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नवजात बच्ची को नाले के किनारे फेंका
ब्यूरो/अमर उजाला, शामली
Updated Fri, 07 Oct 2016 12:53 AM IST
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जलालाबाद में नवरात्र के पावन दिनों में एक ओर जहां कन्याओं की पूजा कर मन्नतें मांगीं जा रही हैं, वहीं गांव सौहजनी डेरा में एक नवजात बच्ची को नाले के किनारे फेंक दिया गया। स्कूल जा रहे बच्चों ने उसके रोने की आवाज सुनी तो लोगों की भीड़ जुट गई। उसे बचाने की लाख कोशिश की गई, लेकिन चिकित्सक के यहां पहुंचने से पहले ही उसकी सांसें थम गईं।
बेटियों को बचाने और उन्हें पढ़ाने की मुहिम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लोगों को जागरू करने के लिए गोष्ठियां और रैली निकाली जा रही हैं, लेकिन आज भी समाज बेटियों को उनका दर्जा देने को तैयार नहीं है। गांव सौहजनी डेरा की प्राइमरी पाठशाला के बच्चे बृहस्पतिवार सुबह स्कूल आ रहे थे। उन्हें वहां स्कूल के पास बने नाले के किनाने एक नवजात शिशु के रोने की आवाज सुनाई दी।
बच्चों ने गांव में शोर मचा दिया, जिस पर वहां ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। गांव का ही धीर सिंह बच्ची को अपनाने की इच्छा जताते हुए उसे इलाज के लिए जलालाबाद चिकित्सालय ले गया। वहां से गंभीर हालत के चलते उसे शामली रेफर कर दिया गया, लेकिन कन्या की रास्ते में ही मौत हो गई। पूरे दिन गांव में यह मामला चर्चा का विषय बना रहा। लोग इस बच्ची को जन्म देने वाली मां को कोसते रहे।
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बेटियों को बचाने और उन्हें पढ़ाने की मुहिम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लोगों को जागरू करने के लिए गोष्ठियां और रैली निकाली जा रही हैं, लेकिन आज भी समाज बेटियों को उनका दर्जा देने को तैयार नहीं है। गांव सौहजनी डेरा की प्राइमरी पाठशाला के बच्चे बृहस्पतिवार सुबह स्कूल आ रहे थे। उन्हें वहां स्कूल के पास बने नाले के किनाने एक नवजात शिशु के रोने की आवाज सुनाई दी।
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बच्चों ने गांव में शोर मचा दिया, जिस पर वहां ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। गांव का ही धीर सिंह बच्ची को अपनाने की इच्छा जताते हुए उसे इलाज के लिए जलालाबाद चिकित्सालय ले गया। वहां से गंभीर हालत के चलते उसे शामली रेफर कर दिया गया, लेकिन कन्या की रास्ते में ही मौत हो गई। पूरे दिन गांव में यह मामला चर्चा का विषय बना रहा। लोग इस बच्ची को जन्म देने वाली मां को कोसते रहे।
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