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सैनिकों के परिवारों को आगे बढ़ाने के लिए कार्य करें- कर्नल नरेंद्र सिंह
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शामली में आयोजित शहीद सैनिक सम्मान समारोह में मंचासीन अतिथि।
- फोटो : SHAMLI
शामली। कर्नल नरेंद्र सिंह ने कहा कि देश और मातृभूमि की रक्षा के लिए जान की बाजी लगाने वाले जांबाज सैनिकों के परिवारों केे आगे बढ़ाने के लिए सभी को हर स्तर पर सहयोग करना चाहिए। यहीं शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
रविवार को कैराना रोड स्थित बैंक्वेट हॉल में पूर्व सैनिक संगठन की ओर से विजय दिवस के उपलक्ष्य में शहीद सैनिक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। शुभारंभ राष्ट्रगान से हुआ। कार्यक्रम में 1962 में भारत-चीन युद्ध, 1965 व 1971 में भारत-पाक युद्ध के अलावा देश की सीमा की रक्षा करते हुए प्राण न्योछावार करने वाले करीब 30 से अधिक शहीद सैनिकों के परिवारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम अध्यक्ष कर्नल नरेंद्र सिंह ने कहा कि शहीद और रिटायर्ड होने वाले सैनिकों के परिवारों को आगे बढ़ाने के लिए हम सभी को सोचना चाहिए। उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करना चाहिए। संगठन की तरफ से कोशिश रहेगी कि इसी साल शामली में सोल्जर बोर्ड की स्थापना, सैनिकों के लिए कैंटीन, एंबुलेंस और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
एमडब्ल्यूओ यशपाल सिंह ने कहा कि 1971 के युद्ध में भारत की तीनों सेनाओं ने परस्पर समन्वय से पाकिस्तान के छक्के छुड़ाए थे, जबकि पाकिस्तान के सैनिकों की संख्या भारत से कई गुना अधिक थी। भारत के जांबाज सैनिकों ने मनोवैज्ञानिक तरीके से युद्ध लड़ा और उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर दिया। कैप्टन लोकेंद्र सिंह ने कहा कि सैनिकों की वजह से हमारे देश की सीमाएं सुरक्षित हैं। उनकी वजह से ही हम सुख चैन से रहते हैं। कोई भी युद्ध हो वह हथियारों से नहीं बल्कि सैनिकों के मनोबल और जुनून से जीता जाता है। ऐसे वीर सैनिकों को वे नमन करते हैं। यशपाल पंवार ने कहा कि शहीद होने वाले सैनिकों की कोई जाति धर्म नहीं होता। उनका नाम शौर्य और वीर गाथाओं से जाना जाता है। शहीदों को सम्मान देते हुए उनके परिवारों को आगे बढ़ाने का भाव सबके मन में होनेे चाहिए।
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जिला पंचायत अध्यक्ष के पति प्रसन्न चौधरी ने कहा कि जिस क्षेत्र में परिवार में शहीद का सम्मान होता है, वहीं तरक्की होती है। देश के सैनिक अपनी जान पर खेलकर सीमा पर तैनात रहते हैं। सैनिकों की वजह से ही देश का सम्मान है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सैनिकों के सम्मान में वन पेंशन वन रैंक लागू की। पाकिस्तान को उसी की भाषा में मुंहतोड़ जवाब दिया है। देश की रक्षा करने वाले जांबाज सैनिकों का सम्मान बार-बार होना चाहिए। कार्यक्रम में संगठन के अध्यक्ष संजीव कुमार, डा. राजपाल तोमर, सूबेदार मेजर विजयपाल सिंह, रविंद्र मलिक, सतेंद्र मलिक, तेजपाल मलिक, सूबेदार कालम सिंह, मेजर पद्मसिंह व सूबेदार डीपी सिंह आदि ने विचार व्यक्त किए। संचालन पूर्व सैनिक हवलदार तेजपाल वशिष्ठ ने किया। अंत में दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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अधिकारियों के पहुंचने पर जताया रोष
पूर्व सैनिक संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि शहीदों के सम्मान में होने वाले कार्यक्रम में जनपद के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन किसी भी अधिकारी का न पहुंचना पूर्व सैनिकों को अखरता रहा और उन्होंने इस पर रोष व्यक्त किया।
