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बैंक अफसरों की गलती से उद्यमी पर ब्याज का बोझ
Updated Sun, 24 Jun 2018 12:30 AM IST
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बैंक अफसरों की गलती से उद्यमी पर ब्याज का बोझ
शामली। दो बैंक अधिकारियों की गलती से उद्यमी पर ब्याज का बोझ पड़ गया। स्थानांतरित होने के बावजूद एक ही खाते पर दोनों बैंक शाखाओं ने ब्याज लगा दिया। उद्यमी ने कई बार पत्राचार किया और बैंक अधिकारियों से मुलाकात की, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। अब उद्यमी ने जिलाधिकारी को शिकायत पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।
शामली इंडस्ट्री एरिया में आदिनाथ इंडस्ट्री के मालिक अभिषेक जैन और अशोक जैन ने शनिवार को कलक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला उद्योग बंधु की बैठक में जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह को शिकायत पत्र दिया। उसमें बताया कि उनकी फर्म की सीसी लिमिट और टर्म लोन कारपोरेशन बैंक शाखा में था। जिसे 2017 में एचडीएफसी बैंक में स्थानांतरित कराया गया था। एचडीएफसी बैंक की तरफ से पे ऑर्डर बनवाकर कारपोरेशन बैंक में भिजवा दिए और ब्याज लगाना आरंभ कर दिया। वहीं, कारपोरेशन बैंक अफसरों ने चेक प्राप्त होने के बावजूद उसे खाते में जमा नहीं किया और उसी रकम पर ब्याज लगाते रहे। करीब दो महीने तक उस पर दोनों बैंक शाखाओं ने ब्याज लगा दिया, जो करीब 65 हजार रुपये बना। इस बारे में कारपोरेशन बैंक और एचडीएफसी बैंक अफसरों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने लीड बैंक मैनेजर को इस मामले में कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
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शामली। दो बैंक अधिकारियों की गलती से उद्यमी पर ब्याज का बोझ पड़ गया। स्थानांतरित होने के बावजूद एक ही खाते पर दोनों बैंक शाखाओं ने ब्याज लगा दिया। उद्यमी ने कई बार पत्राचार किया और बैंक अधिकारियों से मुलाकात की, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। अब उद्यमी ने जिलाधिकारी को शिकायत पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।
शामली इंडस्ट्री एरिया में आदिनाथ इंडस्ट्री के मालिक अभिषेक जैन और अशोक जैन ने शनिवार को कलक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला उद्योग बंधु की बैठक में जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह को शिकायत पत्र दिया। उसमें बताया कि उनकी फर्म की सीसी लिमिट और टर्म लोन कारपोरेशन बैंक शाखा में था। जिसे 2017 में एचडीएफसी बैंक में स्थानांतरित कराया गया था। एचडीएफसी बैंक की तरफ से पे ऑर्डर बनवाकर कारपोरेशन बैंक में भिजवा दिए और ब्याज लगाना आरंभ कर दिया। वहीं, कारपोरेशन बैंक अफसरों ने चेक प्राप्त होने के बावजूद उसे खाते में जमा नहीं किया और उसी रकम पर ब्याज लगाते रहे। करीब दो महीने तक उस पर दोनों बैंक शाखाओं ने ब्याज लगा दिया, जो करीब 65 हजार रुपये बना। इस बारे में कारपोरेशन बैंक और एचडीएफसी बैंक अफसरों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने लीड बैंक मैनेजर को इस मामले में कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
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