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‘ज्ञान की कला से चढती जिंदगी की सीढी’
Updated Sat, 21 Apr 2018 12:16 AM IST
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ज्ञान की कला से चढ़ती है जिंदगी की सीढ़ी
कैराना।
देवबंद से आए इस्लामिक विद्वान हजरत मुफ्ती निसार खालिद ने कहा कि ज्ञान की कला मनुष्य की जिंदगी का चढ़ाव है। ज्ञान ऐसा प्राप्त करो कि दुनिया तुम्हारे कदम चूमे।
शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद मदरसा जामिअतुस्सादह में अंजुमन बज्मे रशीद के तत्वावधान में जिले का सबसे बड़ा उर्दू, अरबी, हिंदी व अंग्रेजी भाषा पर सालाना तकरीर मुसाबका (भाषण प्रतियोगिता) हुई। कार्यक्रम के शुभारंभ पर मदरसे के छात्र जुबेर ने इस्लाम धर्म औरतों का पर्दा, मुजफ्फर हुसैन ने माता-पिता के अधिकार और उनकी आज्ञाकारी, महताब ने देवबंद के महत्व, अफजल ने राष्ट्र एकता एवं अखंडता, फरमान ने मदरसों की शुरुआत तथा महत्व पर उर्दू, अरबी, हिंदी व अंग्रेजी भाषा में भाषण पेश किए। देवबंद के आलिम-ए-दीन हजरत मौलाना निसार अहमद कासमी ने कहा कि शिक्षा जीवन की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, इसके बिना जीवन में अंधियारा छाया रहता है। शिक्षित व्यक्ति के पीछे सारी दुनिया फिरती है, जबकि हमारे पास शिक्षा नहीं होगी, तो कोई पूछ नहीं होगी। दीनी शिक्षा से दुनिया और आखिरत में कामयाबी का जरिया बनेगी। आज के आधुनिक युग में हर प्रकार का ज्ञान सीखना और सिखाया जाना चाहिए। मुफ्ती तालिब नदवी ने कहा कि छात्रों ने जिस प्रकार अपनी कला का प्रदर्शन किया, वह अपने आप में किसी मिसाल से कम नहीं है। मदरसा प्रबंध संचालक मौलाना इरफान साकिब कासमी ने कहा कि उनका एक ही उद्देश्य है कि छात्रों को दीनी तालीम में आगे बढ़ें, तो सांसारिक शिक्षा में भी पीछे नहीं रह पाए। मास्टर शादाब, मौलवी फैजान, मुफ्ती इफ्तिखार और महबूब नदवी, मौलाना मोहम्मद उमर, कारी मुस्तकीम, कारी मकसूद, मौलाना इमरान, मुफ्ती परवेज, मौलाना मुअज्जम, हाफिज हुसैन आदि मौजूद रहे।
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कैराना।
देवबंद से आए इस्लामिक विद्वान हजरत मुफ्ती निसार खालिद ने कहा कि ज्ञान की कला मनुष्य की जिंदगी का चढ़ाव है। ज्ञान ऐसा प्राप्त करो कि दुनिया तुम्हारे कदम चूमे।
शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद मदरसा जामिअतुस्सादह में अंजुमन बज्मे रशीद के तत्वावधान में जिले का सबसे बड़ा उर्दू, अरबी, हिंदी व अंग्रेजी भाषा पर सालाना तकरीर मुसाबका (भाषण प्रतियोगिता) हुई। कार्यक्रम के शुभारंभ पर मदरसे के छात्र जुबेर ने इस्लाम धर्म औरतों का पर्दा, मुजफ्फर हुसैन ने माता-पिता के अधिकार और उनकी आज्ञाकारी, महताब ने देवबंद के महत्व, अफजल ने राष्ट्र एकता एवं अखंडता, फरमान ने मदरसों की शुरुआत तथा महत्व पर उर्दू, अरबी, हिंदी व अंग्रेजी भाषा में भाषण पेश किए। देवबंद के आलिम-ए-दीन हजरत मौलाना निसार अहमद कासमी ने कहा कि शिक्षा जीवन की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, इसके बिना जीवन में अंधियारा छाया रहता है। शिक्षित व्यक्ति के पीछे सारी दुनिया फिरती है, जबकि हमारे पास शिक्षा नहीं होगी, तो कोई पूछ नहीं होगी। दीनी शिक्षा से दुनिया और आखिरत में कामयाबी का जरिया बनेगी। आज के आधुनिक युग में हर प्रकार का ज्ञान सीखना और सिखाया जाना चाहिए। मुफ्ती तालिब नदवी ने कहा कि छात्रों ने जिस प्रकार अपनी कला का प्रदर्शन किया, वह अपने आप में किसी मिसाल से कम नहीं है। मदरसा प्रबंध संचालक मौलाना इरफान साकिब कासमी ने कहा कि उनका एक ही उद्देश्य है कि छात्रों को दीनी तालीम में आगे बढ़ें, तो सांसारिक शिक्षा में भी पीछे नहीं रह पाए। मास्टर शादाब, मौलवी फैजान, मुफ्ती इफ्तिखार और महबूब नदवी, मौलाना मोहम्मद उमर, कारी मुस्तकीम, कारी मकसूद, मौलाना इमरान, मुफ्ती परवेज, मौलाना मुअज्जम, हाफिज हुसैन आदि मौजूद रहे।
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