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40 हजार किसानों की सम्मान निधि फंसी
Mon, 17 Jun 2019 12:06 AM IST
Deepak Sharma
शामली/अमर उजाला/ब्यूरो
शामली/अमर उजाला/ब्यूरो
Published by: Deepak Sharma
Updated Mon, 17 Jun 2019 12:06 AM IST
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शामली। जिले के 40 हजार किसानों की सम्मान निधि नाम के फेर में फंस गई है। जिले में सम्मान निधि के पात्र मिले 1.01 लाख किसानों में 40 हजार 393 किसानों के नाम उनके बैंक खातों से मेल नहीं खाए हैं। केंद्र सरकार की जांच में ये मामला पकड़ में आया है। कृषि निदेशालय न सूची वापस भेजकर उक्त किसानों का पुन: सत्यापन करने को कहा है। कृषि विभाग इस काम मेें जुट गया है।
केंद्र सरकार ने लघु और सीमांत किसानों को छह हजार रुपये सालाना प्रधानमंत्री सम्मान निधि देने की घोषणा की थी। इनके लिए एक निर्धारित गाइड लाइन तय की थी। जिले में लेेखपाल और राजस्व विभाग की टीमों ने किसानों के यहां घर घर जाकर सत्यापन किया। इसमें एक लाख एक हजार किसान निधि की पात्रता में खरे उतरे थे। कृषि विभाग ने उक्त किसानों का डाटा विभाग की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया था। जिसके बाद 30 हजार 262 किसानों के बैंक खाते में पहली किस्त के रुप में दो दो हजार रुपये भी आ गए थे। 26 हजार 122 किसानों को दूसरी किस्त भी मिल गई थी। इस बीच चुुनाव आचार कृषि विभाग ने अपनी वेबसाइट बंद कर दी। जिसके चलते बाकी किसानों की सम्मान निधि की किस्त रुक गई।
चुनाव आचार संहिता खत्म होते ही किसान अपनी सम्मान निधि की किस्त के लिए कृषि विभाग के दफ्तर पहुंचने लगे। 10 जून को विभाग ने अपनी वेबसाइट खोली तो किसानों को उम्मीद जगी। लगा कि उनकी किस्त जल्द आ जाएगी, लेकिन विभाग ने 40 हजार 439 किसानों की लिस्ट भेजते हुए बताया कि उक्त किसानों के नाम केंद्र सरकार द्वारा बैंकों के डाटा से मेल नहीं कर रहे।
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विभाग द्वारा फीड किए गए किसानों के नाम और उनके बैंक खातों में दर्ज नाम अलग हैं। लिहाजा इन किसानों के खातों में सम्मान निधि की रकम भेजना संभव नहीं हुआ। अब उक्त किसानों के नाम उनके बैंक खातों से मैच करके दोबारा भेजने को कहा गया है। लेखपालों को इस काम में लगा दिया गया है। ये लोग किसानों के घर जाकर मिल रहे हैं और उनके बैंकों की पास बुक आदि से बैंकों में उनके नाम आदि की त्रुटियां कराई जा रही हैं।
नाम मेल नहीं होने की ये रही वजह
विभागीय अधिकारियों के अनुसार उदाहरण के तौर पर कुछ जैसे राजेंद्र, महेंद्र आदि किसानों के नाम हैं। जबकि बैंक खाते में उनका राम राजेंद्र सिंह या महेंद्र चौधरी आदि लिखा है। जैसे किसी का नाम कृष्णपाल है, लेकिन बैंक खाते किशनपाल हो रहा है। कुछ किसानों का नाम फिडिंग में राकेश है, जबकि बैंक खाते में राकेश कुमार हो रहा है। इसके अलावा भी डाटा फीडिंग और बैंक खाते के नाम में स्पेलिंग का फर्क होने की वजह से मेल नहीं हो सके हैं।
ऐसे ठीक किए जा रहे नाम
क्रेंद सरकार द्वारा भेजा गया किसानों का डाटा की एक्सल फाइल संबंधित बैंकों को मेल से भेजी गई है। बैंक द्वारा जब अपने रिकार्ड से चेक किया गया तो पता चला कि डाटा में दर्ज नाम और बैंक में दर्ज नाम की स्पेलिंग में गलती है। बैंक अब अपने यहां दर्ज किसानों के नाम की एक्सल फाइल विभाग को भेजकर बता रहे हैं कि उनके यहां किसान का ये नाम दर्ज है। इसके बाद कृषि विभाग द्वारा बैंक के डाटा में दी गई स्पेलिंग के अनुसार किसान का नाम रिकार्ड में ठीक कर रहे हैं। ये काम तेजी से चल रहा है।
कोट
