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Shamli News: झूठा वाद दायर कराने पर 20 हजार जुर्माना
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शामली। न्यायालय जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग शामली ने पंजाब नेशनल बैंक शाखा पर ऋण खाते से रुपये निकालने के मामले में सुनवाई की। आयोग ने परिवादी पर झूठा परिवाद दायर करने पर 20 हजार रुपये का जुर्माना अदा करने का आदेश सुनाया है।
शहर के भैंसवाल रोड निवासी जगेंद्र सिंह ने आयोग में 28 मार्च 2022 को पंजाब नेशनल बैंक शाखा हनुमान रोड शामली के विरुद्ध परिवाद दायर कराया था। परिवादी ने बताया था कि सितंबर 2021 में उनके ऋण खाते से अनधिकृत रूप से 49 हजार 998 रुपये निकाल लिए गए, जबकि उसके खाते पर एटीएम या नेट बैंकिंग की सुविधा भी सक्रिय नहीं थी, फिर भी धोखाधड़ी हुई। उन्होंने मानसिक उत्पीड़न और सिबिल स्कोर खराब होने का हवाला देते हुए बैंक से हर्जाने की मांग की थी। आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता व सदस्य अमरजीत कौर ने मामले की सुनवाई की।
अध्यक्ष ने आदेश जारी करते हुए कहा कि परिवादी का परिवाद विपक्षी बैंक के विरुद्ध निरस्त किया जाता है। परिवादी द्वारा बैंक के विरुद्ध झूठा वाद योजित करने के कारण विपक्षी की साख व प्रतिष्ठा को हुई क्षति के लिए 10 हजार रुपये विपक्षी को अदा करेगा। झूठा वाद प्रस्तुत करने के कारण उस पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी अधिरोपित किया गया।
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अर्थदंड की धनराशि विपक्षी को देय न होकर नियमानुसार राजकोष में जमा की जाएगी। परिवादी को आदेश का अनुपालन 45 दिन में करने का आदेश सुनाया। आदेश का अनुपालन न करने पर परिवादी के विरुद्ध उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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शहर के भैंसवाल रोड निवासी जगेंद्र सिंह ने आयोग में 28 मार्च 2022 को पंजाब नेशनल बैंक शाखा हनुमान रोड शामली के विरुद्ध परिवाद दायर कराया था। परिवादी ने बताया था कि सितंबर 2021 में उनके ऋण खाते से अनधिकृत रूप से 49 हजार 998 रुपये निकाल लिए गए, जबकि उसके खाते पर एटीएम या नेट बैंकिंग की सुविधा भी सक्रिय नहीं थी, फिर भी धोखाधड़ी हुई। उन्होंने मानसिक उत्पीड़न और सिबिल स्कोर खराब होने का हवाला देते हुए बैंक से हर्जाने की मांग की थी। आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता व सदस्य अमरजीत कौर ने मामले की सुनवाई की।
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अध्यक्ष ने आदेश जारी करते हुए कहा कि परिवादी का परिवाद विपक्षी बैंक के विरुद्ध निरस्त किया जाता है। परिवादी द्वारा बैंक के विरुद्ध झूठा वाद योजित करने के कारण विपक्षी की साख व प्रतिष्ठा को हुई क्षति के लिए 10 हजार रुपये विपक्षी को अदा करेगा। झूठा वाद प्रस्तुत करने के कारण उस पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी अधिरोपित किया गया।
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अर्थदंड की धनराशि विपक्षी को देय न होकर नियमानुसार राजकोष में जमा की जाएगी। परिवादी को आदेश का अनुपालन 45 दिन में करने का आदेश सुनाया। आदेश का अनुपालन न करने पर परिवादी के विरुद्ध उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की के तहत कार्रवाई की जाएगी।