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आजादी के लिए सब कुछ लगा दिया था दांव पर

Tue, 11 Aug 2020 12:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 11 Aug 2020 12:09 AM IST
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Everything was at stake for freedom
थानाभवन चौक बाजार में झंडा फहराते स्वतंत्रता सेनानी ओम प्रकाश वर्मा। फाइल फोटो - फोटो : SHAMLI
थानाभवन। कम आयु में ही स्वतंत्रता आंदोलन में कूदने वाले कस्बे के ओमप्रकाश वर्मा ने आजादी की लड़ाई में अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था। कम आयु में ही उन्हें बरेली जेल भेज दिया गया तथा घर के सामान की नीलामी करा दी गई। 1947 में देश आजाद होने से पहले वह जेल से रिहा होकर आए तो उन्होंने चौक बाजार पर सबसे पहले तिरंगा लहराया। तब से हर साल स्वतंत्रता दिवस पर यहां झंडारोहण किया जाता है।
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कस्बे के बीचोबीच स्थित चौक बाजार स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ओमप्रकाश वर्मा की देशभक्ति का गवाह है। वे वर्ष 1942 में महज 16 साल की आयु में देश की आजादी के आंदोलन में कूद गए थे। उस समय महात्मा गांधी ने देश में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन की शुरूआत की थी। इसमें ओमप्रकाश वर्मा ने अहम भूमिका निभाई। इसी के चलते अंग्रेजों ने वर्ष 1943 में उनको गिरफ्तार कर सेंट्रल जेल बरेली में बंद कर दिया था। साथ ही उनके घर के सामान की नीलामी करा दी गई थी। इसके बाद जब 1947 में देश आजाद होने वाला था, तभी कुछ दिन पहले उनको जेल से रिहा कर दिया गया। यहां से कस्बा आते ही उन्होंने चौक बाजार पर तिरंगा लहराया और उनके साथ पूरे कस्बे ने देश की आजादी का जश्न मनाया। उस समय डॉक्टर शफी ने अंग्रेजों से नीलामी में ओमप्रकाश का खरीदा हुआ सामान भी ससम्मान वापस कर दिया था। तभी से प्रत्येक स्वतंत्रता एवं गणतंत्र दिवस पर इस चौक पर तिरंगा फहराया जाता है। जिसे कस्बेवासी देश की आजादी का प्रतीक भी मानते हैं।
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जीते थे सादा जीवन
ओमप्रकाश वर्मा के पौत्र अंकुर वर्मा ने बताया कि उनके दादा राज्य व केंद्र दोनों सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्रता सेनानी थे। घर से संपन्न होने के बावजूद ओमप्रकाश ने हमेशा सादा जीवन जिया। वह सिर्फ कुर्ता व धोती पहनते थे, उन्होंने अपना पूरा जीवन बिना चप्पल पहने बिताया। बताया कि वर्ष 1992 उनके दादा का कैंसर से जूझते हुए दिल्ली के एक अस्पताल में उपचार के दौरान देहांत हो गया था।
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