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भूखे पेट अस्पताल में बैठी रही महिलाएं, नसबंदी करने नहीं आई टीम
Updated Wed, 10 Jan 2018 12:09 AM IST
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झिंझाना।
सरकारी महकमे का बुरा हाल है। परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत लगाए जाने वाले नसबंदी शिविर में आई 32 महिलाएं सुबह नौ बजे से लेकर दोपहर तीन बजे तक अस्पताल में बैठी रहीं, लेकिन नसबंदी करने के लिए शामली से कोई टीम नहीं पहुंची। इस पर महिलाओं ने हंगामा शुरू कर दिया। बाद में महिलाओं को उनके घरों तक भिजवाया गया।
मंगलवार को सीएचसी झिंझाना में महिलाओं की नसबंदी कराने के लिए शिविर लगाया गया था। शिविर में नसबंदी कराने के लिए क्षेत्र के गांव दथैड़ा, श्यामली श्यामला, गढ़ी हसनपुर, अहमदगढ, गागोर, पांथुपुरा, टोडा, हथछौया, सूबरी, नाईनंगला,बझेडी, लब्बादाउदपुर आदि गांवों से 33 महिलाओें को आशा कार्यकर्ता नसबंदी शिविर में लेकर आई थीं। इसमें महिलाओं को नसबंदी कराने से पूर्व खाली पेट रहना होता है। महिलाओं का कहना है कि वह सुबह सात बजे खाली पेट नौ बजे झिंझाना सीएचसी में आ गई थीं। 12 बजे तक सभी का रजिस्ट्रेशन किया गया। सीएचसी पर मौजूद चिकित्सकों ने बताया की आपरेशन करने वाली चिकित्सकों की टीम तीन बजे आएगी, लेकिन शाम चार बजे तक टीम नहीं आई। बाद में स्टाफ ने बताया कि टीम नहीं आ रही है। इस पर सुबह से भूखी बैठी रही महिलाओं में रोष व्याप्त हो गया। महिलाओं का कहना था कि पूरे दिन खाली पेट साथ में छोटे-छोटे बच्चों का साथ उसके अलावा सीएचसी से 25 किलोमीटर दूर इस सर्दी में घर कैसे जाएंगी। गांवों में जाने के साधन भी नहीं है। इस पर महिलाओं ने जमकर हंगामा किया। इस दौरान चिकित्साधीक्षक डाक्टर तरुण चौधरी ने महिलाओं को शामली अस्पताल में भेजने की बात कही, लेकिन महिलाओं ने विरोध कर दिया। उनका कहना है कि सुबह से भूखे प्यासे शामली जाकर कोई फायदा नहीं होने वाला है। डाक्टर तरुण चौधरी ने बताया की सभी महिलाओं को एंबुलेंस से उनके घर भिजवा दिया गया। इस दौरान बेबी, सीमा, पूनम, कविता, ममतेश, गुड्डी नीलम, लक्ष्मी, पूजा, गीता आदि महिलाएं मौजूद रही।
आशाओं ने भी जताई नाराजगी
नसंबदी के लिए महिलाओं को प्रेरित कर सीएचसी तक लेकर आने वाली आशा महिलाओं का आरोप है कि बड़ी मुश्किल से महिलाओं को नसबंदी के लिये तैयार किया गया था। पूरे दिन सीएचसी में भूखे पेट महिलाएं बैठी रहीं। साथ में छोटे बच्चों के अलावा एक महिला के साथ दो तीमारदार भी आए हैं। अब शाम को नसबंदी नहीं होने की बात कहने से सभी में रोष है। इस दौरान बबीता, रश्मी, बाला, पूनम, बेबी,रेखा, जमीला, लीलावती, रेखा आदि आशा मौजूद रही।
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शामली अस्पताल से डाक्टरों की टीम आनी थी, लेकिन नहीं आई। इस संबंध में रिपोर्ट सीएमओ को भेजी जाएगी
