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किसानों पर दोहरी मार, बासमती धान का मिल रहा कम दाम

Mon, 28 Sep 2020 12:00 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2020 12:00 AM IST
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Double whammy on farmers
चोसाना में धान की कटाई करती मशीन - फोटो : SHAMLI
शामली। पिछले साल की अपेक्षा इस साल हरियाणा की मंडियों में किसानों को बासमती धान के बहुत कम दाम मिल रहा है। हरियाणा की मंडियों में वेस्ट यूूपी के किसानों का बासमती धान 1900-2000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। पिछले साल हरियाणा की मंडियों में यह धान 2500 से 2800 रुपये प्रति क्विंटल तक खरीदा गया था।
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जिले में ज्यादातर बासमती धान की पैदावार होती है। इस साल यमुना खादर क्षेत्र में बासमती धान की कटाई तेजी से चल रही है। फिलहाल 30 से 40 प्रतिशत धान की कटाई हो चुकी है। वेस्ट यूपी के शामली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बागपत आदि जिले के किसान अपना बासमती धान बेचने के लिए हरियाणा के सोनीपत, पानीपत, करनाल, यमुनानगर आदि जिलों की मंडियों में लेकर जाते हैं। करनाल और पानीपत जिले की मंडियों में मोटा धान पिछले कई दिन से गया हुआ, लेकिन मंडी आढ़ती धान नहीं खरीद रहे। हरियाणा के करनाल जिले की मंडी के आढ़ती बलजीत सिंह ने फोन पर बताया कि बासमती की 1509 प्रजाति का धान पिछले वर्ष 2400- 2500 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदा गया था। 30-35 हजार क्विंटल धान मंडी में आया था।
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इस बार यह धान यहां 1800-1900 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है, जबकि मंडी में इस बार 20-25 हजार क्विंटल धान बिक्री के लिए आया है। मोटा धान हरियाणा के आढ़तियों द्वारा नहीं खरीदा जा रहा। दस दिन पूर्व करनाल की मंडी में 1300- 1400 रुपये प्रति क्विंटल मोटे धान की बिक्री हुई थी। हरियाणा के पानीपत जिले की मंडी के आढ़ती धर्मवीर मलिक ने बताया कि 1800-1900 रुपये प्रति क्विंटल बासमती धान बिक रहा है, जबकि पिछले साल यह धान 2700- 2800 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा गया था। मंडियों में धान आया हुआ है, खरीद कम हो रही है। मुख्य कारण हरियाणा में धान के सेलर संचालक सरकार की शर्तों को न मानकर हड़ताल पर चले गए हैं। जिससे खरीद गए धान का उठान नहीं हो पा रहा है।
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गंगोह मंडी में नहीं हुई धान की खरीद
शामली। जलालाबाद क्षेत्र के नांगल गांव के नरेंद्र सिंह, राजेश मुखिया, राकेश सैनी, कपिल ठाकुर, दर्शन रावरा आदि किसानों का कहना है कि गंगोह की मंडी में धान लेकर गए थे, लेकिन वहां पर दो दिन तक फसल पड़ी रही फिर उसको वापस लेकर आना पड़ा। धान की रोपाई, निराई, दवाई, सिंचाई आदि से लेकर कटाई तक का प्रति बीघा 6000 रुपये की लागत आ रही है। सरकारी मूल्य घोषित होने के बावजूद धान का भाव ठीक से नहीं मिल पा रहा है। मोटा धान 1200 रुपये क्विंटल बिका है, जबकि सरकारी रेट 1868 रुपये प्रति क्विंटल है। प्रति बीघा धान तीन से चार क्विंटल और मोटा धान चार से पांच क्विंटल का उत्पादन हो रहा है। किसानों के लिए इस बार धान की फसल घाटे का सौदा साबित हो रही है।
इस साल धान का सरकारी मूल्य
मोटा धान-- 1868 प्रति क्विंटल
ग्रेड ए--- 1888 प्रति क्विंटल
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