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साठी धान से धरतीपुत्रों का मोह भंग
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Wed, 07 Sep 2016 12:28 AM IST
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farmer news
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। पिछले दो साल से अच्छे भाव नहीं मिल पाने और कटाई के समय बारिश हो जाने से कम उत्पादन के चलते किसानों का साठी धान से मोह भंग हो रहा है।
साठ दिन में धान की फसल पककर तैयार होने वाली साठी धान की मई से लेकर नवंबर तक दो बार फसल लेकर किसान अच्छा खासा मुनाफा कमा लेते थे। हरियाणा में जलस्तर गिरने के कारण साठी धान पर पिछले आधा दशक से प्रतिबंध लगा है। जिले में गिरते हुए भूजल स्तर को देखते हुए दो साल पूर्व साठी धान की बुआई के लिए प्रतिबंध लगाने के लिए तत्कालीन डीएम नगेंद्र प्रसाद सिंह ने उत्तर प्रदेश शासन को पत्र लिखा था, किंतु उत्तर प्रदेश शासन ने प्रतिबंध नहीं लगाया।
जिले के यमुना खादर में ऊन ब्लाक के बिड़ौली, नाईनंगला, सकौती, कमालपुर, खोड़समा, ऊदपुर, जिजौला, चौसाना, टोड़ा, सींगरा, याहियापुर समेत थानाभवन ब्लाक के कई गांवों में साठी धान की फसल की बुआई होती है। ऊन ब्लाक के सकौती गांव के सचिन रंधावा ने बताया कि ऊन ब्लाक में 1500 से लेकर 2000 बीघा में साठी धान की बुआई होती थी।
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किसानों को तीन साल पूर्व साठी धान की 1509 प्रजाति की बुआई से किसानों को 3500 रुपये से लेकर 4200 रुपये प्रति कुंतल का अच्छा भाव मिला था, किंतु पिछले दो सालों से साठी धान की प्रजाति 1500 रुपये से लेकर 1700 रुपये मिल पा रहा है।
अच्छा भाव नहीं मिलने से किसानों का इस साठी धान की फसल से मोह भंग हो रहा है। नाईनंगला निवासी महीपाल सिंह पहले 15 बीघा साठी धान का उत्पादन करता था। इस साल वह साढे़ तीन बीघा धान तक सिमट गया है। खोड़समा गांव के जयपाल ने बताया कि पहले वह 45 बीघा धान की फसल बोते थे, अब वह कम बो रहे हैं।
अरविंद साढ़े तीन बीघा साठी धान की फसल से घटकर मात्र डेढ़ बीघा तक सिमट कर रह गया है। बताया कि पिछले दो सालो से साठी धान की पककर तैयार फसल के दौरान बारिश होने से फसल गिर जाने से उत्पादकता में कमी आई है। दूसरा कम रेट मिलने से घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
चावलों का उठान न होने से मिल रहा कम भाव
साठी धान की फसल का जिले में खरीद केंद्र न होने से हरियाणा के करनाल की मंडियों में धान की फसल बिक्री के लिए ले जाते हैं, वहां पर सेलर लगाने वाले व्यापारी- उद्यमी धान को खरीद कर ले जाते है। मगर दो सालों से किसानों का कम दाम में फसल बिक रही है। किसानों नेे बताया कि धान के सेलर स्वामियों का कहना है कि उनके चावल का उठान न होने से कम भाव मिल रहा है।
साठी धान की 1509 पूसा प्रजाति भाव
साल भाव प्रति क्विंटल
वर्ष 2014 3800-4200 रुपये
वर्ष 2015-16 1600- 1700 रुपये
साठी धान गोविंद प्रजाति प्रति एकड़
तीन- साढ़े चार क्विंटल प्रति बीघा।
1509 प्रजाति तीन से चार बीघा प्रति एकड़।
धान की दो बार फसल ले रहे हैं किसान
जिला कृषि अधिकारी आनंद त्रिपाठी का कहना है कि पूसा 1509 धान की ऐसी अगेती प्रजाति है। जिसका निर्धारित समय जुलाई का माह है, मगर जिले के किसान इस प्रजाति को मई- जून में बुआई कर रहे हैं। नवंबर तक दो फसल ले रहे हैं। साठी धान की एक फसल अच्छी व दूसरी कमजोर अवश्य होगी। अधिक बुआई होने से बाजार में साठी धान का कम रेट मिल पा रहा है।
