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शहर से गांव तक झोलाछाप डाक्टरों की भरमार
Updated Sat, 09 Sep 2017 12:44 AM IST
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शामली।
शहर से लेकर गांवों तक झोलाछाप डाक्टरों की भरमार है। जो प्राइवेट अस्पतालों में बिना डिग्री और अनुभव के आपरेशन कर रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग देखकर भी अंजान बने बैठा हुआ है।
स्वास्थ्य को लेकर सरकार बेहद गंभीर है। प्राइवेट अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन कराकर उन पर नकेल कसने के आदेश हैं। यही नहीं सरकारी अस्पतालों में भी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। शामली में कई अस्पताल तथा जिले में गांवों से लेकर कस्बों तक झोलाछाप डॉक्टर क्लीनिक खोलकर बैठे हैं। जिन्हें मेडिकल की एबीसीडी तक नहीं पता। ये लोग मरीजों को अपने चंगुल में फंसाकर उनका इलाज करते हैं। जिसके चलते कई लोगों की हालत ओर गंभीर हो जाती है। जबकि इस दौरान मौत भी हो जाती है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती है।
रजिस्टर्ड हैं कुल 87
शामली जिले में कुल 87 अस्पताल और क्लीनिक रजिस्टर्ड हैं। जिनमें 35 अस्पताल तथा 52 क्लीनिक हैं। इसके अलावा पूरे जिले में करीब 30 अल्ट्रासाउंड सेंटर और मात्र आठ पैथोलॉजी लैब रजिस्टर्ड हैं। जबकि जिले में सौ अधिक अस्पताल तथा सैकड़ों क्लीनिक चल रहे हैं। इसके अलावा 13 पैथोलॉजी लैब के सापेक्ष सौ से अधिक लैब संचालित हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को यह नहीं दिखाई देता।
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तीन अस्पतालों के खिलाफ की गई कार्रवाई
डीएम को शिकायत किए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गत दो माह में आर्यन अस्पताल, बीएस अस्पताल और किसान अस्पताल पर कार्रवाई की थी। तीनों अस्पतालों का सील कर दिया गया था। जिनमें बीएस और आर्यन फर्जी रूप से चलते पाए गए थे। जबकि करीब पांच क्लीनिक और दुकानें सील की गई हैं।
हो चुकी है कई मौतें
करीब तीन साल पूर्व कैराना में एक फर्जी क्लीनिक पर तितरवाड़ा की एक महिला की डिलीवरी कराई गई थी। जिसकी अधिक ब्लड बहने के कारण मौत हो गई थी। इसके अलावा कांधला में एक झोलाछाप द्वारा इंजेक्शन लगाने से बालक की मौत हो गई थी। दो माह पूर्व शामली शहर में गुरुद्वारा तिराहे से आगे बीएस अस्पताल में रसौली के आपरेशन के दौरान फुगाना की महिला की मौत हो गई थी। जिसमें आदर्शमंडी में रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। इसके अलावा शहर के एक अस्पताल में गत दो माह में चार मौतें हुई थी, हालांकि इनमें पीड़ितों से फैसला कर लिया था।
किसी भी सूरत में झोलाछाप को बख्शा नहीं जाएगा, अभी भी कार्रवाई की जा रही है। यही नहीं इसमें कार्ययोजना तैयार कर सिलसिलेवार जिले में झोलाछाप के विरुद्घ अभियान चलाया जाएगा। - डॉ. राजकुमार सीएमओ
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शहर से लेकर गांवों तक झोलाछाप डाक्टरों की भरमार है। जो प्राइवेट अस्पतालों में बिना डिग्री और अनुभव के आपरेशन कर रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग देखकर भी अंजान बने बैठा हुआ है।
स्वास्थ्य को लेकर सरकार बेहद गंभीर है। प्राइवेट अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन कराकर उन पर नकेल कसने के आदेश हैं। यही नहीं सरकारी अस्पतालों में भी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। शामली में कई अस्पताल तथा जिले में गांवों से लेकर कस्बों तक झोलाछाप डॉक्टर क्लीनिक खोलकर बैठे हैं। जिन्हें मेडिकल की एबीसीडी तक नहीं पता। ये लोग मरीजों को अपने चंगुल में फंसाकर उनका इलाज करते हैं। जिसके चलते कई लोगों की हालत ओर गंभीर हो जाती है। जबकि इस दौरान मौत भी हो जाती है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती है।
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रजिस्टर्ड हैं कुल 87
शामली जिले में कुल 87 अस्पताल और क्लीनिक रजिस्टर्ड हैं। जिनमें 35 अस्पताल तथा 52 क्लीनिक हैं। इसके अलावा पूरे जिले में करीब 30 अल्ट्रासाउंड सेंटर और मात्र आठ पैथोलॉजी लैब रजिस्टर्ड हैं। जबकि जिले में सौ अधिक अस्पताल तथा सैकड़ों क्लीनिक चल रहे हैं। इसके अलावा 13 पैथोलॉजी लैब के सापेक्ष सौ से अधिक लैब संचालित हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को यह नहीं दिखाई देता।
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तीन अस्पतालों के खिलाफ की गई कार्रवाई
डीएम को शिकायत किए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गत दो माह में आर्यन अस्पताल, बीएस अस्पताल और किसान अस्पताल पर कार्रवाई की थी। तीनों अस्पतालों का सील कर दिया गया था। जिनमें बीएस और आर्यन फर्जी रूप से चलते पाए गए थे। जबकि करीब पांच क्लीनिक और दुकानें सील की गई हैं।
हो चुकी है कई मौतें
करीब तीन साल पूर्व कैराना में एक फर्जी क्लीनिक पर तितरवाड़ा की एक महिला की डिलीवरी कराई गई थी। जिसकी अधिक ब्लड बहने के कारण मौत हो गई थी। इसके अलावा कांधला में एक झोलाछाप द्वारा इंजेक्शन लगाने से बालक की मौत हो गई थी। दो माह पूर्व शामली शहर में गुरुद्वारा तिराहे से आगे बीएस अस्पताल में रसौली के आपरेशन के दौरान फुगाना की महिला की मौत हो गई थी। जिसमें आदर्शमंडी में रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। इसके अलावा शहर के एक अस्पताल में गत दो माह में चार मौतें हुई थी, हालांकि इनमें पीड़ितों से फैसला कर लिया था।
किसी भी सूरत में झोलाछाप को बख्शा नहीं जाएगा, अभी भी कार्रवाई की जा रही है। यही नहीं इसमें कार्ययोजना तैयार कर सिलसिलेवार जिले में झोलाछाप के विरुद्घ अभियान चलाया जाएगा। - डॉ. राजकुमार सीएमओ