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दोगुनी रफ्तार से नौनिहाल बन रहे नेत्र रोगी
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दोगुनी रफ्तार से नौनिहाल बन रहे नेत्र रोगी
कैराना। दो वर्ष में कोरोना की तीन लहर आने के कारण जहां स्कूल कॉलेज बंद हो रहे हैं। बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के कारण उनकी आंखों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। दोगुनी रफ्तार से बच्चे नेत्र रोगी बन रहे हैं। बच्चों को आंखों की समस्याओं के कारण नेत्र रोग विशेषज्ञों के पास जाना पड़ रहा है।
मार्च 2020 में कोरोना की पहली लहर आने के बाद लॉकडाउन के बीच कई माह तक स्कूल कॉलेज बंद रहे थे। इसके बाद 2021 और अब फिर से कोरोना संक्रमण बेकाबू होता जा रहा है। जिस कारण स्कूल फिर से बंद कर दिए गए हैं। 2020 में ही कोरोना की पहली लहर के दौरान स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कर दी गई थी। बच्चे घर पर ही रहकर कंप्यूटर या मोबाइल पर ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। जिससे उनकी आंखों पर बुरा असर पड़ रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि अपने बच्चों की नेत्र ज्योति बचाने के लिए अभिभावकों का ध्यान रखना चाहिए।
संजीवनी हॉस्पिटल एवं आई केयर सेंटर के डॉ. सपन गर्ग ने बताया कि कोरोना संक्रमण शुरू होने से पहले एक माह में 50 से 60 बच्चे हॉस्पिटल में आते थे, लेकिन कोरोना काल के बाद से प्रतिदिन पढ़ाई करने वाले करीब 150 बच्चे प्रतिमाह हॉस्पिटल में आते हैं। मोबाइल व कंप्यूटर पर ऑनलाइन पढ़ाई के कारण बच्चों की आंखों से पानी आना, आंखों का सूखापन व सिरदर्द की अधिक समस्याएं सामने आ रही हैं।
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ऐसे करें बच्चों की आंखों की देखभाल
बच्चों को कंप्यूटर व मोबाइल पर पढ़ाई करते समय एंटी ग्लेयर चश्मे का इस्तेमाल करना चाहिए।
कंप्यूटर व मोबाइल की ब्राइटनेस (चमक) बहुत ही कम रखें।
लंबे समय तक लगातार कंप्यूटर मोबाइल का प्रयोग नहीं करें।
हरे पत्तों की सब्जी व आंवला का अधिक प्रयोग करें।
बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई के साथ ही खेल-कूद में भी समय लगाएं।
आंखों की समस्या होने पर तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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कैराना। दो वर्ष में कोरोना की तीन लहर आने के कारण जहां स्कूल कॉलेज बंद हो रहे हैं। बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के कारण उनकी आंखों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। दोगुनी रफ्तार से बच्चे नेत्र रोगी बन रहे हैं। बच्चों को आंखों की समस्याओं के कारण नेत्र रोग विशेषज्ञों के पास जाना पड़ रहा है।
मार्च 2020 में कोरोना की पहली लहर आने के बाद लॉकडाउन के बीच कई माह तक स्कूल कॉलेज बंद रहे थे। इसके बाद 2021 और अब फिर से कोरोना संक्रमण बेकाबू होता जा रहा है। जिस कारण स्कूल फिर से बंद कर दिए गए हैं। 2020 में ही कोरोना की पहली लहर के दौरान स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कर दी गई थी। बच्चे घर पर ही रहकर कंप्यूटर या मोबाइल पर ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। जिससे उनकी आंखों पर बुरा असर पड़ रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि अपने बच्चों की नेत्र ज्योति बचाने के लिए अभिभावकों का ध्यान रखना चाहिए।
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संजीवनी हॉस्पिटल एवं आई केयर सेंटर के डॉ. सपन गर्ग ने बताया कि कोरोना संक्रमण शुरू होने से पहले एक माह में 50 से 60 बच्चे हॉस्पिटल में आते थे, लेकिन कोरोना काल के बाद से प्रतिदिन पढ़ाई करने वाले करीब 150 बच्चे प्रतिमाह हॉस्पिटल में आते हैं। मोबाइल व कंप्यूटर पर ऑनलाइन पढ़ाई के कारण बच्चों की आंखों से पानी आना, आंखों का सूखापन व सिरदर्द की अधिक समस्याएं सामने आ रही हैं।
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ऐसे करें बच्चों की आंखों की देखभाल
बच्चों को कंप्यूटर व मोबाइल पर पढ़ाई करते समय एंटी ग्लेयर चश्मे का इस्तेमाल करना चाहिए।
कंप्यूटर व मोबाइल की ब्राइटनेस (चमक) बहुत ही कम रखें।
लंबे समय तक लगातार कंप्यूटर मोबाइल का प्रयोग नहीं करें।
हरे पत्तों की सब्जी व आंवला का अधिक प्रयोग करें।
बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई के साथ ही खेल-कूद में भी समय लगाएं।
आंखों की समस्या होने पर तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।