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Shamli News: नर्सिंग होम व इंश्योरेंस कंपनी पर 23.60 लाख का जुर्माना
Thu, 05 Feb 2026 12:44 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Thu, 05 Feb 2026 12:44 AM IST
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शामली। बुच्चाखेड़ी की रहने वाली शैली ने वर्ष 2021 में जच्चा होने के दौरान उचित इलाज न मिलने और डिलीवरी के ऑपरेशन में आंत काटे जाने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में याचिका दायर की थी। आयोग ने अग्रवाल नर्सिंग होम शामली और द ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, शामली के शाखा प्रबंधक को दोषी मानते हुए 23.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
पीड़िता शैली ने कहा कि 31 अगस्त 2021 को अग्रवाल नर्सिंग होम जाकर 400 रुपये परामर्श शुल्क जमा कराया। डॉक्टर मंजू ने अल्ट्रासाउंड के बाद बताया कि बच्चे की स्थिति ठीक नहीं है और आज ही ऑपरेशन करना होगा। इसके लिए पति ने 40,000 रुपये जमा कराए। शैली ने पुत्री को जन्म दिया, लेकिन ऑपरेशन के बाद 1 सितंबर को उसकी तबियत बिगड़ गई।
इलाज में लापरवाही के चलते पेट फूलने की समस्या तीन दिन तक बनी रही। उपचार के बावजूद आराम नहीं मिला। फीस जमा कराने के बाद दवाइयां दी गईं, लेकिन छह दिन तक मल-मूत्र नहीं हुआ। पेट का सीटी स्कैन कराने के लिए कहने पर केंद्र के अधिकारियों ने अभद्रता की। बाद में पता चला कि ऑपरेशन के दौरान आंत काट दी गई थी।
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इलाज के बजाय परिजनों को इंतजार कराया गया। दिल्ली के अस्पताल में अब तक 40 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं और पीड़िता पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो सकी। पीड़िता ने बताया कि उनके पति अंकित शर्मा दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में नौकरी करते थे, लेकिन मेरे इलाज और परिवार की समस्याओं के कारण उनकी नौकरी छूट गई।
आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार ने आदेश दिया कि पीड़िता को इलाज में खर्च हुए 18.50 लाख रुपये और नवजात की देखभाल के लिए 2 लाख रुपये दिये जाएं। पति का रोजगार छूटने और मानसिक-शारीरिक कष्ट के लिए 3 लाख रुपये, तथा वाद खर्च 10,000 रुपये। इनमें से कुल 5 लाख रुपये का भुगतान द ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, शामली शाखा प्रबंधक द्वारा किया जाएगा।
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पीड़िता शैली ने कहा कि 31 अगस्त 2021 को अग्रवाल नर्सिंग होम जाकर 400 रुपये परामर्श शुल्क जमा कराया। डॉक्टर मंजू ने अल्ट्रासाउंड के बाद बताया कि बच्चे की स्थिति ठीक नहीं है और आज ही ऑपरेशन करना होगा। इसके लिए पति ने 40,000 रुपये जमा कराए। शैली ने पुत्री को जन्म दिया, लेकिन ऑपरेशन के बाद 1 सितंबर को उसकी तबियत बिगड़ गई।
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इलाज में लापरवाही के चलते पेट फूलने की समस्या तीन दिन तक बनी रही। उपचार के बावजूद आराम नहीं मिला। फीस जमा कराने के बाद दवाइयां दी गईं, लेकिन छह दिन तक मल-मूत्र नहीं हुआ। पेट का सीटी स्कैन कराने के लिए कहने पर केंद्र के अधिकारियों ने अभद्रता की। बाद में पता चला कि ऑपरेशन के दौरान आंत काट दी गई थी।
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इलाज के बजाय परिजनों को इंतजार कराया गया। दिल्ली के अस्पताल में अब तक 40 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं और पीड़िता पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो सकी। पीड़िता ने बताया कि उनके पति अंकित शर्मा दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में नौकरी करते थे, लेकिन मेरे इलाज और परिवार की समस्याओं के कारण उनकी नौकरी छूट गई।
आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार ने आदेश दिया कि पीड़िता को इलाज में खर्च हुए 18.50 लाख रुपये और नवजात की देखभाल के लिए 2 लाख रुपये दिये जाएं। पति का रोजगार छूटने और मानसिक-शारीरिक कष्ट के लिए 3 लाख रुपये, तथा वाद खर्च 10,000 रुपये। इनमें से कुल 5 लाख रुपये का भुगतान द ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, शामली शाखा प्रबंधक द्वारा किया जाएगा।