केंद्र सरकार द्वारा भेजा गया 40393 किसानों का डाटा बैंकों को भेजा गया है। इसमें अधिकांश में स्पेलिंग मिस्टेक है। बैंकों द्वारा बैंक खाते में दर्ज किसान के नाम की रिपोर्ट भेजी जा रही है। उसी के आधार पर रिकार्ड में किसान का नाम की स्पेलिंग ठीक करने का काम तेजी से चल रहा है। अधिकांश किसानों के नाम ठीक हो गए हैं। - डॉक्टर हरीश शंकर जिला कृषि अधिकारी
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केंद्र सरकार ने लघु और सीमांत किसानों को छह हजार रुपये सालाना प्रधानमंत्री सम्मान निधि देने की घोषणा की थी। इनके लिए एक निर्धारित गाइड लाइन तय की थी। जिले में लेेखपाल और राजस्व विभाग की टीमों ने किसानों के यहां घर घर जाकर सत्यापन किया। इसमें एक लाख एक हजार किसान निधि की पात्रता में खरे उतरे थे। कृषि विभाग ने उक्त किसानों का डाटा विभाग की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया था। जिसके बाद 30 हजार 262 किसानों के बैंक खाते में पहली किस्त के रुप में दो दो हजार रुपये भी आ गए थे। 26 हजार 122 किसानों को दूसरी किस्त भी मिल गई थी। इस बीच चुुनाव आचार कृषि विभाग ने अपनी वेबसाइट बंद कर दी। जिसके चलते बाकी किसानों की सम्मान निधि की किस्त रुक गई।
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चुनाव आचार संहिता खत्म होते ही किसान अपनी सम्मान निधि की किस्त के लिए कृषि विभाग के दफ्तर पहुंचने लगे। 10 जून को विभाग ने अपनी वेबसाइट खोली तो किसानों को उम्मीद जगी। लगा कि उनकी किस्त जल्द आ जाएगी, लेकिन विभाग ने 40 हजार 439 किसानों की लिस्ट भेजते हुए बताया कि उक्त किसानों के नाम केंद्र सरकार द्वारा बैंकों के डाटा से मेल नहीं कर रहे।
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विभाग द्वारा फीड किए गए किसानों के नाम और उनके बैंक खातों में दर्ज नाम अलग हैं। लिहाजा इन किसानों के खातों में सम्मान निधि की रकम भेजना संभव नहीं हुआ। अब उक्त किसानों के नाम उनके बैंक खातों से मैच करके दोबारा भेजने को कहा गया है। लेखपालों को इस काम में लगा दिया गया है। ये लोग किसानों के घर जाकर मिल रहे हैं और उनके बैंकों की पास बुक आदि से बैंकों में उनके नाम आदि की त्रुटियां कराई जा रही हैं।
नाम मेल नहीं होने की ये रही वजह
विभागीय अधिकारियों के अनुसार उदाहरण के तौर पर कुछ जैसे राजेंद्र, महेंद्र आदि किसानों के नाम हैं। जबकि बैंक खाते में उनका राम राजेंद्र सिंह या महेंद्र चौधरी आदि लिखा है। जैसे किसी का नाम कृष्णपाल है, लेकिन बैंक खाते किशनपाल हो रहा है। कुछ किसानों का नाम फिडिंग में राकेश है, जबकि बैंक खाते में राकेश कुमार हो रहा है। इसके अलावा भी डाटा फीडिंग और बैंक खाते के नाम में स्पेलिंग का फर्क होने की वजह से मेल नहीं हो सके हैं।
ऐसे ठीक किए जा रहे नाम
क्रेंद सरकार द्वारा भेजा गया किसानों का डाटा की एक्सल फाइल संबंधित बैंकों को मेल से भेजी गई है। बैंक द्वारा जब अपने रिकार्ड से चेक किया गया तो पता चला कि डाटा में दर्ज नाम और बैंक में दर्ज नाम की स्पेलिंग में गलती है। बैंक अब अपने यहां दर्ज किसानों के नाम की एक्सल फाइल विभाग को भेजकर बता रहे हैं कि उनके यहां किसान का ये नाम दर्ज है। इसके बाद कृषि विभाग द्वारा बैंक के डाटा में दी गई स्पेलिंग के अनुसार किसान का नाम रिकार्ड में ठीक कर रहे हैं। ये काम तेजी से चल रहा है।
कोट
केंद्र सरकार द्वारा भेजा गया 40393 किसानों का डाटा बैंकों को भेजा गया है। इसमें अधिकांश में स्पेलिंग मिस्टेक है। बैंकों द्वारा बैंक खाते में दर्ज किसान के नाम की रिपोर्ट भेजी जा रही है। उसी के आधार पर रिकार्ड में किसान का नाम की स्पेलिंग ठीक करने का काम तेजी से चल रहा है। अधिकांश किसानों के नाम ठीक हो गए हैं। - डॉक्टर हरीश शंकर जिला कृषि अधिकारी