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Shamli News: दर्जी काे यातनाएं देकर चालान करने में दरोगा समेत पांच पुलिसकर्मी दोषी

Sun, 21 Jul 2024 02:17 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Sun, 21 Jul 2024 02:17 AM IST
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Five policemen including Inspector guilty of torturing tailor and issuing challan
शामली। पिंंडोरा जहागीरपुर गांव के दर्जी सोनू का फर्जी तरीके से जमानतीय वारंट जारी कर यातना देने और शांतिभंग में चालान करने के मामले में दरोगा समेत पांच पुलिसकर्मी सीओ की जांच में दोषी पाए गए हैं। सीओ सिटी ने पूरे मामले की जांच रिपोर्ट एसपी को सौंपी है। एसपी ने जल्द पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने की बात कहीं है।
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दरअसल, पिंडौरा जहागीरपुर निवासी दर्जी सोनू पुत्र जगरोशन ने एसपी अभिषेक से शिकायत करते हुए बताया था कि 28 अक्तूबर को उसे ऊन पुलिस चौकी पर तैनात पांच पुलिसकर्मी जमानतीय वारंट के आधार पर अपने साथ ले गए और पूरी रात उसे पुलिस चौकी पर उसके साथ मारपीट करते हुए यातना दी। अगले दिन 29 अक्तूबर को शांतिभंग में उसका चालान कर दिया। सोनू का आरोप था कि कोर्ट से उसका कोई भी जमानतीय वारंट जारी नहीं किया गया था, खुद ही पुलिसकर्मियों ने फर्जी वारंट जारी कर उसका चालान किया।
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इस मामले की जांच एएसपी को सौंपी गई थी। एएसपी ने एसडीएम उन को इस संबंध में पत्र लिखा और वारंट जारी होने या फिर नहीं होने के बारे में पूरी रिपोर्ट मांगी। एसडीएम ऊन ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि प्रभारी निरीक्षक थाना झिंझाना की चालानी रिपोर्ट 23 मई 2023 को प्राप्त हुई थी। प्रथम पक्ष जगरोशन, संजीव कुमार, सुमित कुमार सोनू कुमार और द्वितीय पक्ष रतन सिंह आदि के बीच मकान पर कब्जे को लेकर विवाद चल रहा है। थाना प्रभारी की रिपोर्ट के आधार पर इनके विरुद्ध धारा 107, 111 का नोटिस 17 जून 2023 को जारी किया गया था। उक्त नोटिस के अनुपालन में विपक्षी सोनू, सुमित और जगरोशन द्वारा 1 अगस्त, ,2023 को न्यायालय में पहुंचकर जमानत करा ली थी। विपक्षी संजीव पुत्र जगरोशन द्वारा भी 12 दिसंबर को जमानत करा ली थी।
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एसडीएम की जांच में सामने आया है कि 28 अक्तूबर को न्यायालय से कोई भी जमानतीय या फिर गैर जमानतीय वारंट प्रभावी नहीं था। यहीं नहीं पुलिस चौकी की 29 अक्तूबर की चालानी रिपोर्ट में सोनू को धारा 151 में निरुद्ध किए जाने का कारण आने जाने वाले व्यक्तियों के साथ झगड़ा करना दर्शाया था।

सीओ सिटी ने बताया कि जांच में पांचों पुलिसकर्मी दरोगा महेंद्र सिंह, मुख्य आरक्षी जगमोहन, बृजेश कुमार, आरक्षी अरुण कुमार, आरक्षी राम लखन आदि की गलती पाई गई। सभी ने मिलीभगत कर सोनू को परेशान किया। वारंट भी फर्जी तरीके से ही जारी किया गया था। सीओ का कहना है कि जांच रिपोर्ट एसपी को भेज दी है।

सोनू प्रकरण में पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अभी रिपोर्ट का अध्ययन नहीं कर पाया हूं। पुलिसकर्मियों से अपील है कि किसी भी निर्दाेष को नहीं सताए वरना कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। लोगों से मृदु व्यवहार के साथ पेश आए, ताकि पुलिस पर लोगों का विश्वास बढ़े।



रामसेवक गौतम, एसपी शामली
आरोप बेबुनियाद

दरोगा महेंद्र का कहना है कि उन पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद है। किसने फर्जी वारंट जारी किया, मुझे जानकारी नहीं है।



डेढ़ लाख ले लो, मामला निपटा दो



सोनू का कहना है कि अब पुलिसकर्मी उस पर फैसले का दबाव बना रहे हैं। कहा जा रहा है कि डेढ़ लाख रुपये ले लो ओर फैसला कर लो। मगर मैंने फैसला करने से साफ इनकार कर दिया है। हर हाल में आरोपी पुलिसकर्मियों को सजा दिलाकर ही रहूंगा, इसके लिए चाहे मुझे पीएम से ही शिकायत क्यों न करनी पड़े।

अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था मामला

अमर उजाला ने सोनू के साथ हुई ज्यादती का मामला 24 जून को प्रमुखता के साथ उठाया था। अखबार में वाह री पुलिस : फर्जी तरीके से मजिस्ट्रेट बन जारी कर दिया वारंट नामक शीर्षक से प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित की थी। जिसके बाद एसपी ने पूरे मामले में जल्द रिपोर्ट देने को कहा था।




सोनू के पास पुलिसकर्मियों की वीडियो भी मौजूद
सोनू के पास दबिश देने के दौरान उसे पकड़ने का वीडियो भी मौजूद है। जो पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराने का आधार बना। इसके अलावा पूर्व में हुए चालान के कागज भी सोनू ने विवेचनाधिकारी को सौंपे थे।
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