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Shamli News: क्लेम न देने पर बीमा कंपनी पर लगाया 50 हजार का अर्थदंड
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शामली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने फसल बीमा का क्लेम न दिए जाने आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के जनरल इंश्योरेंस कंपनी लि.मुंबई पर 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित करने का फैसला सुनाया है।
गांव भनेड़ाजट निवासी वत्सला देवी व उसके दो पुत्रों सचिन कुमार व शैलेंद्र कुमार ने 23 मई 2017 को आयोग में वाद दायर कराया था। इस परिवाद में उन्होंने बताया था कि उन्होंने अपनी कृषि भूमि की उपज का बीमा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत इंडियन ओवरसीज बैंक धीमानपुरा शामली के माध्यम से आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लि. मुंबई के मुख्य शाखा प्रबंधक से कराया था। 2869 रुपये प्रीमियम अदा करके 1,43,430 रुपये का फसल बीमा 30 जुलाई 2016 को कराया था।
उन्होंने कृषि भूमि पर गन्ने की फसल बोई थी। चार अक्तूबर 2016 को भारी वर्षा के कार गन्ने की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। इसकी जानकारी उन्होंने बैंक और इंश्योरेंस कंपनी को छह अक्तूबर 2016 को बीमा दावे के भुगतान के लिए लिखित रूप में दी थी। इंश्योरेंस कंपनी ने औपचारिकताएं पूरी कर एक माह में क्लेम धनराशि का भुगतान करने का आश्वासन दिया, लेकिन उन्हें क्लेम राशि नहीं दी गई।
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आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता और सदस्य अमरजीत कौर ने परिवाद पर सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी को बीमा दावे की धनराशि 143430 रुपये मय 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज घटना की सूचना दिए जाने की तिथि से अंतिम अदायगी तक और शारीरिक मानसिक और आर्थिक क्षतिपूर्ति के 50 हजार रुपये और 10 हजार रुपये परिवाद व्यय परिवादी को भुगतान किए जाने हेतु इस आयोग में जमा करने का निर्णय सुनाया।
बीमा कंपनी को अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए 50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित भी किया। अर्थदंड की धनराशि परिवादी को देय न होकर नियमानुसार राजकोष में जमा की जाएगी। आयोग ने कहा कि बैंक का इस मामले में कोई उत्तरदायित्व नहीं है।र
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गांव भनेड़ाजट निवासी वत्सला देवी व उसके दो पुत्रों सचिन कुमार व शैलेंद्र कुमार ने 23 मई 2017 को आयोग में वाद दायर कराया था। इस परिवाद में उन्होंने बताया था कि उन्होंने अपनी कृषि भूमि की उपज का बीमा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत इंडियन ओवरसीज बैंक धीमानपुरा शामली के माध्यम से आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लि. मुंबई के मुख्य शाखा प्रबंधक से कराया था। 2869 रुपये प्रीमियम अदा करके 1,43,430 रुपये का फसल बीमा 30 जुलाई 2016 को कराया था।
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उन्होंने कृषि भूमि पर गन्ने की फसल बोई थी। चार अक्तूबर 2016 को भारी वर्षा के कार गन्ने की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। इसकी जानकारी उन्होंने बैंक और इंश्योरेंस कंपनी को छह अक्तूबर 2016 को बीमा दावे के भुगतान के लिए लिखित रूप में दी थी। इंश्योरेंस कंपनी ने औपचारिकताएं पूरी कर एक माह में क्लेम धनराशि का भुगतान करने का आश्वासन दिया, लेकिन उन्हें क्लेम राशि नहीं दी गई।
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आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता और सदस्य अमरजीत कौर ने परिवाद पर सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी को बीमा दावे की धनराशि 143430 रुपये मय 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज घटना की सूचना दिए जाने की तिथि से अंतिम अदायगी तक और शारीरिक मानसिक और आर्थिक क्षतिपूर्ति के 50 हजार रुपये और 10 हजार रुपये परिवाद व्यय परिवादी को भुगतान किए जाने हेतु इस आयोग में जमा करने का निर्णय सुनाया।
बीमा कंपनी को अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए 50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित भी किया। अर्थदंड की धनराशि परिवादी को देय न होकर नियमानुसार राजकोष में जमा की जाएगी। आयोग ने कहा कि बैंक का इस मामले में कोई उत्तरदायित्व नहीं है।र