद मिल में तकनीकी खराबी के कारण किसानों का गन्ना भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा। इस सत्र में भी मिल छह बार खराब हो चुकी है।
पूर्व में किसानों द्वारा बकाया भुगतान को लेकर किए गए आंदोलन
- वर्ष 2017 में बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने 17 दिन तक धरना दिया था।
-वर्ष 2018 में बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सवित मलिक के नेतृत्व में किसानों ने कलक्ट्रेट पर 19 दिन तक धरना दिया था। जिसके बाद किसानों को बकाया 120 करोड़ का भुगतान दिया गया था।
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-वर्ष 2018 में ही बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने 12 दिन तक धरना दिया था।
2020 में 13 से 30 जनवरी तक किसानों ने बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर धरना दिया ।
: 2022 में तहसील में किसानों ने 6 दिन तक धरना दिया था।
मिल मालिकों से कई वार्ता, फिर भी नतीजा सिफर
शामली जिले के किसानों की सबसे बड़ी समस्या गन्ने का बकाया भुगतान है। मिल मालिकों से आठ वार्ता किसानों की हो चुकी। हर बार जल्द बकाया भुगतान की बात कहीं जाती है मगर भुगतान नहीं किया जाता।
बकाया गन्ना भुगतान के लिए मिल मालिकों से बात की जाएगी। इसके अलावा बेसहारा पशुओं को पकड़वाने के लिए अभियान चलाया गया है। प्रयास रहेगा कि जल्द ही सभी बेसहारा पशुओं को गोशालाओं में छुड़वाया जाएगा। एक हजार से अधिक पशु गोशाला में छुड़वाए जा चुके हैं।
- संतोष कुमार, एडीएम शामली
जिले में किसानों की संख्या : 1 लाख 35 हजार
गन्ने का रकबा : 79 हजार हेक्टेयर
गेहूं का रकबा : 55 हजार हेक्टेयर
सरसों का रकबा : 2270 हेक्टेयर
जिले की शामली, थानाभवन और ऊन तीनों मिलों से 77 हजार से अधिक किसान जुड़े हैं।
जिले में गोशालाओं की संख्या 27
प्राइवेट गोशाला : 4
गोशालाओं में पशुओं की संख्या- 5300
शुगर मिल में खराबी का प्रमुख कारण
शुगर मिल कई साल पुरानी हो चुकी है। जिसके कारण आए दिन मिल में खराबी आई रहती है, जिसके कारण शहर में जाम लगता है। लोगों को भी परेशानी होती है। पेराई क्षमता 75 हजार क्विंटल प्रतिदिन की है, मगर 40 से 45 हजार क्विंटल की पेराई ही हो पाती है। मेंटीनेंस पर ध्यान नहीं देना भी मिल में तकनीकी खराबी का एक प्रमुख कारण है।

शामली शुगर मिल में चनावी चर्चा करते किसान