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Shamli News: जिला अस्पताल में कैंसर के मरीजों की जांच न उपचार की सुविधा

Sun, 04 Feb 2024 01:28 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Sun, 04 Feb 2024 01:28 AM IST
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Facility for examination and treatment of cancer patients in the district hospital
शामली। जिले में कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। समय से उपचार नहीं मिलने के कारण कई लोगों की इस बीमारी से मौत भी हो चुकी है। कृष्णा नदी के किनारे के कई गांवों में कैंसर पीड़ितों की संख्या ज्यादा है। जिला अस्पताल में कैंसर के मरीजों के इलाज की तो दूर की बात यहां पर जांच की सुविधा भी नहीं है, जिस कारण मरीजों को दूसरे शहरों में प्राइवेट में महंगा इलाज कराने को मजबूर होना पड़ता है। चिकित्सकों का कहना है कि कैंसर अब लाइलाज बीमारी नहीं है, अगर शुरूआत में ही इस बीमारी का पता चल जाता है तो इलाज से मरीज स्वस्थ हो जाता है।
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जिला अस्पताल में कैंसर के इलाज के लिए कोई विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है और न ही जांच की सुविधा है। जिले में कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। खासतौर से कृष्णा नदी किनारे के गांवों में कैंसर से पीड़ितों की संख्या ज्यादा है। कैंसर से पीड़ित कई लोगाें की मौत तक हो चुकी है। गांव बहावड़ी निवासी बंटी चौधरी ने बताया कि उनके गांव में कई लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है। दस से ज्यादा लोग अभी भी कैंसर से पीड़ित है, जिनका इलाज प्राइवेट अस्पतालों में दिल्ली, मेरठ आदि शहरों में चल रहा है। उनका कहना है कि गांव के निकट से जा रही कृष्णा नदी के प्रदूषित पानी की वजह से लोगों को कैंसर की बीमारी होना माना जाता है। धर्मेंद्र व सावित्री ने बताया कि जिले में कैंसर की जांच व इलाज की कोई सुविधा न होने के कारण मरीजों को प्राइवेट में महंगा इलाज कराना पड़ रहा है। नदी किनारे के कई अन्य गांवों में भी कैंसर के मरीज दूसरे शहरों में प्राइवेट में उपचार करा रहे हैं। गांव खोड़समा के सुशील कुमार ने बताया उनकी पत्नी रणवीरी को कैंसर है। उनका इलाज बीकानेर के अस्पताल में चल रहा है। दो साल पहले उनकी मां राजकली की भी कैंसर के कारण मौत हो गई थी। पहले भी गांव में कई लोगों की मौत हो चुकी है जबकि कई का इलाज दूसरे शहरों में चल रहा है। जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अंजू जोधा का कहना है कि अस्पताल में कैंसर रोग के उपचार के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति नहीं है।
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कैंसर लाइलाज नहीं, समय पर कराएं उपचार
फिजिशिन डॉ. पंकज गर्ग का कहना है कि कैंसर किसी भी आयु वर्ग में और किसी भी अंग में हो सकता है। यह दूषित पानी, दूषित वातावरण, धुम्रपान करने से फेफड़े का, तंबाकू, गुटखा, मसाला खाने मुंह का और दूषित पानी से पेट में कैंसर हो सकता है। उनका कहना है कि कैंसर अब लाइलाज बीमारी नहीं है। इसका इलाज है, अगर कैंसर का जल्दी शुरूआत में ही पता चल जाता है तो इलाज के बाद मरीज स्वस्थ हो जाता है। अगर किसी के परिवार में पहले से कैंसर का मरीज रहा है तो अन्य सदस्यों को सावधानी बरतनी चाहिए और समय-समय पर जांच कराते रहना चाहिए। अगर किसी के शरीर में कोई गांठ है या ब्लीडिंग होती है खासतौर से महिलाओं को, आवाज बदल रही है, वजन घट रहा है, किसी स्थान पर लगातार दर्द होता है, भूख लगनी बंद हो जाती है या लंबे समय तक बुखार रहता है तो उसे चिकित्सक की सलाह से जांच करानी चाहिए।
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जिले में कैंसर रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। इसलिए जांच व उपचार की कोई सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है। इस वजह से जिले में कैंसर के कितने रोगी है, इस तरह का डाटा स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है।
- डॉ. अनिल कुमार, प्रभारी सीएमओ
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