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तीन साल में 40 करोड़ के मालिक बने स्वयं सहायता समूह
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गिरिराज सिंह
शामली। 2014-15 में मामूली पूंजी और बहुत कम संख्या से शुरू किए गए स्वयं सहायता समूहों ने नई ऊंचाइयां छू ली हैं। जिले के समूहों को बीते तीन वर्षों में लगभग 40 करोड़ रुपये की पूंजी अर्जित कर ली है। स्वयं की मेहनत और सरकारी मदद से समूहों से जुड़ी महिलाओं ने विभिन्न कार्यों में शानदार सफलता पाई है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में वर्तमान में 4255 स्वयं सहायता समूह संचालित हैं और इनसे 46 हजार 522 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। एक समूह में दस से 12 महिलाएं शामिल हैं। जनपद में 2014-15 में पहली बार समूहों का गठन हुआ था और तब पूरे वर्ष में 226 समूहों का गठन कर 2567 महिलाओं को जोड़ा गया था। तब महिलाओं के पास पूंजी भी बहुत कम थी लेकिन समूह तरक्की करते गए और सरकार ने भी उनकी मदद की। बीते तीन वर्षों में ही समूहों को 40 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
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स्थानीय उत्पादों से दी बाहर के सामान को टक्कर
शामली। जिले के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने स्थानीय उत्पादों से बाहर के सामानों को टक्कर दी।
जन्माष्टमी के अवसर पर भैंसवाल और मारूखेड़ी समूह से जुड़ी महिलाओं ने ठाकुर जी के कपड़े, पालने तैयार किए। इनके बनाए परिधानों की सप्लाई पानीपत, मेरठ और दिल्ली हुई। परिधान बनाने वाले समूह ने कुछ ही दिन में 15 से 20 हजार रुपये की बचत की। गांव हिंगोखेड़ी की अनीता के द्वारा बनाए गए बैग की भी काफी मांग रहती है। बैग काफी मजबूत होते हैं। गांव खोड़समा के सखी स्वयं सहायता समूह तथा बुच्चाखेड़ी में बनाए गए हैंडीक्राफ्ट सामान की भी सप्लाई आसपास के जिलों को होती है। समूह से जुड़ी महिलाएं बताती हैं कि उन्हें बाजार को लेकर दिक्कत नहीं आती। उनके उत्पाद अच्छे रहते हैं इसलिए उनकी मांग रहती है।
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यूनिफार्म से कमाए 71 लाख से ज्यादा
शामली। जिले के 90 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 420 महिलाओं ने परिषदीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं के लिए यूनिफार्म तैयार की। इन समूहों को लगभग 71 लाख से ज्यादा कमी कमाई हुई। इसके अलावा क्रॉकरी बनाने, कुम्हारी कला आदि कार्यों से जुड़ी समूह की महिला को प्रतिमाह औसतन 12 से 15 हजार रुपये की आय होती है।
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राशन और पोषाहार का वितरण कर रहीं महिलाएं
शामली। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं राशन और पोषाहार का वितरण भी कर रहीं हैं। जिले राशन की छह दुकानों का आवंटन समूहों को हो गया है और तीन का प्रक्रिया में है। इसके साथ ही 343 स्वयं सहायता समूहों ने 985 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार का वितरण भी इस माह किया है। अब 112 गांवों में बने सामुदायिक शौचालयों की देखरेख एवं संचालन की जिम्मेदारी भी समूह की महिलाओं को दी जा रही है।
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कोट...
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहीं हैं। उन्हें सुविधाएं एवं उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार उपलब्ध कराया जाता है। बीती दिवाली पर जिला स्तर पर उत्पादों का मेला भी लगा था। समूह से जुड़ी प्रत्येक महिला की आय औसतन 12 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह है। - शैलेन व्यास, डीसी, एनआरएलएम।
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शामली। 2014-15 में मामूली पूंजी और बहुत कम संख्या से शुरू किए गए स्वयं सहायता समूहों ने नई ऊंचाइयां छू ली हैं। जिले के समूहों को बीते तीन वर्षों में लगभग 40 करोड़ रुपये की पूंजी अर्जित कर ली है। स्वयं की मेहनत और सरकारी मदद से समूहों से जुड़ी महिलाओं ने विभिन्न कार्यों में शानदार सफलता पाई है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में वर्तमान में 4255 स्वयं सहायता समूह संचालित हैं और इनसे 46 हजार 522 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। एक समूह में दस से 12 महिलाएं शामिल हैं। जनपद में 2014-15 में पहली बार समूहों का गठन हुआ था और तब पूरे वर्ष में 226 समूहों का गठन कर 2567 महिलाओं को जोड़ा गया था। तब महिलाओं के पास पूंजी भी बहुत कम थी लेकिन समूह तरक्की करते गए और सरकार ने भी उनकी मदद की। बीते तीन वर्षों में ही समूहों को 40 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
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स्थानीय उत्पादों से दी बाहर के सामान को टक्कर
शामली। जिले के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने स्थानीय उत्पादों से बाहर के सामानों को टक्कर दी।
जन्माष्टमी के अवसर पर भैंसवाल और मारूखेड़ी समूह से जुड़ी महिलाओं ने ठाकुर जी के कपड़े, पालने तैयार किए। इनके बनाए परिधानों की सप्लाई पानीपत, मेरठ और दिल्ली हुई। परिधान बनाने वाले समूह ने कुछ ही दिन में 15 से 20 हजार रुपये की बचत की। गांव हिंगोखेड़ी की अनीता के द्वारा बनाए गए बैग की भी काफी मांग रहती है। बैग काफी मजबूत होते हैं। गांव खोड़समा के सखी स्वयं सहायता समूह तथा बुच्चाखेड़ी में बनाए गए हैंडीक्राफ्ट सामान की भी सप्लाई आसपास के जिलों को होती है। समूह से जुड़ी महिलाएं बताती हैं कि उन्हें बाजार को लेकर दिक्कत नहीं आती। उनके उत्पाद अच्छे रहते हैं इसलिए उनकी मांग रहती है।
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यूनिफार्म से कमाए 71 लाख से ज्यादा
शामली। जिले के 90 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 420 महिलाओं ने परिषदीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं के लिए यूनिफार्म तैयार की। इन समूहों को लगभग 71 लाख से ज्यादा कमी कमाई हुई। इसके अलावा क्रॉकरी बनाने, कुम्हारी कला आदि कार्यों से जुड़ी समूह की महिला को प्रतिमाह औसतन 12 से 15 हजार रुपये की आय होती है।
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राशन और पोषाहार का वितरण कर रहीं महिलाएं
शामली। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं राशन और पोषाहार का वितरण भी कर रहीं हैं। जिले राशन की छह दुकानों का आवंटन समूहों को हो गया है और तीन का प्रक्रिया में है। इसके साथ ही 343 स्वयं सहायता समूहों ने 985 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार का वितरण भी इस माह किया है। अब 112 गांवों में बने सामुदायिक शौचालयों की देखरेख एवं संचालन की जिम्मेदारी भी समूह की महिलाओं को दी जा रही है।
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कोट...
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहीं हैं। उन्हें सुविधाएं एवं उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार उपलब्ध कराया जाता है। बीती दिवाली पर जिला स्तर पर उत्पादों का मेला भी लगा था। समूह से जुड़ी प्रत्येक महिला की आय औसतन 12 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह है। - शैलेन व्यास, डीसी, एनआरएलएम।