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सीबीसीआईडी ने लिए पुलिस के बयान
शामली, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 19 Mar 2017 12:01 AM IST
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- फोटो : Demo Pic
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कैराना। पिछले साल के चर्चित अकबरपुर सुन्हैटी निवासी गुड्डी अपहरण हत्याकांड और उसके जेठ ब्रह्मपाल की हत्या की जांच करने के लिए शनिवार को भी सीबीसीआईडी कैराना कोतवाली पहुंची। सीबीसीआईडी ने हत्याकांड से संबधित दस्तावेजों की प्रतियां लीं। उन्होंने तत्कालीन पुलिसकर्मियों के बयान भी दर्ज किए।
पिछले साल चार अप्रैल 2016 को अकबरपुर सुन्हैटी निवासी गु्ड्डी का अपहरण करने के बाद आरोपियों ने दुराचार कर उसकी हत्या कर दी थी। बाद में गुड्डी के शव की पहचान छिपाने के लिए उसके चेहरे पर तेजाब डालकर जला दिया गया था।
शव को सहपत गांव के पास यमुना में डाल दिया था। पुलिस ने दो दिन बाद गुड्डी के शव को सड़ी गली हालत में यमुना से बाहर निकाला था। साथ ही गुड्डी के पति संगत की तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने के बाद दूसरे समुदाय के दो आरोपियों को जेल भेजा था। पुलिस ने हत्यारोपियों के बयानों पर ही विश्वास करके गुड्डी के तीन परिजनों को भी दुराचार और हत्या में आरोपी बना दिया था।
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इसके बाद भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर आरोप लगाते हुए मामले को कैराना पलायन मुद्दे से जोड़ दिया था। वही गांव में तनाव के चलते पीएसी बल तैनात कर दिया था।
पीएसी की मौजूदगी में ही 20 नवंबर 2016 की रात गुड्डी के जेठ ब्रह्मपाल की भी गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। हत्या के आरोप में दूसरे समुदाय के छह आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। लेकिन पुलिस आज तक बड़े-बड़े दावों के बावजूद केवल एक आरोपी को ही जेल भेज सकी है। पुलिस की लापरवाही के चलते दोनों हत्याकांडों की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई थी।
बीते सप्ताह पहले सीबीसीआईडी ने कोतवाली में पीड़ित पक्षों को बुलाकर उनके बयान दर्ज किए थे। वही शनिवार को भी सीबीसीआईडी के इंस्पेक्टर हरबीर सिंह कोतवाली पहुंचे। वहीं, इसके अलावा कोतवाली में उन्होंने गुड्डी और ब्रह्मपाल हत्या से जुडे़ दस्तावेजों की प्रतियां लेकर पुलिसकर्मियों के बयान कलमबंद किए। इसके बाद सीबीसीआईडी के अधिकारी वापस लौट गए।
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पिछले साल चार अप्रैल 2016 को अकबरपुर सुन्हैटी निवासी गु्ड्डी का अपहरण करने के बाद आरोपियों ने दुराचार कर उसकी हत्या कर दी थी। बाद में गुड्डी के शव की पहचान छिपाने के लिए उसके चेहरे पर तेजाब डालकर जला दिया गया था।
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शव को सहपत गांव के पास यमुना में डाल दिया था। पुलिस ने दो दिन बाद गुड्डी के शव को सड़ी गली हालत में यमुना से बाहर निकाला था। साथ ही गुड्डी के पति संगत की तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने के बाद दूसरे समुदाय के दो आरोपियों को जेल भेजा था। पुलिस ने हत्यारोपियों के बयानों पर ही विश्वास करके गुड्डी के तीन परिजनों को भी दुराचार और हत्या में आरोपी बना दिया था।
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इसके बाद भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर आरोप लगाते हुए मामले को कैराना पलायन मुद्दे से जोड़ दिया था। वही गांव में तनाव के चलते पीएसी बल तैनात कर दिया था।
पीएसी की मौजूदगी में ही 20 नवंबर 2016 की रात गुड्डी के जेठ ब्रह्मपाल की भी गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। हत्या के आरोप में दूसरे समुदाय के छह आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। लेकिन पुलिस आज तक बड़े-बड़े दावों के बावजूद केवल एक आरोपी को ही जेल भेज सकी है। पुलिस की लापरवाही के चलते दोनों हत्याकांडों की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई थी।
बीते सप्ताह पहले सीबीसीआईडी ने कोतवाली में पीड़ित पक्षों को बुलाकर उनके बयान दर्ज किए थे। वही शनिवार को भी सीबीसीआईडी के इंस्पेक्टर हरबीर सिंह कोतवाली पहुंचे। वहीं, इसके अलावा कोतवाली में उन्होंने गुड्डी और ब्रह्मपाल हत्या से जुडे़ दस्तावेजों की प्रतियां लेकर पुलिसकर्मियों के बयान कलमबंद किए। इसके बाद सीबीसीआईडी के अधिकारी वापस लौट गए।