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अंजलि बंकर से निकलकर रेलवे स्टेशन पहुंची, हिमांशु ने हंगरी के लिए रवाना

Tue, 01 Mar 2022 12:35 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 01 Mar 2022 12:35 AM IST
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Anjali leaves the bunker and reaches the railway station, Himanshu leaves for Hungary
कैराना (शामली)। रूस यूक्रेन के युद्ध में फंसे भारतीय छात्रों ने बस व ट्रेन से पड़ोसी देशों के बॉर्डर पर पहुंचने का प्रयास शुरू कर दिया। कैराना निवासी अंजलि पाहिवाल कीव के रेलवे स्टेशन पहुंच गई। हिमांशु चौहान बस से हंगरी के लिए रवाना हो गया। परिजन अपनी संतान के लिए चिंतित हैं और भगवान से लगातार उनके सुरक्षित घर पहुंचने की प्रार्थना कर रहे हैं।
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पांच दिन पहले यूक्रेन रूस के बीच भयंकर युद्ध शुरू हो गया था। तभी से कीव मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही कैराना नगर के मोहल्ला आलदरम्यान निवासी अंजलि पाहिवाल हॉस्टल के बंकर में फंस गई थी। सोमवार को अंजलि पाहिवाल ने बताया कि कल देर शाम उनके हॉस्टल के पास एक सुपर मार्केट में ब्लास्ट हुआ था। उनके हॉस्टल में लाइट बहुत कम आ रही है। ज्यादातर समय लाइट गुल रहती है। उसके अलावा 50-60 छात्रों ने ट्रेन से निकलने के लिए 100 ग्रेवियन में टिकट बुक किया है। वह अन्य छात्रों के साथ कीव के वोकजालना रेलवे स्टेशन पर आई है, लेकिन वहां के हालात बहुत खराब है। ट्रेन का पता नहीं कि कब आएगी। छात्रा अंजलि पाहिवाल के पिता बिट्टू ने भावुक होते हुए कहा कि वह प्रार्थना कर रहे हैं कि उनकी बेटी व सभी भारतीय छात्र सुरक्षित घर तक पहुंच जाएं। दूसरी ओर, पोल्टावा से हिमांशु चौहान ने बताया कि उसने अपने हॉस्टल के 50-60 इंडियन छात्रों के साथ एक बस बुक की थी। उसे बस मिल गई है। वह हंगरी बॉर्डर के लिए रवाना हो गया है। बॉर्डर से करीब 50 किलोमीटर पहले एक यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रुकेंगे। जहां से आगे का रास्ता तय किया जाएगा।
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पोलैंड पहुंचा जहांगीर, जुल्फकार सुरक्षित
दोनों छात्रों के परिजनों से मिले प्रशासनिक अधिकारी
चौसाना। यूक्रेन-रूस के बीच चल रहे युद्ध के बीच फंसे चौसाना क्षेत्र के दो छात्रों के परिजनों से एसडीएम ऊन वीशु राजा और तहसीलदार अजय शर्मा मिलने पहुंचे। एसडीएम ने वीडियो कॉल के जरिए छात्रों से बातचीत की और सरकार की तरफ हर संभव मदद का भरोसा दिया।
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चौसाना निवासी जहांगीर व नाई नंगला नवीन निवासी जुल्फकार यूक्रेन में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। दोनों ही छात्र यूक्रेन से एमबीबीएस कर रहे है। चौसाना निवासी जहांगीर ने तो यूक्रेन से बाहर निकलकर पोलैंड में शरण ली है। नाई नंगला नवीन निवासी जुल्फकार पश्चिमी यूक्रेन में है। वहां युद्ध का असर भी कम है। अधिकारियों से बातचीत में छात्रों ने अभी भारत आने की इच्छा नहीं जताई। छात्रों का कहना है कि हालात कुछ सही होते हैं तो उनकी पढ़ाई पूरी हो जाएगी और पैसे की बर्बादी बच जाएगी।
यूक्रेन में फंसी नाला गांव की शिवानी
बेटी की सलामती के लिए मां ने रखा निर्जला व्रत