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साठ दिन में धान की फसल पककर तैयार होने वाली साठी धान की मई से लेकर नवंबर तक दो बार फसल लेकर किसान अच्छा खासा मुनाफा कमा लेते थे। हरियाणा में जलस्तर गिरने के कारण साठी धान पर पिछले आधा दशक से प्रतिबंध लगा है। जिले में गिरते हुए भूजल स्तर को देखते हुए दो साल पूर्व साठी धान की बुआई के लिए प्रतिबंध लगाने के लिए तत्कालीन डीएम नगेंद्र प्रसाद सिंह ने उत्तर प्रदेश शासन को पत्र लिखा था, किंतु उत्तर प्रदेश शासन ने प्रतिबंध नहीं लगाया।
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जिले के यमुना खादर में ऊन ब्लाक के बिड़ौली, नाईनंगला, सकौती, कमालपुर, खोड़समा, ऊदपुर, जिजौला, चौसाना, टोड़ा, सींगरा, याहियापुर समेत थानाभवन ब्लाक के कई गांवों में साठी धान की फसल की बुआई होती है। ऊन ब्लाक के सकौती गांव के सचिन रंधावा ने बताया कि ऊन ब्लाक में 1500 से लेकर 2000 बीघा में साठी धान की बुआई होती थी।
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किसानों को तीन साल पूर्व साठी धान की 1509 प्रजाति की बुआई से किसानों को 3500 रुपये से लेकर 4200 रुपये प्रति कुंतल का अच्छा भाव मिला था, किंतु पिछले दो सालों से साठी धान की प्रजाति 1500 रुपये से लेकर 1700 रुपये मिल पा रहा है।
अच्छा भाव नहीं मिलने से किसानों का इस साठी धान की फसल से मोह भंग हो रहा है। नाईनंगला निवासी महीपाल सिंह पहले 15 बीघा साठी धान का उत्पादन करता था। इस साल वह साढे़ तीन बीघा धान तक सिमट गया है। खोड़समा गांव के जयपाल ने बताया कि पहले वह 45 बीघा धान की फसल बोते थे, अब वह कम बो रहे हैं।
अरविंद साढ़े तीन बीघा साठी धान की फसल से घटकर मात्र डेढ़ बीघा तक सिमट कर रह गया है। बताया कि पिछले दो सालो से साठी धान की पककर तैयार फसल के दौरान बारिश होने से फसल गिर जाने से उत्पादकता में कमी आई है। दूसरा कम रेट मिलने से घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
चावलों का उठान न होने से मिल रहा कम भाव
साठी धान की फसल का जिले में खरीद केंद्र न होने से हरियाणा के करनाल की मंडियों में धान की फसल बिक्री के लिए ले जाते हैं, वहां पर सेलर लगाने वाले व्यापारी- उद्यमी धान को खरीद कर ले जाते है। मगर दो सालों से किसानों का कम दाम में फसल बिक रही है। किसानों नेे बताया कि धान के सेलर स्वामियों का कहना है कि उनके चावल का उठान न होने से कम भाव मिल रहा है।
साठी धान की 1509 पूसा प्रजाति भाव
साल भाव प्रति क्विंटल
वर्ष 2014 3800-4200 रुपये
वर्ष 2015-16 1600- 1700 रुपये
साठी धान गोविंद प्रजाति प्रति एकड़
तीन- साढ़े चार क्विंटल प्रति बीघा।
1509 प्रजाति तीन से चार बीघा प्रति एकड़।
धान की दो बार फसल ले रहे हैं किसान
जिला कृषि अधिकारी आनंद त्रिपाठी का कहना है कि पूसा 1509 धान की ऐसी अगेती प्रजाति है। जिसका निर्धारित समय जुलाई का माह है, मगर जिले के किसान इस प्रजाति को मई- जून में बुआई कर रहे हैं। नवंबर तक दो फसल ले रहे हैं। साठी धान की एक फसल अच्छी व दूसरी कमजोर अवश्य होगी। अधिक बुआई होने से बाजार में साठी धान का कम रेट मिल पा रहा है।