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आचार संहिता लागू होने से पहले ही रुके पालिका के विकास कार्य
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आचार संहिता लागू होने से पहले ही रुके पालिका के विकास कार्य
शामली। नगर पालिका चुनाव इस वर्ष के अंत में होने हैं, लेकिन आचार संहिता लागू होने से पहले ही नगर पालिका परिषद के विकास कार्यों पर ब्रेक लग गया है। चेयरपर्सन के इस्तीफा देने और ईओ के भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरने से वित्तीय और विकास कार्य अटक गए हैं। 400 से ज्यादा अधिकारियों व कर्मचारियों के वेतन पर भी संकट छाया है।
नगर पालिका में पिछले माह एक के बाद एक कई घटनाक्रम हुए। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे नगर पालिका ईओ सुरेंद्र सिंह के खिलाफ स्थानीय निकाय की निदेशक नेहा शर्मा ने कार्रवाई की संस्तुति की थी। इसके बाद 20 अगस्त को चेयरपर्सन ने 17 सभासदों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचकर डीएम को सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया था। उन्होंने पालिका में भ्रष्टाचार व्याप्त होने, ईओ पर मनमानी करने और उनकी शिकायत पर कार्रवाई न होने के आरोप लगाए थे। एक सितंबर को चेयरपर्सन ने कलक्ट्रेट पहुंचकर अपना इस्तीफा डीएम को सौंप दिया था। हालांकि कोई भी सभासद इस्तीफा देने उनके साथ नहीं पहुंचा। चेयरपर्सन के इस्तीफा देने से नगर पालिका के तमाम कार्य थम गए हैं। इस्तीफा शासन स्तर पर स्वीकृत होने के बाद प्रशासक नियुक्त होने पर ही कार्य हो सकेंगे।
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ईओ पर ये लगे थे आरोप
शहर के मोहल्ला लाजपत राय निवासी ओमप्रकाश शर्मा ने कुछ समय पहले डीएम जसजीत कौर, राज्यपाल और शासन को भेजे शिकायती पत्र में आरोप लगाया था कि नगर पालिका शामली में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के कार्य के लिए सात दिसंबर 2020 को विभिन्न शर्तों के साथ टेंडर निकाले थे, जिसमें अनुभव प्रमाण पत्र की शर्त को मुख्य रूप से अनिवार्य किया गया था। आरोप है कि पालिका के ईओ सुरेंद्र सिंह ने मैसर्स अजय कंस्ट्रक्शन कंपनी से मिलीभगत कर नगर पंचायत सुमेरपुर (हमीरपुर) के नाम से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और उसके फर्जी सत्यापन के आधार पर डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के ठेके को संचालित कराकर वित्तीय अनियमितता बरती। इसके अलावा मृत पशुओं के निस्तारण हेतु कोई उचित व्यवस्था नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया था। इस मामले में डीएम ने 20 जून को ईओ के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए शासन को रिपोर्ट भेजी थी।
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1.31 करोड़ की लागत के कार्यों के होने थे दोबारा टेंडर
नगर पालिका ने पिछले दिनों 53 कार्यों की टेंडर निकाले थे। जिनमें से 25 कार्यों की प्रक्रिया पूरी हो गई थी। जबकि 28 टेंडर तीन से कम निविदा आने के चलते दोबारा निकाले जाने थे। इनमें मोहल्ला बरखंडी में बीरो वाला मंदिर के पास 32 लाख की लागत से आरसीसी नाला निर्माण, माजरा रोड पर 26 लाख की लागत से नाला निर्माण कार्य शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में सड़क और नालियों का निर्माण होना था।
वर्जन
चेयरपर्सन का इस्तीफा स्वीकृति के लिए शासन को भेज दिया गया है। शासन से इस्तीफा स्वीकृत होने पर प्रशासक नियुक्त किया जाएगा। उसके बाद ही वित्तीय और विकास कार्य होंगे। सभासदों को शपथ पत्र के साथ इस्तीफा देने के लिए एक बार और नोटिस जारी किया जाएगा। - संतोष कुमार सिंह, एडीएम।
