{"_id":"69839f21717d0e2a1c0c7b53","slug":"court-news-shamli-news-c-29-1-mng1001-164456-2026-02-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामपुर तिराहा कांड : सीबीआई ने कहा-कोर्ट में दाखिल किए थे मूल दस्तावेज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामपुर तिराहा कांड : सीबीआई ने कहा-कोर्ट में दाखिल किए थे मूल दस्तावेज
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड की गायब मूल पत्रावलियों की फोटोकॉपी के आधार पर साक्ष्य कराने के मामले में दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी हो गई है। सीबीआई के अभियोजन अधिकारी ने कहा कि मूल दस्तावेज कोर्ट में ही दाखिल किए गए थे। तर्क दिया कि फोटोकॉपी को द्वितीय साक्ष्य में माना जाए। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-9 की पीठासीन अधिकारी ज्योति सिंह ने सुनवाई के लिए 11 फरवरी नियत कर दी है।
सीबीआई बनाम राधा मोहन द्विवेदी की पत्रावली में बचाव पक्ष ने प्रार्थनापत्र देते हुए कहा था कि मूल दस्तावेजों की फोटोकॉपी को साक्ष्य नहीं माना जा सकता। सीबीआई को साक्ष्य देने के लिए बुधवार को अंतिम अवसर दिया गया। सीबीआई की ओर से अभियोजन अधिकारी पहुंचे।
तर्क दिया कि सीबीआई ने कोर्ट में दस्तावेज दाखिल किए थे, जिसकी रिसीविंग भी सुरक्षित है। अदालत में इंडेक्स सूची और रिसीविंग कॉपी दाखिल की गई। कुल 27 दस्तावेज थे, जिनकी रिसीविंग सूची दाखिल की गई है। प्रकरण में दोनों पक्षों की बहस पूरी हो गई है। अदालत ने प्रार्थनापत्र के निस्तारण के लिए 11 फरवरी नियत कर दी है।
विज्ञापन
--
यह था मामला
एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिस पार्टी और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे।
--
तीन साल पहले मिल गई थी स्वीकृति
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड की गायब मूल पत्रावलियों की फोटोकॉपी के आधार पर साक्ष्य कराने को लेकर तीन साल से सुनवाई चल रही है। वर्ष 2023 में तत्कालीन अपर जिला जज एवं सत्र न्यायालय संख्या सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने फोटोकॉपी को स्वीकृति दे दी थी। बचाव पक्ष ने अदालत में विरोध किया, जिसके बाद इस पर दोबारा सुनवाई शुरू हुई। अब 11 फरवरी को फैसले के लिए नियत की गई है। ब्यूरो
विज्ञापन
सीबीआई बनाम राधा मोहन द्विवेदी की पत्रावली में बचाव पक्ष ने प्रार्थनापत्र देते हुए कहा था कि मूल दस्तावेजों की फोटोकॉपी को साक्ष्य नहीं माना जा सकता। सीबीआई को साक्ष्य देने के लिए बुधवार को अंतिम अवसर दिया गया। सीबीआई की ओर से अभियोजन अधिकारी पहुंचे।
विज्ञापन
तर्क दिया कि सीबीआई ने कोर्ट में दस्तावेज दाखिल किए थे, जिसकी रिसीविंग भी सुरक्षित है। अदालत में इंडेक्स सूची और रिसीविंग कॉपी दाखिल की गई। कुल 27 दस्तावेज थे, जिनकी रिसीविंग सूची दाखिल की गई है। प्रकरण में दोनों पक्षों की बहस पूरी हो गई है। अदालत ने प्रार्थनापत्र के निस्तारण के लिए 11 फरवरी नियत कर दी है।
विज्ञापन
यह था मामला
एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिस पार्टी और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे।
तीन साल पहले मिल गई थी स्वीकृति
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड की गायब मूल पत्रावलियों की फोटोकॉपी के आधार पर साक्ष्य कराने को लेकर तीन साल से सुनवाई चल रही है। वर्ष 2023 में तत्कालीन अपर जिला जज एवं सत्र न्यायालय संख्या सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने फोटोकॉपी को स्वीकृति दे दी थी। बचाव पक्ष ने अदालत में विरोध किया, जिसके बाद इस पर दोबारा सुनवाई शुरू हुई। अब 11 फरवरी को फैसले के लिए नियत की गई है। ब्यूरो