-डाक्टर तरुण चौधरी
प्रभारी सीएचसी
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सरकारी महकमे का बुरा हाल है। परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत लगाए जाने वाले नसबंदी शिविर में आई 32 महिलाएं सुबह नौ बजे से लेकर दोपहर तीन बजे तक अस्पताल में बैठी रहीं, लेकिन नसबंदी करने के लिए शामली से कोई टीम नहीं पहुंची। इस पर महिलाओं ने हंगामा शुरू कर दिया। बाद में महिलाओं को उनके घरों तक भिजवाया गया।
मंगलवार को सीएचसी झिंझाना में महिलाओं की नसबंदी कराने के लिए शिविर लगाया गया था। शिविर में नसबंदी कराने के लिए क्षेत्र के गांव दथैड़ा, श्यामली श्यामला, गढ़ी हसनपुर, अहमदगढ, गागोर, पांथुपुरा, टोडा, हथछौया, सूबरी, नाईनंगला,बझेडी, लब्बादाउदपुर आदि गांवों से 33 महिलाओें को आशा कार्यकर्ता नसबंदी शिविर में लेकर आई थीं। इसमें महिलाओं को नसबंदी कराने से पूर्व खाली पेट रहना होता है। महिलाओं का कहना है कि वह सुबह सात बजे खाली पेट नौ बजे झिंझाना सीएचसी में आ गई थीं। 12 बजे तक सभी का रजिस्ट्रेशन किया गया। सीएचसी पर मौजूद चिकित्सकों ने बताया की आपरेशन करने वाली चिकित्सकों की टीम तीन बजे आएगी, लेकिन शाम चार बजे तक टीम नहीं आई। बाद में स्टाफ ने बताया कि टीम नहीं आ रही है। इस पर सुबह से भूखी बैठी रही महिलाओं में रोष व्याप्त हो गया। महिलाओं का कहना था कि पूरे दिन खाली पेट साथ में छोटे-छोटे बच्चों का साथ उसके अलावा सीएचसी से 25 किलोमीटर दूर इस सर्दी में घर कैसे जाएंगी। गांवों में जाने के साधन भी नहीं है। इस पर महिलाओं ने जमकर हंगामा किया। इस दौरान चिकित्साधीक्षक डाक्टर तरुण चौधरी ने महिलाओं को शामली अस्पताल में भेजने की बात कही, लेकिन महिलाओं ने विरोध कर दिया। उनका कहना है कि सुबह से भूखे प्यासे शामली जाकर कोई फायदा नहीं होने वाला है। डाक्टर तरुण चौधरी ने बताया की सभी महिलाओं को एंबुलेंस से उनके घर भिजवा दिया गया। इस दौरान बेबी, सीमा, पूनम, कविता, ममतेश, गुड्डी नीलम, लक्ष्मी, पूजा, गीता आदि महिलाएं मौजूद रही।
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आशाओं ने भी जताई नाराजगी
नसंबदी के लिए महिलाओं को प्रेरित कर सीएचसी तक लेकर आने वाली आशा महिलाओं का आरोप है कि बड़ी मुश्किल से महिलाओं को नसबंदी के लिये तैयार किया गया था। पूरे दिन सीएचसी में भूखे पेट महिलाएं बैठी रहीं। साथ में छोटे बच्चों के अलावा एक महिला के साथ दो तीमारदार भी आए हैं। अब शाम को नसबंदी नहीं होने की बात कहने से सभी में रोष है। इस दौरान बबीता, रश्मी, बाला, पूनम, बेबी,रेखा, जमीला, लीलावती, रेखा आदि आशा मौजूद रही।
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शामली अस्पताल से डाक्टरों की टीम आनी थी, लेकिन नहीं आई। इस संबंध में रिपोर्ट सीएमओ को भेजी जाएगी
-डाक्टर तरुण चौधरी
प्रभारी सीएचसी