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नारी को बराबरी का दर्जा देने की घर से हो शुरुआत
ब्यूरो/शाहजहांपुर
Updated Sat, 10 Sep 2016 12:02 AM IST
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नारी को बराबरी का दर्जा देने की घर से हो शुरुआत
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नारी को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान दिलाने के लिए उप्र सरकार और अमर उजाला की संयुक्त पहल के तहत शुक्रवार को स्वामी शुकदेवानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सभागार में आयोजित संगोष्ठी में उपस्थित अधिकारियों, शिक्षाविदों और अन्य संभ्रांत नागरिकों के साथ ही प्रतिभागियों ने इस प्रयास की मुक्त कंठ से सराहना की। कहा कि बेशक महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन उन्हें आधी आबादी के समतुल्य बराबरी के स्तर पर लाने की शुरुआत घर से करनी पड़ेगी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी राम गणेश ने महिला सशक्तिकरण के दौर में इस तरह के आयोजन को सामयिक और सार्थक बताते हुए कहा कि समाज और देश के उत्थान में जो भूमिका महिलाओं ने निभाई, उतनी पुुरुषों की नहीं रही। इसलिए कहा गया कि जहां नारियों की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। नोबेल पुरस्कार तक महिलाएं जीत चुकी हैं। डीएम ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के कथन को दोहराते हुए कहा कि बड़े स्वप्न देखकर और बड़ा विजन अपनाते हुए महिलाएं अपने भविष्य को उज्जवल बनाएं। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के कल्याण को राज्य सरकार द्वारा आरंभ की गईं नई योजनाओं की जानकारी दी।
विशिष्ट अतिथि पुलिस अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। रियो ओलंपिक में शुरुआती दस दिन तक देश में तमगोें का सूखा पड़ा रहने के बाद महिला खिलाड़ियों ने ही देश को खुशियां दीं। मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति स्तर तक महिलाएं पहुंची हैं। पुलिस महकमे की बात करें तो सन् 1972 में पहली बार किरण बेदी के रूप में देश को पहली महिला आईपीएस अधिकारी मिली। वर्ष 2006 में 20 महिलाएं आईपीएस बनीं और अब महिला आईपीएस की हिस्सेदारी बढ़कर 25 फीसदी हो चुकी है। बावजूद इसके अभी तक महिलाएं बराबरी के 50 फीसदी वांछनीय स्तर को हासिल नहीं कर पाई हैं।
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एसएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अवनीश मिश्र ने कहा कि देश में आधी आबादी को हौसला आफजाई की जरूरत है क्योंकि महिलाएं हर क्षेत्र में भारत के सीने को गर्व से चौड़ा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं आत्म विश्वास के साथ कदम आगे बढ़ाएं तो जीवन में सफलता उनके साथ चलेगी। समाजसेवी एवं गुरुद्वारा श्री गुरुसिंह सभा की प्रधान कमलेश कौर माटा ने नारी सम्मान की पहल की सराहना करते हुए कहा कि महिलाओं अपने हक सम्मान पाने को खुद भी पहल करने की जरूरत है।
इससे पूर्व स्वागत भाषण में अमर उजाला बरेली संस्करण के संपादक दिनेश जुयाल ने विषय स्थापना करते हुए कहा कि समाज की पीड़ाओं से ही नारी को ताकत मिलती रही है। हमारा खुद का सिस्टम ठीक नहीं है। इसी कमी को दूर करने के लिए अमर उजाला ने खबरें छापने के साथ महिला उत्थान के सामाजिक सरोकार से भी स्वयं को जोड़ा। अमर उजाला समूह ने एक दशक पहले बेटी बचाओ अभियान शुरू किया और समाज को संवारने में महिलाओं की भूमिका पर मंथन करते हुए नया नारा दिया-बेटी ही बचाएगी। प्रारंभ में महाविद्यालय की छात्रा गुलफ्शां खान ने चंदन तिलक कर और मनीषा व प्रिया ने बैज लगाकर अतिथियों का स्वागत किया। अमर उजाला की ओर प्रदीप जौहरी ने अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार प्रकट किया। संचालन एसएस कॉलेज के वाणिज्य विभागाध्यक्ष डॉ. अनुराग अग्रवाल ने किया। डॉ. प्रतिभा सक्सेना द्वारा राष्ट्रगान के गायन से कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. केेएल वर्मा, एसएस कॉलेज शिक्षा संकाय के डॉ. प्रभात शुक्ला, डॉ. ब्रजेश, डॉ. मीना शर्मा, डॉ. एमके वर्मा, डॉ. प्रतिभा सक्सेना, डॉ. कविता भटनागर, डॉ. एमके वर्मा, तराना जमाल, स्तुति गुप्ता, डॉ. विनीत श्रीवास्तव, डॉ. शैलजा मिश्रा, चंद्रभान त्रिपाठी, डॉ. मनीष कुमार, इंदरप्रीत कौर, डॉ. गौरव सक्सेना, डॉ. आलोक कुमार सिंह आदि मौजूद थे।
अतिथियों ने कहा
प्रदेश की मौजूदा सरकार ने महिलाओं के हितों और मान के लिए नारी सम्मान कोष की स्थापना की है। इस कोष से किसी भी स्तर पर सताई गईं अथवा उत्पीड़न का शिकार हुई महिलाआें को तीन लाख से लेकर सात लाख रुपये तक सहायता देने का प्रावधान किया गया है। इसी तरह निराश्रित विधवा पेंशन कार्यक्रम के साथ गरीब मजदूरों की मौत पर उनके आश्रितों को पांच लाख रुपये तक सहायता दी जाती है। महिलाओं के कल्याण की इन सारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए समाज के लोगों को आगे आना चाहिए।
