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पुण्य-पाप के अनुसार मिलता है सुख-दुख
शामली/ ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Tue, 01 Mar 2016 01:36 AM IST
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कांधला । कस्बे में होने वाले पंच कल्याणक के लिए इंद्रलोक और अयोध्या नगरी की स्थापना हो चुकी है। जैन संत उपाध्याय 108 नयन सागर महाराज ने पात्रों को मन शुद्धि, काया शुद्धि ,आहार शुद्धि के साथ साथ ब्रह्मचार्य का संकल्प कराया।
सोमवार सुबह जैन अतिथि भवन में धर्म सभा को संबोधित करते जैन संत नयन सागर महाराज ने कहा कि पूरा नगर जिस महोत्सव की तैयारी में पिछले दस माह से लगा है उसके लिए अयोध्या नगरी और इंद्रलोक नगरी की रचना हो चुकी है। पंच कल्याणक का मानव सिर्फ आयोजन कर सकता है मनाने की शक्ति नहीं। यह तो सिर्फ देव ही दे सकते हैं।
इस दौरान उन्होंने पात्रों को उनकी भूमिका से अवगत कराया। कहा कि किसी भी धर्म प्रयोजन में महिला शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। धर्म का आयोजन ही महिलाओं द्वारा कलश यात्रा से होता है। बताया कि तीर्थकारों के कल्याणक महोत्सव में दो ही अवतार मिलते हैं।
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एक तो भगवान की पालकी उठाने का और दूसरा मुनि को आहार देने का। संसार की सभी भौतिक वस्तुएं हमें सुलभ हो सकती हैं। अपने तेज पुष्प के कारण संसार का पूर्ण वैभव जैसा चाहते है प्राप्त हो सकता है। सभी पुण्य के कारण आखिर यह पुण्य हमें भी मिलेगा। जीव पुण्य और पाप के अनुसार ही सुख दुख का अनुभव करता है।
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सोमवार सुबह जैन अतिथि भवन में धर्म सभा को संबोधित करते जैन संत नयन सागर महाराज ने कहा कि पूरा नगर जिस महोत्सव की तैयारी में पिछले दस माह से लगा है उसके लिए अयोध्या नगरी और इंद्रलोक नगरी की रचना हो चुकी है। पंच कल्याणक का मानव सिर्फ आयोजन कर सकता है मनाने की शक्ति नहीं। यह तो सिर्फ देव ही दे सकते हैं।
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इस दौरान उन्होंने पात्रों को उनकी भूमिका से अवगत कराया। कहा कि किसी भी धर्म प्रयोजन में महिला शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। धर्म का आयोजन ही महिलाओं द्वारा कलश यात्रा से होता है। बताया कि तीर्थकारों के कल्याणक महोत्सव में दो ही अवतार मिलते हैं।
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एक तो भगवान की पालकी उठाने का और दूसरा मुनि को आहार देने का। संसार की सभी भौतिक वस्तुएं हमें सुलभ हो सकती हैं। अपने तेज पुष्प के कारण संसार का पूर्ण वैभव जैसा चाहते है प्राप्त हो सकता है। सभी पुण्य के कारण आखिर यह पुण्य हमें भी मिलेगा। जीव पुण्य और पाप के अनुसार ही सुख दुख का अनुभव करता है।