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दो साल से मिट्टी में मिल रही फूलों की खुशबू
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बाबरी (शामली)। फूलों की खेती करने वाले किसान दो साल से भारी नुकसान उठा रहे हैं। पिछले साल लंबे लॉकडाउन के चलते कई किसानों ने अपनी खड़ी फसल को जोत दिया था और इस बार भी हालात ऐसे ही बन रहे हैं। शादियां भी बंदिशों में हो रही हैं और अन्य कार्यक्रम भी नहीं हो रहे। इसलिए फूलों की मांग नहीं है। इस समय खेतों में खड़ी गेंदे की फसल बर्बाद हो रही है। कई किसान इस फूलों की फसल को जोतकर नई फसल बोने की तैयारी कर रहे हैं।
जिले में बाबरी और थानाभवन क्षेत्र में फूलों की खेती होती है। कोरोना महामारी के चलते शादी समारोह में ज्यादा लोगों के शामिल होने पर पाबंदी है। लोग चुनिंदा लोगों की मौजूदगी में ही शादी रहे हैं। ऐसे में न तो बैंक्वेट हालों में सजावट हो रही है और न ही गाड़ियां आदि सजाई जा रही हैं। अन्य कार्यक्रमों में भी फूलों की मांग नहीं है। पिछले साल भी लंबे लॉकडाउन के कारण फूलों की मांग नहीं थी। त्योहारी सीजन में जरूर कुछ मांग बढ़ी थी, लेकिन अब हालात फिर वैसे ही हो गए हैं।
किसान धर्म सिंह सैनी ने 16 बीघा जमीन में गेंदे की फसल बोई हुई है। उनका कहना है कि लाखों रुपये लागत आई है, लेकिन फसल तैयार हुई तो कोरोना कर्फ्यू की पाबंदी लग गई। फसल बाहर नहीं जा सकी। अब उन्हें लागत भी नहीं मिल रही। फसल उगाने के लिए उधार लिया गया पैसा कैसे उतारेंगे, इसकी चिंता सता रही है। पिछले वर्ष भी उन्हें फसल खेत में ही जोतनी पड़ी थी।
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किसान गौरव कश्यप ने करीब दो बीघा गेंदे की फसल उगाई है। अब फसल को खेत में ही जोतने के अलावा कोई चारा नहीं है। किसान रामकिशन ने कुछ दिन पूर्व अपनी छह बीघा गेंदे की फसल जोतकर नष्ट कर दी। फूलों की मांग ही नहीं है। खेतों में फसल खराब हो रही थी।
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जिले में बाबरी और थानाभवन क्षेत्र में फूलों की खेती होती है। कोरोना महामारी के चलते शादी समारोह में ज्यादा लोगों के शामिल होने पर पाबंदी है। लोग चुनिंदा लोगों की मौजूदगी में ही शादी रहे हैं। ऐसे में न तो बैंक्वेट हालों में सजावट हो रही है और न ही गाड़ियां आदि सजाई जा रही हैं। अन्य कार्यक्रमों में भी फूलों की मांग नहीं है। पिछले साल भी लंबे लॉकडाउन के कारण फूलों की मांग नहीं थी। त्योहारी सीजन में जरूर कुछ मांग बढ़ी थी, लेकिन अब हालात फिर वैसे ही हो गए हैं।
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किसान धर्म सिंह सैनी ने 16 बीघा जमीन में गेंदे की फसल बोई हुई है। उनका कहना है कि लाखों रुपये लागत आई है, लेकिन फसल तैयार हुई तो कोरोना कर्फ्यू की पाबंदी लग गई। फसल बाहर नहीं जा सकी। अब उन्हें लागत भी नहीं मिल रही। फसल उगाने के लिए उधार लिया गया पैसा कैसे उतारेंगे, इसकी चिंता सता रही है। पिछले वर्ष भी उन्हें फसल खेत में ही जोतनी पड़ी थी।
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किसान गौरव कश्यप ने करीब दो बीघा गेंदे की फसल उगाई है। अब फसल को खेत में ही जोतने के अलावा कोई चारा नहीं है। किसान रामकिशन ने कुछ दिन पूर्व अपनी छह बीघा गेंदे की फसल जोतकर नष्ट कर दी। फूलों की मांग ही नहीं है। खेतों में फसल खराब हो रही थी।