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यूपी में शराब तस्करी का प्रवेश द्वार बना शामली
Updated Fri, 16 Feb 2018 11:36 PM IST
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शामली। गांव सुन्ना में अवैध रूप से बिकने वाली शराब के सेवन से दो लोगों की मौत होने से पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर दिया है। एक ओर जहां हरियाणा से तस्करी कर लाई जाने वाली शराब गांवों में धड़ल्ले से बिक रही है, तो कच्ची शराब की कसीदगी भी बडे़ पैमाने पर हो रही है।
दरअसल, जिला शामली और पड़ोसी प्रदेश हरियाणा की सीमा करीब 60 किलोमीटर तक सटी हुई है। शामली और हरियाणा के जिला पानीपत, करनाल के बीच यमुना नदी है। चूंकि हरियाणा और यूपी प्रदेश की शराब की कीमतों में अंतर है। इसी कारण हरियाणा से यूपी में शराब की तस्करी की जाती है। यमुना क्षेत्र में बने घाट और बिड़ौली-कैराना यमुना पुल के माध्यम से शराब तस्कर जिले में शराब लाते है। इसके साथ ही यमुना खादर में कच्ची शराब की भट्ठियां भी धधकती है। ऐसा नहीं है कि शराब माफियाओं पर कार्रवाई नहीं की जाती। मगर, बावजूद इसके क्षेत्र में शराब तस्करी और कच्ची शराब बेचने का धंधा कम नहीं हो रहा है।
झिंझाना बना गढ़
कच्ची शराब बिकने और बनाने के मामले में झिंझाना क्षेत्र गढ़ बना हुआ है। इस क्षेत्र के गांवों में कच्ची शराब और हरियाणा मार्का शराब की बिक्री होती है। पूर्व में पुलिस ने कई बार झिंझाना क्षेत्र के गांवों में अवैध शराब बेचने वालों के खिलाफ अभियान भी चलाया। मगर, शराब माफिया फिर सक्रिय हो जाते हैं।
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शराब तस्करी रोकने को चार सिपाही और दो इंस्पेक्टर
जिले में शराब तस्करी रोकने का जिम्मा आबकारी विभाग के दो इंस्पेक्टर और चार सिपाहियों के कंधों पर है। इंस्पेक्टर को छोड़कर सिपाही के पास भी हथियार नहीं है। हालांकि समय-समय पर मांगे जाने पर आबकारी को पीएसी मुहैया करा दी जाती है।
दो साल में पकड़ी गई पौने दो लाख लीटर शराब
आबकारी विभाग रिकार्ड के अनुसार जिले में 2016-17 में एक लाख चार हजार नौ लीटर कच्ची शराब, 44 हजार तीन सौ 34 और 34 हजार पांच सौ 26 लीटर विदेशी शराब पकड़ी गई। इसके साथ ही 950 तस्करों को गिरफ्तार किया गया। 2017-18 में अब तक जिले में 76 हजार दो सौ 54 लीटर कच्ची, 39 हजार 38 लीटर देशी शराब और 31 हजार नो सौ 77 लीटर अंग्रेजी शराब पकड़ी गई, जबकि 767 तस्करों को गिरफ्तार किया गया।
शराब माफियाओं के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाए गए और हजारों लीटर अंग्रेजी, देशी और कच्ची शराब बरामद की गई। यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। - राकेश बहादुर सिंह, जिला आबकारी अधिकारी।
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दरअसल, जिला शामली और पड़ोसी प्रदेश हरियाणा की सीमा करीब 60 किलोमीटर तक सटी हुई है। शामली और हरियाणा के जिला पानीपत, करनाल के बीच यमुना नदी है। चूंकि हरियाणा और यूपी प्रदेश की शराब की कीमतों में अंतर है। इसी कारण हरियाणा से यूपी में शराब की तस्करी की जाती है। यमुना क्षेत्र में बने घाट और बिड़ौली-कैराना यमुना पुल के माध्यम से शराब तस्कर जिले में शराब लाते है। इसके साथ ही यमुना खादर में कच्ची शराब की भट्ठियां भी धधकती है। ऐसा नहीं है कि शराब माफियाओं पर कार्रवाई नहीं की जाती। मगर, बावजूद इसके क्षेत्र में शराब तस्करी और कच्ची शराब बेचने का धंधा कम नहीं हो रहा है।
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झिंझाना बना गढ़
कच्ची शराब बिकने और बनाने के मामले में झिंझाना क्षेत्र गढ़ बना हुआ है। इस क्षेत्र के गांवों में कच्ची शराब और हरियाणा मार्का शराब की बिक्री होती है। पूर्व में पुलिस ने कई बार झिंझाना क्षेत्र के गांवों में अवैध शराब बेचने वालों के खिलाफ अभियान भी चलाया। मगर, शराब माफिया फिर सक्रिय हो जाते हैं।
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शराब तस्करी रोकने को चार सिपाही और दो इंस्पेक्टर
जिले में शराब तस्करी रोकने का जिम्मा आबकारी विभाग के दो इंस्पेक्टर और चार सिपाहियों के कंधों पर है। इंस्पेक्टर को छोड़कर सिपाही के पास भी हथियार नहीं है। हालांकि समय-समय पर मांगे जाने पर आबकारी को पीएसी मुहैया करा दी जाती है।
दो साल में पकड़ी गई पौने दो लाख लीटर शराब
आबकारी विभाग रिकार्ड के अनुसार जिले में 2016-17 में एक लाख चार हजार नौ लीटर कच्ची शराब, 44 हजार तीन सौ 34 और 34 हजार पांच सौ 26 लीटर विदेशी शराब पकड़ी गई। इसके साथ ही 950 तस्करों को गिरफ्तार किया गया। 2017-18 में अब तक जिले में 76 हजार दो सौ 54 लीटर कच्ची, 39 हजार 38 लीटर देशी शराब और 31 हजार नो सौ 77 लीटर अंग्रेजी शराब पकड़ी गई, जबकि 767 तस्करों को गिरफ्तार किया गया।
शराब माफियाओं के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाए गए और हजारों लीटर अंग्रेजी, देशी और कच्ची शराब बरामद की गई। यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। - राकेश बहादुर सिंह, जिला आबकारी अधिकारी।