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शिव धनुष के टूटते ही जनकपुरी में छाई गई खुशियां
Updated Sat, 23 Sep 2017 12:27 AM IST
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शिव धनुष के टूटते ही जनकपुरी में छाईं खुशियां
शामली। भगवान श्रीराम के शिव धनुष को भंग करते ही जनकपुरी में खुशी की लहर दौड़ गई। चारों तरफ मंगल गीत गाए जाने लगे। सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डालकर उन्हें अपना वर चुना। इस दौरान परशुराम व लक्ष्मण के बीच हुए संवाद को देखने के लिए भारी संख्या में रामलीला में आए लोगों में उत्साह बना रहा।
शहर के मंदिर हनुमान टीला हनुमान धाम पर चल रहे रामलीला महोत्सव में शुक्रवार की रात धनुष यज्ञ लीला का मंचन किया गया। लीला में दिखाया गया कि राजा जनक द्वारा अपनी पुत्री सीता के स्वयंवर का आयोजन किया गया है। स्वयंवर में विभिन्न देशों के राजा भी भाग लेते हैं। स्वयंवर में राजा जनक द्वारा शिव धनुष को तोड़ने पर ही सीता का विवाह करने की घोषणा की गई। सभी राजाओं के विफल होने पर राजा जनक चिंतित हो जाते हैं। सभा में मौजूद ऋषि विश्वामित्र श्रीराम को धनुष तोड़ने की आज्ञा देते हैं। गुरु की आज्ञा पाकर श्रीराम पल भर में धनुष को तोड़ देते है। धनुष के टूटते ही राजा जनक सहित पूरी जनकपुरी में खुशी की लहर दौड़ जाती है तथा मंगल गीत गाए जाने लगते हैं। बाद में सीताजी श्रीराम को वरमाला पहनाकर उन्हें अपना वर चुन लेती हैं। उधर, एसपी डा. अजयपाल शर्मा ने भी रामलीला महोत्सव में पहुंचकर भगवान श्रीराम, परशुराम की आरती की। इस अवसर पर मंदिर के प्रधान सलिल द्विवेदी, राजकुमार मित्तल, दिनेश पाठक, उत्तम नामदेव, रवि पाठक, ब्रिजेश वशिष्ठ, निशांत पाठक आदि भी मौजूद रहे।
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शामली। भगवान श्रीराम के शिव धनुष को भंग करते ही जनकपुरी में खुशी की लहर दौड़ गई। चारों तरफ मंगल गीत गाए जाने लगे। सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डालकर उन्हें अपना वर चुना। इस दौरान परशुराम व लक्ष्मण के बीच हुए संवाद को देखने के लिए भारी संख्या में रामलीला में आए लोगों में उत्साह बना रहा।
शहर के मंदिर हनुमान टीला हनुमान धाम पर चल रहे रामलीला महोत्सव में शुक्रवार की रात धनुष यज्ञ लीला का मंचन किया गया। लीला में दिखाया गया कि राजा जनक द्वारा अपनी पुत्री सीता के स्वयंवर का आयोजन किया गया है। स्वयंवर में विभिन्न देशों के राजा भी भाग लेते हैं। स्वयंवर में राजा जनक द्वारा शिव धनुष को तोड़ने पर ही सीता का विवाह करने की घोषणा की गई। सभी राजाओं के विफल होने पर राजा जनक चिंतित हो जाते हैं। सभा में मौजूद ऋषि विश्वामित्र श्रीराम को धनुष तोड़ने की आज्ञा देते हैं। गुरु की आज्ञा पाकर श्रीराम पल भर में धनुष को तोड़ देते है। धनुष के टूटते ही राजा जनक सहित पूरी जनकपुरी में खुशी की लहर दौड़ जाती है तथा मंगल गीत गाए जाने लगते हैं। बाद में सीताजी श्रीराम को वरमाला पहनाकर उन्हें अपना वर चुन लेती हैं। उधर, एसपी डा. अजयपाल शर्मा ने भी रामलीला महोत्सव में पहुंचकर भगवान श्रीराम, परशुराम की आरती की। इस अवसर पर मंदिर के प्रधान सलिल द्विवेदी, राजकुमार मित्तल, दिनेश पाठक, उत्तम नामदेव, रवि पाठक, ब्रिजेश वशिष्ठ, निशांत पाठक आदि भी मौजूद रहे।
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