कांधला। गांव नाला निवासी 21 वर्षीय एमबीबीएस की छात्रा शिवानी यूक्रेन में फंस गई है। छात्रा ने अपने परिजनों सहित सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करते हुए यूक्रेन से निकालकर अपने घर तक पंहुचाने की गुहार लगाई है।
क्षेत्र के गांव नाला निवासी किसान अजय पंवार की पुत्री शिवानी को एमबीबीएस की शिक्षा ग्रहण करने के लिए 2018 में यूक्रेन के मीकोलाइव भेजा था। यूक्रेन व रूस के बीच चल रहे भीषण युद्ध के बीच शिवानी पंवार सहित देश के अन्य छात्र भी उसके साथ यूक्रेन में फंस गए। रविवार को छात्रा ने सोशल मीडिया पर अपना वीडियो वायरल करते हुए आपबीती बयां कर भारत से सरकार से यूक्रेन से वापस भारत लाने की अपील की। साथ ही छात्रा के परिजनों ने भी प्रशासन व शासन से बेटी सकुशल वापसी को लेकर अपील की है। छात्रा से उसके परिजन प्रतिदिन वीडियो कॉल के माध्यम पल-पल की कुशलक्षेम ले रहे हैं। छात्रा शिवानी ने अपने इर्द-गिर्द भीषण युद्ध के दृश्य के चित्रों को अपने परिजनों से साझा करते हुए हालात बयां किया है। छात्रा के मुताबिक उसके साथ भारत से 1000 लोग और भी फंस गए है। यूक्रेन से सुरक्षित बॉर्डर तक पंहुचने के लिए 1000 किमी का सफर तय करना पडे़गा। लेकिन कोई संसाधन नहीं मिल रहा है। जिस बंकर में वह और अन्य छात्र फंसे हैं, वहां खाने-पीने और शौचालय की व्यवस्था भी नहीं है।
मां ने रखा निर्जल व्रत
बेटी शिवानी के लिए मां का रो-रोकर बुरा हाल है। बेटी की कुशलता के लिए निर्जला व्रत रखा है। माता मंजू ने बताया कि बेटी को सात समुंदर पार डॉक्टरी की पढ़ाई करने के लिए भेजा था। लेकिन इस भयानक समय वह जिंदगी मौत के बीच फंसी हुई है। शिवानी की मां ने मीडिया के माध्यम से भारत सरकार से अपनी बेटी सहित सभी वहां फंसे छात्रों को अपने वतन जल्द लाने की अपील की है।
प्रशांत के यूक्रेन से रवाना होने की सूचना मिली तो परिवार हुआ खुश
झिंझाना। कस्बा निवासी छात्र प्रशांत कश्यप की सोमवार को यूक्रेन से रवानगी की खबर से परिजनों के चेहरे खुशी से खिल उठे। रूस और यूक्रेन के युद्ध के बीच फंसे प्रशांत कश्यप ने अपने पिता डॉ. रामनिवास कश्यप को फोन पर बताया। वह करीब 600 छात्रों के एक दल और दूतावास के कर्मचारियों के साथ ट्रेन से रवाना हो गया है। हालांकि यह ट्रेन कहां तक पहुंचाएगी इसकी तो जानकारी नहीं मिली है। बेटे की रवानगी पर खुशी जाहिर करते हुए डॉ. रामनिवास कश्यप ने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया। साथ ही यूक्रेन में फंसे सभी छात्रों की घर वापसी के लिए भगवान से प्रार्थना की है। प्रशांत कश्यप के जल्द घर आने की संभावना जताई जा रही है।

भाकियू और रालोद नेताओं ने डीएम को सौंपा ज्ञापन
शामली। यूक्रेन में फंसे छात्र-छात्राओं की सकुशल घर वापसी के लिए सोमवार को भाकियू नेताओं ने प्रधानमंत्री के नाम डीएम जसजीत कौर को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान भाकियू नेताओं ने कहा कि यूक्रेन के विभिन्न क्षेत्रों में फंसे भारतीय छात्र-छात्राओं के साथ बहुत ही बुरा व्यवहार किया जा रहा है। सभी को तत्काल भारत लाने के लिए प्रयास किए जाएं। इसके साथ ही रालोद नेताओं ने भी डीएम को ज्ञापन देकर सभी छात्रों की सुरक्षित घर वापसी की मांग उठाई। ज्ञापन देने वालों में भाकियू जिलाध्यक्ष कपिल खाटियान, जिला पंचायत सदस्य अरविंद पंवार, विजेंद्र मलिक, योगेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे। रालोद नेताओं में राजन जावला, रजत निर्वाल, तरूण मलिक आदि मौजूद रहे। संवाद
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