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Shamli News: एक काॅलेज ऐसा... जिसमें एक छात्रा और एक ही शिक्षक

Fri, 27 Dec 2024 12:08 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Fri, 27 Dec 2024 12:08 AM IST
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A college like this... in which there is only one student and only one teacher
जलालाबाद। भले ही सरकार शिक्षा पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, लोगों को जागरूक कर बच्चों को पढ़ाने की अपील की जा रही हो। मगर शामली के हसनपुर लुहारी गांव में एक ऐसा भी राजकीय इंटर कॉलेज है, जिसमें कागजों में एक छात्रा पढ़ रही है और एक अध्यापक प्रदीप कुमार तैनात हैं। जबकि कॉलेज पर हर समय ताला लटका रहता है।
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डीआईओएस एक छात्र के पढ़ने का दावा कर रहे हैं जबकि अध्यापक और ग्रामीण मना कर रहे हैं। बीते जुलाई माह में शैक्षिक सत्र शुरु होने के बावजूद कॉलेज स्टॉफ व छात्रों की बाट जोह रहा है। गांव के बच्चे शिक्षा के लिए दूसरे कस्बों या गांवों में भटकने को मजबूर हैं।
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हसनपुर लुहारी गांव में वर्ष 2018 में तत्कालीन गन्ना मंत्री सुरेश राणा ने राजकीय इंटर कॉलेज का शिलान्यास किया। कॉलेज निर्माण के लिए करीब चार करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत कराया गया। उस समय कॉलेज निर्माण की जिम्मेदारी अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को दी गई। वर्ष 2023 तक ठेकेदार ने कॉलेज का निर्माण कार्य लगभग पूरा कर लिया। इसके बाद जिलाधिकारी ने कॉलेज का निरीक्षण कर जुलाई 2024 से कॉलेज में शिक्षण सत्र शुरु करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी के निर्देश के बाद अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने माध्यमिक शिक्षा विभाग को कॉलेज हैंडओवर कर दिया। इसके बाद कहने को तो विभाग ने औपचारिक तौर पर कॉलेज में एक शिक्षक की तैनाती भी कर दी। बाद में एक छात्रा का भी दाखिला कागजों में दिखा दिया। लेकिन हैरत की बात है कि इस बात को भी छह महीने बीत चुके हैं लेकिन अब तक न ही कॉलेज में पूरा स्टॉफ पहुंचा है और ना पर्याप्त छात्र-छात्राओ का दाखिला हुआ है। इस कारण आज भी कॉलेज में ताला लगा हुआ है और परिसर के चारों ओर गंदगी व घास जमी है। दूसरी तरफ पिछले दो साल से ग्रामीण कॉलेज में शैक्षिक सत्र शुरु होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। लेकिन यहां शिक्षा सत्र शुरु न होने के कारण उनके बच्चों को दूसरे कस्बों या गाँवों में जाकर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है। इसमें उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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यह बोले अभिभावक

मेरे भतीजों को शिक्षा के लिए 12 किमी दूर चरथावल जाकर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है। जबकि कॉलेज हमारे गांव में बनकर तैयार है। पता नहीं ये कब चलेगा।

--विवेक कुमार, अभिभावक, हसनपुर लुहारी
गांव के बच्चों खासकर बेटियों को शिक्षा के लिए मजबूरी में बाहर जाना पड़ रहा है। इसी समस्या को दूर करने के लिए कॉलेज बनवाया था, लेकिन इसका भी कोई फायदा होता नजर नहीं आ रहा।--सुमित कुमार



जिलाधिकारी के निर्देश के बाद भी प्रशासन गंभीर नहीं हैं। स्कूल में किसी भी छात्र को नहीं पढ़ाया जा रहा। इसका नुकसान ग्रामीणों को उठाना पड़ रहा है।-आर्येश सैनी

कॉलेज में अभी एक छात्रा और शिक्षक ही तैनात हैं। कालेज में छात्र पढ़ने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। जागरूकता अभियान चलाकर छात्रों का एडमिशन कराया जाएगा। प्रयास रहेगा कि जल्द से जल्द अधिक एडमिशन कराए जाए। छात्रा के कागजों में ही पढ़ाई के मामले की जांच कराई जाएगी।
जेएस शाक्य, डीआईओएस शामली
प्रचार प्रसार का अभाव
लोगों का कहना है कि प्रचार-प्रसार नहीं होने के कारण कॉलेज में बंद है। हर समय ताला लगा रहता है। यदि ताला खुलवाया जाए तो छात्र भी एडमिशन के लिए पहुंचेंगे।


फैक्ट फाइल....

जिले में कुल राजकीय इंटर कॉलेजों की संख्या : 22

कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र : करीब तीन हजार

हसनपुर लुहारी का कॉलेज करीब चार बीघा जमीन में है, जिसमें 41 कमरे छात्रों के लिए बनाए गए हैं।

मेरी डयूटी लगी रहती है

काॅलेज में तैनात अध्यापक प्रदीप कुमार का कहना है कि मेरी डयूटी अधिकतर एग्जाम या फिर ट्रेनिंग में लगी रहती है, जिसके कारण कई बार स्कूल पर ताला लगाना पड़ता है। अभी कोई भी छात्र स्कूल में नहीं है।एडमिशन कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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