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शामली। नगर पालिका चुनाव इस वर्ष के अंत में होने हैं, लेकिन आचार संहिता लागू होने से पहले ही नगर पालिका परिषद के विकास कार्यों पर ब्रेक लग गया है। चेयरपर्सन के इस्तीफा देने और ईओ के भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरने से वित्तीय और विकास कार्य अटक गए हैं। 400 से ज्यादा अधिकारियों व कर्मचारियों के वेतन पर भी संकट छाया है।
नगर पालिका में पिछले माह एक के बाद एक कई घटनाक्रम हुए। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे नगर पालिका ईओ सुरेंद्र सिंह के खिलाफ स्थानीय निकाय की निदेशक नेहा शर्मा ने कार्रवाई की संस्तुति की थी। इसके बाद 20 अगस्त को चेयरपर्सन ने 17 सभासदों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचकर डीएम को सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया था। उन्होंने पालिका में भ्रष्टाचार व्याप्त होने, ईओ पर मनमानी करने और उनकी शिकायत पर कार्रवाई न होने के आरोप लगाए थे। एक सितंबर को चेयरपर्सन ने कलक्ट्रेट पहुंचकर अपना इस्तीफा डीएम को सौंप दिया था। हालांकि कोई भी सभासद इस्तीफा देने उनके साथ नहीं पहुंचा। चेयरपर्सन के इस्तीफा देने से नगर पालिका के तमाम कार्य थम गए हैं। इस्तीफा शासन स्तर पर स्वीकृत होने के बाद प्रशासक नियुक्त होने पर ही कार्य हो सकेंगे।
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ईओ पर ये लगे थे आरोप
शहर के मोहल्ला लाजपत राय निवासी ओमप्रकाश शर्मा ने कुछ समय पहले डीएम जसजीत कौर, राज्यपाल और शासन को भेजे शिकायती पत्र में आरोप लगाया था कि नगर पालिका शामली में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के कार्य के लिए सात दिसंबर 2020 को विभिन्न शर्तों के साथ टेंडर निकाले थे, जिसमें अनुभव प्रमाण पत्र की शर्त को मुख्य रूप से अनिवार्य किया गया था। आरोप है कि पालिका के ईओ सुरेंद्र सिंह ने मैसर्स अजय कंस्ट्रक्शन कंपनी से मिलीभगत कर नगर पंचायत सुमेरपुर (हमीरपुर) के नाम से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और उसके फर्जी सत्यापन के आधार पर डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के ठेके को संचालित कराकर वित्तीय अनियमितता बरती। इसके अलावा मृत पशुओं के निस्तारण हेतु कोई उचित व्यवस्था नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया था। इस मामले में डीएम ने 20 जून को ईओ के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए शासन को रिपोर्ट भेजी थी।
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1.31 करोड़ की लागत के कार्यों के होने थे दोबारा टेंडर
नगर पालिका ने पिछले दिनों 53 कार्यों की टेंडर निकाले थे। जिनमें से 25 कार्यों की प्रक्रिया पूरी हो गई थी। जबकि 28 टेंडर तीन से कम निविदा आने के चलते दोबारा निकाले जाने थे। इनमें मोहल्ला बरखंडी में बीरो वाला मंदिर के पास 32 लाख की लागत से आरसीसी नाला निर्माण, माजरा रोड पर 26 लाख की लागत से नाला निर्माण कार्य शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में सड़क और नालियों का निर्माण होना था।
वर्जन
चेयरपर्सन का इस्तीफा स्वीकृति के लिए शासन को भेज दिया गया है। शासन से इस्तीफा स्वीकृत होने पर प्रशासक नियुक्त किया जाएगा। उसके बाद ही वित्तीय और विकास कार्य होंगे। सभासदों को शपथ पत्र के साथ इस्तीफा देने के लिए एक बार और नोटिस जारी किया जाएगा। - संतोष कुमार सिंह, एडीएम।