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चीन को दिए आर्डर निरस्त करने का आधार तलाश रहे उधमी

Fri, 19 Jun 2020 11:30 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jun 2020 11:30 PM IST
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Entrepreneurs set to cancel orders given to China
लकडी की चम्मच काटने वाला कटर - फोटो : SHAMLI
चीन को दिए ऑर्डर निरस्त करने की तैयारी में उद्यमी
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शामली। सीमा पर चल रही तनातनी के चलते जिले के उद्यमी भी चीन से व्यापारिक रिश्ते तोड़ने का मन बना लिया है। उनका कहना है कि चीन ने भारतीय बाजार पर कब्जा किया हुआ है। इसके लिए उन्होंने चीन को दिए ऑर्डर निरस्त करने का आधार तलाशना शुरू कर दिया है। यही नहीं चीन में बने सामानों का विकल्प भी उद्यमी तलाशने लगे हैं। शामली के दो उद्यमियों ने इस संबंध में प्रयास भी किए हैं। पेश है रिपोर्ट -
- मशीनरी का ऑर्डर निरस्त करने का तलाश रहे आधार
निकिता पेपर मिल के एमडी अशोक बंसल ने बताया कि अक्तूबर 2019 में चीन की एक कंपनी को रिवाइंडर मशीनों के आर्डर दिए थे। ये मशीनें पेपर लपेटने के काम आती हैं। मशीनों की कीमत करीब ढाई करोड़ है। इसका 35 प्रतिशत भुगतान भी जा चुका है। कंपनी ने छह महीने में मशीन तैयार करने का वादा किया था। मशीनें अप्रैल माह के अंत या मई के पहले सप्ताह तक मिलनी थीं, लेकिन अब तक सप्लाई नहीं मिली है। संभवत: चीन में लॉकडाउन लगने की वजह से डिलीवरी में देरी हुई है। अशोक बंसल के अनुसार चीनी कंपनी के इंजीनियरों को खुद यहां आकर मशीनरी का सेटअप कराना था। वर्तमान हालातों के चलते ये संभव भी नहीं लग रहा, इसलिए अब मशीनरी का ऑर्डर निरस्त करना चाहते हैं। इसके लिए उनके पास आधार भी है। वह इस प्रयास में हैं कि किसी तरह चीनी मशीनरी का ऑर्डर निरस्त हो जाए और एडवांस गई रकम वापस मिल जाए।
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- अनुज ने तलाशा चीनी कटर का विकल्प
अगरबत्ती और लकड़ी की स्टिक तैयार करने वाले अमर स्प्रिंट के एमडी अनुज गर्ग के अनुसार अगरबत्ती की स्टिक काटने के नौ कटर के आर्डर चीन की कंपनी को दिए थे। अभी तक सप्लाई नहीं मिली। सीमा पर चलते विवाद को देखते हुए चीन जैसे कटर भारत में ही तलाशे। हैदराबाद और दिल्ली में ऐसे कटर तैयार हो सकते हैं। दिल्ली से कटर का सैंपल भी मंगाया है। उसे मशीन में लगाकर देखेंगे यदि कामयाब रहे तो, अपने देश में बना कटर ही प्रयोग करेंगे। दिल्ली से कटर करीब 9500 रुपये का एक पडे़गा, जबकि चीन से करीब 12 हजार में एक आता। इससे पूर्व में अनुज आइसक्रीम स्टिक में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी का आर्डर यूक्रेन की कंपनी को दे चुके हैं, जबकि यह लकड़ी भी चीन से ही मंगाई जाती थी।
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कोट
ये बात साफ है कि चीन ने हमारे देश के मार्केट पर कब्जा किया हुआ है, लेकिन वर्तमान हालात के चलते उद्यमी चीन से व्यापारिक रिश्ते खत्म करने के मूड में है। इसके लिए विकल्प भी तलाशने शुरू कर दिए हैं। चीन से आने वाली चीजों के विकल्प तलाश रहे हैं। - अशोक मित्तल, अध्यक्ष इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन

कोट -
शामली इंडस्ट्रियल एरिया में कई फैक्ट्रियों में चीन की मशीनें लगी हैं। अच्छी क्वालिटी के कारण वहां से मशीनें उद्यमी मंगाते थे, लेकिन अब नजरिया बदलने लगा है। स्वदेशी की तरफ रुझान बढ़ रहा है। भारतीय मार्केट से चीन का आधिपत्य हटाने के लिए उद्यमी एकजुट हो रहे हैं जो अच्छे संकेत हैं। - अंकित गोयल, अध्यक्ष शामली मेन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन
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