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Shamli News: दशरथ मरण का मार्मिक प्रसंग सुनकर श्रद्धालु हुए भाव विभोर

Wed, 06 Nov 2024 12:47 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Wed, 06 Nov 2024 12:47 AM IST
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Devotees became emotional after hearing the poignant incident of Dashrath's death.
शामली। संत प्रवर विजय कौशल महाराज ने श्री रामकथा के तीसरे दिन केवट की नौका से गंगा पार करने और दशरथ मरण का मार्मिक प्रसंग सुनाया। इस दौरान श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
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कैराना रोड स्थित जेजे फार्म में चल रही श्रीराम कथा में संत प्रवर विजय कौशल महाराज ने कहा केवट की नौका से गंगा पार करके राम, लक्ष्मण और सीता तीनों आगे की यात्रा पैदल प्रारंभ करते हैं। कहा कि आगे प्रभु श्रीराम चल रहे हैं। उनके पीछे प्रभु के श्रीचरणों के चिह्नों को बचाते हुए जानकी चल रही है और दोनों के चरण चिह्न बचाते हुए लक्ष्मण चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जानकी माता भक्ति का प्रतीक है। वह भगवान के चरण चिह्नों को बचाते और दर्शन करते चलती है। लक्ष्मण जीव धर्म के आचार्य हैं, जो दोनों के बीच होकर चलते हैं।
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संत प्रवर ने कहा इसके बाद प्रभु प्रयागराज में संगम का स्नान करते है। इसके बाद अक्षय बट की पूजा कर मुनीश्वर भारद्वाज के के आश्रम में जाते हैं और उनसे आगे का मार्ग पूछते हैं। उन्होंने कहा सिद्धांत यह है की जीवन का मार्ग संत या महात्मा से ही पूछना चाहिए। वैदिक मार्ग ही सनातन मार्ग है, यहीं व्यक्ति को पार लगाता है। इसके बाद महर्षि वाल्मीकि के बताने पर भगवान चित्रकूट में प्रवेश करते हैं जहां पर उनसे मिलने के लिए देवता, ऋषि मुनि, भील,कोल, किरात आदि पहुंचते हैं। देवता और ऋषि मुनि भगवान से अपनी सुरक्षा की मांग कर करते हैं, लेकिन भील, कोल , किरात जंगल के कंदमूल फल फूल उन्हें अर्पित करते हैं। उन्होंने बताया भगवान को पदार्थ से नहीं भाव से पाया जाता है।
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संत प्रवर ने दशरथ मरण की कथा सुनाते हुए कहा राम लक्ष्मण और सीता के बिना खाली हाथ लौटे सुमंत्र को देखकर महाराज दशरथ दहाड़ करने लगते हैं। राम के वियोग में मछली की तरह तड़प रहे महाराजा दशरथ को अंत समय में श्रवण कुमार के अंधे माता-पिता दिखाई देने लगे और उन्हें उनका दिया श्राप याद आता है। उन्होंने कौशल्या को श्रवण कुमार की संपूर्ण घटना सुनाई। इसके बाद राजा दशरथ प्राण त्याग देते हैं। बुधवार को आगे की कथा में भरत चरित्र का प्रसंग प्रस्तुत किया जाएगा। आज की कथा के मुख्य यजमान अखिल बंसल तथा यजमान परमेश तायल रहे।
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