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रविवार को कैराना रोड स्थित बैंक्वेट हॉल में पूर्व सैनिक संगठन की ओर से विजय दिवस के उपलक्ष्य में शहीद सैनिक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। शुभारंभ राष्ट्रगान से हुआ। कार्यक्रम में 1962 में भारत-चीन युद्ध, 1965 व 1971 में भारत-पाक युद्ध के अलावा देश की सीमा की रक्षा करते हुए प्राण न्योछावार करने वाले करीब 30 से अधिक शहीद सैनिकों के परिवारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम अध्यक्ष कर्नल नरेंद्र सिंह ने कहा कि शहीद और रिटायर्ड होने वाले सैनिकों के परिवारों को आगे बढ़ाने के लिए हम सभी को सोचना चाहिए। उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करना चाहिए। संगठन की तरफ से कोशिश रहेगी कि इसी साल शामली में सोल्जर बोर्ड की स्थापना, सैनिकों के लिए कैंटीन, एंबुलेंस और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
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एमडब्ल्यूओ यशपाल सिंह ने कहा कि 1971 के युद्ध में भारत की तीनों सेनाओं ने परस्पर समन्वय से पाकिस्तान के छक्के छुड़ाए थे, जबकि पाकिस्तान के सैनिकों की संख्या भारत से कई गुना अधिक थी। भारत के जांबाज सैनिकों ने मनोवैज्ञानिक तरीके से युद्ध लड़ा और उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर दिया। कैप्टन लोकेंद्र सिंह ने कहा कि सैनिकों की वजह से हमारे देश की सीमाएं सुरक्षित हैं। उनकी वजह से ही हम सुख चैन से रहते हैं। कोई भी युद्ध हो वह हथियारों से नहीं बल्कि सैनिकों के मनोबल और जुनून से जीता जाता है। ऐसे वीर सैनिकों को वे नमन करते हैं। यशपाल पंवार ने कहा कि शहीद होने वाले सैनिकों की कोई जाति धर्म नहीं होता। उनका नाम शौर्य और वीर गाथाओं से जाना जाता है। शहीदों को सम्मान देते हुए उनके परिवारों को आगे बढ़ाने का भाव सबके मन में होनेे चाहिए।
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जिला पंचायत अध्यक्ष के पति प्रसन्न चौधरी ने कहा कि जिस क्षेत्र में परिवार में शहीद का सम्मान होता है, वहीं तरक्की होती है। देश के सैनिक अपनी जान पर खेलकर सीमा पर तैनात रहते हैं। सैनिकों की वजह से ही देश का सम्मान है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सैनिकों के सम्मान में वन पेंशन वन रैंक लागू की। पाकिस्तान को उसी की भाषा में मुंहतोड़ जवाब दिया है। देश की रक्षा करने वाले जांबाज सैनिकों का सम्मान बार-बार होना चाहिए। कार्यक्रम में संगठन के अध्यक्ष संजीव कुमार, डा. राजपाल तोमर, सूबेदार मेजर विजयपाल सिंह, रविंद्र मलिक, सतेंद्र मलिक, तेजपाल मलिक, सूबेदार कालम सिंह, मेजर पद्मसिंह व सूबेदार डीपी सिंह आदि ने विचार व्यक्त किए। संचालन पूर्व सैनिक हवलदार तेजपाल वशिष्ठ ने किया। अंत में दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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अधिकारियों के पहुंचने पर जताया रोष
पूर्व सैनिक संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि शहीदों के सम्मान में होने वाले कार्यक्रम में जनपद के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन किसी भी अधिकारी का न पहुंचना पूर्व सैनिकों को अखरता रहा और उन्होंने इस पर रोष व्यक्त किया।

शामली में आयोजित शहीद सैनिक सम्मान समारोह में भाग लेते पूर्व सैनिक।- फोटो : SHAMLI

शामली में आयोजित शहीद सैनिक सम्मान समारोह में मुख्यअतिथि का स्वागत करते संगठन के सदस्य।- फोटो : SHAMLI

शामली में आयोजित समारोह में सम्मानित शहीद सैनिकों के परिजन।- फोटो : SHAMLI

शामली में आयोजित समारोह में सम्मानित शहीद सैनिकों के परिजन।- फोटो : SHAMLI