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पात्र होने के बावजूद सपना बनकर रह गया अपना आशियाना

Fri, 12 Nov 2021 12:12 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 12 Nov 2021 12:12 AM IST
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'Despite being eligible, the dream of your house is not being fulfilled'
सबीला निवासी खुरगान रोड चांद मस्जिद - फोटो : SHAMLI
‘पात्र होने के बावजूद पूरा नहीं हो रहा अपने घर का सपना’
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शामली, कैराना। एक ओर जहां सरकार पात्र लोगों को आवास की चाबी सौंप रही है तो वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके लिए सालों से अपना आशियाना सपना ही बना हुआ है। जिले में कई लोगों को पात्र होने के बावजूद भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। सालों से जर्जर मकानों में रह रहे इन लोगों ने आवास पाने के लिए कई बार आवेदन किए। कई बार अधिकारियों के यहां चक्कर लगाए। सर्वे के दौरान पात्र पाए गए लोगों का कहना है कि सूची में उनका नाम ही नहीं आया। जिसके चलते उन्हें भटकना पड़ रहा है। उनके जर्जर मकानों की हालत ऐसी है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ऐसे लोगों को एक अदद छत की दरकार है।
योजना में लगते रहे भ्रष्टाचार के आरोप
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 तक हर आवास विहीन पात्र को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। प्रदेश में मुख्यमंत्री आवास योजना भी चल रही है। पात्रों को लाभ दिलाने के लिए ग्राम सर्वे के आधार पर पहली सूची तैयार की गई। आरोप है कि जांच पड़ताल के बाद भी कई परिवारों को योजना का लाभ नहीं मिल सका। सर्वे के दौरान इस योजना में भ्रष्टाचार के आरोप भी काफी उछले। जिसमें पैसे लेकर अपात्रों को भी पात्रता सूची में शामिल करने के आरोप लगे। पैसे देने में असमर्थ लोगों को सूची से बाहर कर दिया गया।
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केस-1
खुरगान रोड पर चांद मस्जिद के पास कच्चे मकान में अपने दो बेटों के साथ रहने वाली विधवा सबीला ने बताया कि 3 माह पहले बरसात में उसके मकान की कड़ियां गिर गई थी। किसी तरह वह टूटी छत के नीचे गुजर-बसर कर रहे हैं। पीएम आवास योजना के लिए कई बार फार्म भरे, लेकिन उनका नाम पात्रों की सूची में नहीं आया।
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केस-2
जामा मस्जिद के पास कच्चे मकान में रहने वाले मुस्तकीम ने बताया कि वह मजदूरी करके परिवार का पेट पालता है। पिछले दो साल में तीन बार आवेदन किया, लेकिन उसका नाम भी पात्रों की सूची में नहीं आया। अधिकारियों के यहां वह कई बार चक्कर लगा चुके हैं। इसके बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई।

केस-3
जामा मस्जिद के पास ही रहने वाले हनीफ की पत्नी सलमा ने बताया कि पति मजदूरी करते थे। दो साल पहले उनकी पेड़ से गिरकर हड्डी टूट गई थी। अब सड़क किनारे बैठकर चाय बेचते है और किसी तहर परिवार का गुजारा करते हैं। मकान के लिए कई बार फार्म भरे लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

मुस्तकीम निवासी जामा मस्जिद

मुस्तकीम निवासी जामा मस्जिद- फोटो : SHAMLI

सलमा निवासी जामा मस्जिद

सलमा निवासी जामा मस्जिद- फोटो : SHAMLI

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