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चीन दगाबाज है, वह भरोसा करने लायक नहीं
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शामली क्षेत्र के गांव कसेरवा निवासी लेफ्टिनेंट कर्नल नरेंद्र कुमार
- फोटो : SHAMLI
चीन दगाबाज है, वह भरोसा करने लायक नहीं
शामली। चीन भरोसा करने लायक देश नहीं है। वह दगाबाज है, वह बोलेगा कुछ और करेगा कुछ और। हाल ही में भारत-चीन सीमा पर हिंसक झड़पों में भी चीन ने धोखे से वार किया है। इसे सबक सिखाना जरूरी है। इसके लिए हमें हर तरह से तैयार रहना होगा। अब भारत सशक्त देश है और सेना का मनोबल ऊंचा है। देश के सभी नागरिकों को एकजुट होकर चीन के खिलाफ परोक्ष रूप से लड़ाई लड़नी होगी। चीन के उत्पादों का बहिष्कार कर उसकी आर्थिक रीढ़ पर प्रहार कर उसे कमजोर बनाना होगा।
यह कहना है शामली के गांव कसेरवा खुर्द निवासी सेना मेडल से सम्मानित लेफ्टिनेंट कर्नल नरेंद्र कुमार (सेवानिवृत्त) का। 2007 में सेवानिवृत्त हुए कर्नल नरेंद्र कुमार ने कहा कि चीन की नीतियां ऐसी हैं कि वह अपने देश की सीमाओं को फैलाने की कोशिश में रहता है। यह पहले से स्पष्ट है कि चीन धोखेबाज है। 1962 में भी उसने ऐसा ही किया था। इस बार भी चीन ने धोखे से भारतीय सैनिकों पर हमला किया। सीमा पर जहां यह हमला हुआ, वहां किसी को हथियार ले जाने की इजाजत नहीं है। इसके बाद भी चीन के सैनिकों ने कंटीले तार और कील युक्त डंडों और नुकीली चीजों से भारतीय सैनिकों पर वार किया। हालांकि भारतीय सैनिकों ने चीन के सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब दिया और चीन को भारी नुकसान पहुंचाया। उनका मानना है कि चीन युद्ध करना नहीं चाहता, लेकिन धमकी देकर और सीमा पर तनाव बढ़ाकर भारत पर दबाव बनाना चाहता है, लेकिन अब चीन को समझ जाना चाहिए कि भारत एक शक्तिशाली देश है। इस तरह की धमकी या दबाव में आने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में जो कदम उठा रही है, वह सही है। उनका कहना है कि चीन को उसी की तरह कूटनीति तरीके से जवाब दिया जाए। देश की 140 करोड़ जनसंख्या है। सभी लोग एकजुट होकर चीन के उत्पादों का इस्तेमाल करना बंद कर दे तो इससे एक तरफ जहां चीन आर्थिक रूप से कमजोर होगा वहीं भारत आर्थिक स्थिति में और मजबूत होगा।
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शामली। चीन भरोसा करने लायक देश नहीं है। वह दगाबाज है, वह बोलेगा कुछ और करेगा कुछ और। हाल ही में भारत-चीन सीमा पर हिंसक झड़पों में भी चीन ने धोखे से वार किया है। इसे सबक सिखाना जरूरी है। इसके लिए हमें हर तरह से तैयार रहना होगा। अब भारत सशक्त देश है और सेना का मनोबल ऊंचा है। देश के सभी नागरिकों को एकजुट होकर चीन के खिलाफ परोक्ष रूप से लड़ाई लड़नी होगी। चीन के उत्पादों का बहिष्कार कर उसकी आर्थिक रीढ़ पर प्रहार कर उसे कमजोर बनाना होगा।
यह कहना है शामली के गांव कसेरवा खुर्द निवासी सेना मेडल से सम्मानित लेफ्टिनेंट कर्नल नरेंद्र कुमार (सेवानिवृत्त) का। 2007 में सेवानिवृत्त हुए कर्नल नरेंद्र कुमार ने कहा कि चीन की नीतियां ऐसी हैं कि वह अपने देश की सीमाओं को फैलाने की कोशिश में रहता है। यह पहले से स्पष्ट है कि चीन धोखेबाज है। 1962 में भी उसने ऐसा ही किया था। इस बार भी चीन ने धोखे से भारतीय सैनिकों पर हमला किया। सीमा पर जहां यह हमला हुआ, वहां किसी को हथियार ले जाने की इजाजत नहीं है। इसके बाद भी चीन के सैनिकों ने कंटीले तार और कील युक्त डंडों और नुकीली चीजों से भारतीय सैनिकों पर वार किया। हालांकि भारतीय सैनिकों ने चीन के सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब दिया और चीन को भारी नुकसान पहुंचाया। उनका मानना है कि चीन युद्ध करना नहीं चाहता, लेकिन धमकी देकर और सीमा पर तनाव बढ़ाकर भारत पर दबाव बनाना चाहता है, लेकिन अब चीन को समझ जाना चाहिए कि भारत एक शक्तिशाली देश है। इस तरह की धमकी या दबाव में आने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में जो कदम उठा रही है, वह सही है। उनका कहना है कि चीन को उसी की तरह कूटनीति तरीके से जवाब दिया जाए। देश की 140 करोड़ जनसंख्या है। सभी लोग एकजुट होकर चीन के उत्पादों का इस्तेमाल करना बंद कर दे तो इससे एक तरफ जहां चीन आर्थिक रूप से कमजोर होगा वहीं भारत आर्थिक स्थिति में और मजबूत होगा।
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