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दोहरीकरण को नहीं मिली रेलवे से मंजूरी
ब्यूरो, अमर उजाला/शामली
Updated Tue, 05 Dec 2017 11:56 PM IST
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railway
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा के शिलान्यास के एक साल बाद भी दिल्ली- शामली, सहारनपुर रेलवे मार्ग के दोहरीकरण को रेलवे बोर्ड से मंजूरी नहीं मिली पाई है जबकि विद्युतीकरण का काम अंडरपास निर्माण और विद्युतीकरण के गड्ढे खुदाई तक काम सिमट कर रह गया है। यह स्थिति तब है जब इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए मार्च 2018 नियत है।
भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा से मिलकर दिल्ली- शामली, सहारनपुर रेलवे लाइन का दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण और मेरठ- पानीपत नई रेलवे लाइन की स्थापना की मांग की थी। 7 अगस्त 2015 में सीएनजी ट्रेन के शुभारंभ के मौके पर रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा से सांसद ने एक बार फिर सभी मांगों को दोहराया था।
भाजपा सांसद के अनुरोध पर वर्ष 2016 में अप्रैल में आए रेल बजट में दिल्ली-शामली, सहारनपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण, विद्युतीकरण के लिए 1500 करोड़ रुपये और मेरठ- पानीपत नई रेलवे लाइन के लिए 2200 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था। 17 दिसंबर 2016 को सहारनपुुर जिले के नानौता रेलवे स्टेशन पर क्षेत्रीय सांसद हुकुम सिंह के अनुरोध पर दिल्ली- शामली, सहारनपुर रेलवे मार्ग के दोहरीकरण-विद्युतीकरण का शिलान्यास रेल राज्यमंत्री मनोज सिहा ने किया था। शिलान्यास के एक साल बाद भी दोहरीकरण को रेलवे बोर्ड से मंजूरी नहीं मिली है।
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विद्युतीकरण की जरूर रेलवे मंत्रालय एवं बोर्ड से मंजूरी मिली हैं। विद्युतीकरण कराने के लिए अंबाला डिविजन को कार्यदायी संस्था बनाया गया हैं। रोहतक की आशीर्वाद नाम की प्राइवेट कंपनी को टेंडर किया गया है। कंपनी सिर्फ एक साल के दौरान विद्युतीकरण के नाम पर सिर्फ विद्युत लाइन सुरक्षित रखने के लिए शामली जिले में हाइटगेज पोल लगाने के लिए छह-सात गड्ढ़े खोद पाई हैं।
रेलवे के रोहतक निवासी ठेकेदार दलवीर सिह ने बताया कि सहारनपुर जिले में रेत-रोड़ी, बजरी की अनुमति न मिल पाने से हाइट गेज सिर्फ गड्ढे खुदने तक सिमट गया है। शामली जिले में सिर्फ छह सात गड्ढ़े खोदे गए है। गड्ढों की फाउंडेंशन के बाद साढ़े 15 मीटर तक स्टील के हाइट गेज पोल लगाए जाएंगे।
उधर, उत्तर रेलवे के सहायक मंडल अभियंता एसके सपरा ने बताया कि दिल्ली-शामली, सहारनपुर रेलवे मार्ग के दोहरीकरण को रेलवे बोर्ड से मंजूूरी नही मिल पाई हैं। मंजूरी मिल पाने के बाद रेलवे लाइन के दोहरीकरण के लिए रेलवे बोर्ड द्वारा टेंडर छोड़े जाएंगे। इस प्रक्रिया में सालों लग जाएंगे। नई रेल लाइन बिछाने में कम से कम दस साल लग जाते हैं।
दूसरी तरफ, सांसद हुकुम सिंह का कहना है कि वे दिल्ली जाकर पूरे मामले की जानकारी करेंगे। इसके बाद रेलमंत्री से मिलकर इस प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा कराने की मांग करेंगे।
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भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा से मिलकर दिल्ली- शामली, सहारनपुर रेलवे लाइन का दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण और मेरठ- पानीपत नई रेलवे लाइन की स्थापना की मांग की थी। 7 अगस्त 2015 में सीएनजी ट्रेन के शुभारंभ के मौके पर रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा से सांसद ने एक बार फिर सभी मांगों को दोहराया था।
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भाजपा सांसद के अनुरोध पर वर्ष 2016 में अप्रैल में आए रेल बजट में दिल्ली-शामली, सहारनपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण, विद्युतीकरण के लिए 1500 करोड़ रुपये और मेरठ- पानीपत नई रेलवे लाइन के लिए 2200 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था। 17 दिसंबर 2016 को सहारनपुुर जिले के नानौता रेलवे स्टेशन पर क्षेत्रीय सांसद हुकुम सिंह के अनुरोध पर दिल्ली- शामली, सहारनपुर रेलवे मार्ग के दोहरीकरण-विद्युतीकरण का शिलान्यास रेल राज्यमंत्री मनोज सिहा ने किया था। शिलान्यास के एक साल बाद भी दोहरीकरण को रेलवे बोर्ड से मंजूरी नहीं मिली है।
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विद्युतीकरण की जरूर रेलवे मंत्रालय एवं बोर्ड से मंजूरी मिली हैं। विद्युतीकरण कराने के लिए अंबाला डिविजन को कार्यदायी संस्था बनाया गया हैं। रोहतक की आशीर्वाद नाम की प्राइवेट कंपनी को टेंडर किया गया है। कंपनी सिर्फ एक साल के दौरान विद्युतीकरण के नाम पर सिर्फ विद्युत लाइन सुरक्षित रखने के लिए शामली जिले में हाइटगेज पोल लगाने के लिए छह-सात गड्ढ़े खोद पाई हैं।
रेलवे के रोहतक निवासी ठेकेदार दलवीर सिह ने बताया कि सहारनपुर जिले में रेत-रोड़ी, बजरी की अनुमति न मिल पाने से हाइट गेज सिर्फ गड्ढे खुदने तक सिमट गया है। शामली जिले में सिर्फ छह सात गड्ढ़े खोदे गए है। गड्ढों की फाउंडेंशन के बाद साढ़े 15 मीटर तक स्टील के हाइट गेज पोल लगाए जाएंगे।
उधर, उत्तर रेलवे के सहायक मंडल अभियंता एसके सपरा ने बताया कि दिल्ली-शामली, सहारनपुर रेलवे मार्ग के दोहरीकरण को रेलवे बोर्ड से मंजूूरी नही मिल पाई हैं। मंजूरी मिल पाने के बाद रेलवे लाइन के दोहरीकरण के लिए रेलवे बोर्ड द्वारा टेंडर छोड़े जाएंगे। इस प्रक्रिया में सालों लग जाएंगे। नई रेल लाइन बिछाने में कम से कम दस साल लग जाते हैं।
दूसरी तरफ, सांसद हुकुम सिंह का कहना है कि वे दिल्ली जाकर पूरे मामले की जानकारी करेंगे। इसके बाद रेलमंत्री से मिलकर इस प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा कराने की मांग करेंगे।