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Shamli News: काली नदी पर कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की मांग
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। नालों का गंदा पानी काली नदी में छोड़े जाने का आरोप लगाते हुए इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट फोरम की ओर से कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की मांग की गई है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से शहर में पहले से ही चार एसटीपी होने की बात कहते हुए मांग को खारिज कर दिया गया है।
घरों से निस्तारित होने वाला गंदा पानी नालों के माध्यम से किदवई नगर स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में जाता है। जहां से पानी को साफ कर काली नदी और अन्य स्रोत में छोड़ा जाता है। इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट फोरम के चेयरमैन केएल अग्रवाल की ओर से डीएम से मुलाकात कर शिकायत की गई थी कि अधिकतर नालों का पानी बिना ट्रीट किये ही काली नदी में छोड़ दिया जाता है। जिस कारण काली नदी का पानी दूषित होता जा रहा है।
फोरम की ओर से मामला उद्योग बंधु की बैठक में भी रखा गया। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी डॉ.गीतेश चंद्रा की ओर से इस मामले में जल निगम से टैप किये गए नालों की जानकारी लेने की बात कही गई।
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उन्होंने बताया कि कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट नालों के लिए नहीं होता बल्कि उद्योगों के लिए होता है। नालों के पानी को शोधित करने के लिए नगर में चार एसटीपी प्लांट संचालित हो रहे हैं।
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मुजफ्फरनगर। नालों का गंदा पानी काली नदी में छोड़े जाने का आरोप लगाते हुए इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट फोरम की ओर से कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की मांग की गई है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से शहर में पहले से ही चार एसटीपी होने की बात कहते हुए मांग को खारिज कर दिया गया है।
घरों से निस्तारित होने वाला गंदा पानी नालों के माध्यम से किदवई नगर स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में जाता है। जहां से पानी को साफ कर काली नदी और अन्य स्रोत में छोड़ा जाता है। इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट फोरम के चेयरमैन केएल अग्रवाल की ओर से डीएम से मुलाकात कर शिकायत की गई थी कि अधिकतर नालों का पानी बिना ट्रीट किये ही काली नदी में छोड़ दिया जाता है। जिस कारण काली नदी का पानी दूषित होता जा रहा है।
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फोरम की ओर से मामला उद्योग बंधु की बैठक में भी रखा गया। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी डॉ.गीतेश चंद्रा की ओर से इस मामले में जल निगम से टैप किये गए नालों की जानकारी लेने की बात कही गई।
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उन्होंने बताया कि कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट नालों के लिए नहीं होता बल्कि उद्योगों के लिए होता है। नालों के पानी को शोधित करने के लिए नगर में चार एसटीपी प्लांट संचालित हो रहे हैं।