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भक्ति की शक्ति से आसान हुई मंजिल

Wed, 08 Aug 2018 12:21 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली Updated Wed, 08 Aug 2018 12:21 AM IST
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power of devotion made the floor easy
अपने माता-पिता को कांंवड़ में बैठाकर कर शामली से गुजरते पानीपत के शिवभक्त। - फोटो : अमर उजाला
शामली में शिवरात्रि का त्यौहार नजदीक आते ही डाक कांवड़ियों का सैलाब उमड़ पड़ा। इससे पानीपत-खटीमा और मेरठ करनाल मार्ग पर बोल बम बम, हर- हर महादेव, ओम नम: शिवाय का जयघोष गूंज रहे है। शिव भक्ति के साथ साथ देश भक्ति के तराने गूंज रहे है।
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सोमवार की शाम से शामली में डाक और झांकी वाली कांवड़ का रैला शुरू हो गया। मंगलवार को पूरे दिन डाक व झांकी वाले कांवड़ियों के आगमन से बाजारों में जाम की स्थिति बनी रही। ‘डीजे वाली कांवड़ पर सज रहे भोले बाबा’, ‘अखिलेश ने डीजे पर बैन लगाया था भोले, सजवा दिए, डीजे बजवा दिए योगी ने’, ‘कब लोगे खबर भोले नाथ’ आदि भजन गूंजते रहे। पिछले 11 दिनों में 50 हजार से ज्यादा कांवड़िये शामली होकर हरियाणा की ओर निकले है। 24 घंटे में डाक कांवड़ियाें ने हरियाणा की ओर प्रस्थान किया है। बृहस्पतिवार को शिवरात्रि होने से बुधवार को भी डाक कांवड़ियों का सैलाब उमड़ेगा। उधर, श्री हनुमान धाम पर श्रीराम लखन सेवा समिति के संस्थापक राजकुमार तायल, भाजपा नेता यशपाल पंवार, राजकुमार बालियान के सानिध्य में शिविर में आए कांवड़ियों को दूध का वितरण किया गया।
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मानव अधिकार संगठन और वैश्य सभा महिला समिति की ओर से हनुमान धाम पर कांवड़ियों को पूर्व डीआईजी विजय गर्ग ने फल और मिठाई का वितरण किया गया। संस्कार सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष डाक्टर राजेंद्र गोयल, वैश्य सभा महिला की अध्यक्षा अंजलि गर्ग आदि का सहयोग रहा। इस मौके पर अजय चौधरी, अनुज गौतम, मनोज मित्तल, अनीता बंसल, बीना अग्रवाल, सविता गुप्ता, शालू गर्ग, पूजा बंसल, शशि गोयल, प्रमोद अग्रवाल, सरला संगल आदि का योगदान रहा।
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माता पिता को कांवड़ में बैठाकर लाया बब्बन शामली। हरिद्वार से कांवड़ उठाकर मुजफ्फरनगर होते हुए बब्बन और उसके भाई शामली पहुंचे। बब्बन ने बताया कि मां रिशमती और पिता सुक्कन को वह बहुत प्यार करते हैं और उनकी सेवा करना अपना धर्म मानते हैं। पूर्व में वह कई बार हरिद्वार से कांवड़ लाया, लेकिन इस बार उसने ठान ली कि माता पिता को कांवड़ में बैठाकर लाऊंगा। इतनी लंबी दूरी तय करने में होने वाली परेशानियों के बारे में बब्बन ने कहा कि माता पिता के प्रति श्रद्धा और भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद ने सफर आसान कर दिया। थकान तो हुई, लेकिन बोल बम बोल बम का जयघोष करने से ऊर्जा मिलती रही। उधर, जब बब्बन और उसके भाई अपने माता पिता को कांवड़ में बैठाकर शामली की तरफ पहुंचे, तो रास्ते में जगह जगह लोगों ने उनका स्वागत किया। कस्बा बनत में तो कई महिलाओं ने कांवड़ में बैठी रिशमती के पैर छूकर आशीर्वाद तक लिया। शामली शहर में पहुंचने पर भी यह कांवड़ आकर्षण का केंद्र बनी रही।
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