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प्रसव केंद्रों पर नौनिहाल की जिंदगी के साथ खिलवाड़

Sun, 01 Oct 2017 12:11 AM IST
Updated Sun, 01 Oct 2017 12:11 AM IST
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प्रसव केंद्रों पर नौनिहाल की जिंदगी के साथ खिलवाड़
शामली।
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नवजात के स्वास्थ्य की जांच के लिए सरकारी प्रसव केंद्रों पर पैदा होते ही बच्चे का वजन लिया जाता है। बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में सही जानकारी मिल सके और इसी आधार पर बच्चे की देखभाल और इलाज किया जाए। हालांकि स्वास्थ्य महकमा बच्चों के उपचार के दौरान ही लापरवाही बरत रहा है। इसका खुलासा एचबीएनसी ने स्वास्थ्य विभाग को सौंपी रिपोर्ट में किया है।
शामली जिले में शामली, कैराना, कांधला, ऊन, थानाभवन, कुड़ाना और चौसाना में प्रसव केंद्र है, जहां पर महिलाओं की डिलीवरी कराई जाती है। केंद्रों पर सरकार द्वारा बच्चों का वजन तौलने के लिए मशीनें भी दी गई है, ताकि स्टाफ नर्स इन मशीनों पर बच्चों का वजन तौल सके। इसके बाद स्टाफ नर्स को यह वजन अपने रजिस्टर में दर्ज करना होता है और उसके आधार नवजात को इलाज दिया जाता है, लेकिन शामली जिले में प्रसव केंद्रों पर स्टाफ नर्स द्वारा लिए जा रहे बच्चों के वजन में पांच सौ ग्राम तक का अंतर सामने आया है। यूनिसेफ द्वारा होम बेस्ड न्यू बोर्न केयर कार्यक्रम के माध्यम से इस वजन का सत्यापन कराया तो यह चौंकाने वाली बातें सामने आई है। एचएनबीसी के अधिकारी एमएल शर्मा द्वारा कार्यक्रम के नोडल को रिपोर्ट भेजी गई है।
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97 प्रतिशत से अधिक केसों में पाया गया अंतर
यूनिसेफ के एचबीएनसी कार्यक्रम के रीजनल कोआर्डिनेटर के अनुसार अब तक सौ के करीब बच्चों के वजन का सत्यापन किया है, जिनमें से 98 प्रतिशत के करीब बच्चों के वजन में अंतर पाया गया है। महीने में एक बार एक प्रसव केंद्र पर बच्चों के वजन का सत्यापन करना होता है।
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वजन सहीं नहीं लेने के ये हैं नुकसान
डाक्टरों के अनुसार यदि बच्चा दो किलो से कम का होता है, तो उसके इलाज के लिए सिक न्यू बोर्न केयर युनिट पर भेजना पड़ता है, जहां पर उसको इलाज दिया जाता है, इसके साथ ही यदि बच्चा ढाई किलो से कम होता है तो उसकी अधिक देखभाल करनी पड़ती है। इसी वजन के आधार पर बच्चा कुपोषित है या फिर पोषित इसका पता चलता है। यदि वजन लेने में लापरवाही बरती जाती है तो बच्चे का जीवन खतरे में पड़ जाता है।
कहीं मशीन शराब तो कहीं लापरवाही
टीम द्वारा जब प्रसव केंद्रों पर जाकर सत्यापन किया गया, तो पता चला कि कही मशीन खराब है जो वजन सही नहीं दे रही है। इसके अलावा ज्यादातर जगह स्टाफ नर्स की लापरवाही सामने आई है। स्टाफ नर्स बच्चे का वजन गंभीरता से नहीं लेती, जिस कारण वजन में अंतर आ रहा है।


मामला संज्ञान में आया है, इसके लिए प्रसव केंद्रों पर वेट लेने के लिए इलेक्ट्रॉनिक मशीनें मुहैया कराई जा रही है, साथ ही चिकित्साधीक्षकों को हिदायत दी जा रही है कि बच्चे के वजन लेने में किसी प्रकार की लापरवाही ना बरती जाए
-डाक्टर राजकुमार
सीएमओ
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