- राम गणेश, जिलाधिकारी शाहजहांपुर।
पुरुषों की तुलना में महिलाओं के आगे नहीं बढ़ पाने में सबसे प्रमुख कारण है-बच्चियों से दोहरा व्यवहार और इसकी शुरुआत घर से हो जाती है। देश के सम्पन्न कहे जाने वाले राज्यों में लिंगानुपात गड़बड़ा रहा है, जबकि पिछड़े राज्यों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या अधिक है। दहेज और बेटे की चाहत की देन है कि समाज में आपत्तिजनक कहावत प्रचलित हो गई है कि महिला ही महिला की दुश्मन है। यह कथन समाज में मनोवैज्ञानिक सुधार की जरूरत को रेखांकित करता है। भ्रूण के लिंग परीक्षण पर रोक के लिए देश में वर्ष 1994 में पीएनडीटी एक्ट लागू है लेकिन विदेश में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं लागू हैं क्योंकि वहां के समाज की मानसिकता अपने देश जैसी नहीं है।
- डॉ. मनोज कुमार, एसपी शाहजहांपुर।
नारी सम्मान का कार्य आगे बढ़ना चाहिए। महिलाएं नेवी, आार्मी, आईएएस, आईपीएस आदि सभी क्षेत्रों मेें आगे बढ़ रही हैं। रियो ओलंपिक में 125 करोड़ की आबादी वाले अपने देश को तीन महिला खिलाड़ियों ने पदकों का तोहफा दिया। मदर टेरेसा यहीं पर अपने कार्यों से संत बन गईं। कन्या विद्या धन और लैपटॉप पाने वाली छात्राएं इसका लाभ अपनी उन्नति के लिए करें ताकि वह आत्मनिर्भर होकर अपना भविष्य संवार सकें।
- कमलेश कौर माटा, समाजसेवी और गुरुद्वारा श्री गुरुसिंह सभा की प्रधान।
स्वस्थ महिलाएं ही स्वस्थ समाज दे सकती हैं। इसलिए प्रदेश सरकार ने गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए नगद प्रोत्साहन पर आधारित संस्थागत प्रसव, जननी सुरक्षा योजना, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, टीकाकरण आदि योजनाएं संचालित की हैं। महिलाएं उतनी ही सशक्त हैं जितने पुरुष, बशर्ते वे स्वयं में आत्म विश्वास पैदा करें और खुद को पीछे न समझकर दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें।
- डॉ. लक्ष्मण सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी, शाहजहांपुर।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी राम गणेश ने महिला सशक्तिकरण के दौर में इस तरह के आयोजन को सामयिक और सार्थक बताते हुए कहा कि समाज और देश के उत्थान में जो भूमिका महिलाओं ने निभाई, उतनी पुुरुषों की नहीं रही। इसलिए कहा गया कि जहां नारियों की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। नोबेल पुरस्कार तक महिलाएं जीत चुकी हैं। डीएम ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के कथन को दोहराते हुए कहा कि बड़े स्वप्न देखकर और बड़ा विजन अपनाते हुए महिलाएं अपने भविष्य को उज्जवल बनाएं। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के कल्याण को राज्य सरकार द्वारा आरंभ की गईं नई योजनाओं की जानकारी दी।
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विशिष्ट अतिथि पुलिस अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। रियो ओलंपिक में शुरुआती दस दिन तक देश में तमगोें का सूखा पड़ा रहने के बाद महिला खिलाड़ियों ने ही देश को खुशियां दीं। मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति स्तर तक महिलाएं पहुंची हैं। पुलिस महकमे की बात करें तो सन् 1972 में पहली बार किरण बेदी के रूप में देश को पहली महिला आईपीएस अधिकारी मिली। वर्ष 2006 में 20 महिलाएं आईपीएस बनीं और अब महिला आईपीएस की हिस्सेदारी बढ़कर 25 फीसदी हो चुकी है। बावजूद इसके अभी तक महिलाएं बराबरी के 50 फीसदी वांछनीय स्तर को हासिल नहीं कर पाई हैं।
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एसएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अवनीश मिश्र ने कहा कि देश में आधी आबादी को हौसला आफजाई की जरूरत है क्योंकि महिलाएं हर क्षेत्र में भारत के सीने को गर्व से चौड़ा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं आत्म विश्वास के साथ कदम आगे बढ़ाएं तो जीवन में सफलता उनके साथ चलेगी। समाजसेवी एवं गुरुद्वारा श्री गुरुसिंह सभा की प्रधान कमलेश कौर माटा ने नारी सम्मान की पहल की सराहना करते हुए कहा कि महिलाओं अपने हक सम्मान पाने को खुद भी पहल करने की जरूरत है।
इससे पूर्व स्वागत भाषण में अमर उजाला बरेली संस्करण के संपादक दिनेश जुयाल ने विषय स्थापना करते हुए कहा कि समाज की पीड़ाओं से ही नारी को ताकत मिलती रही है। हमारा खुद का सिस्टम ठीक नहीं है। इसी कमी को दूर करने के लिए अमर उजाला ने खबरें छापने के साथ महिला उत्थान के सामाजिक सरोकार से भी स्वयं को जोड़ा। अमर उजाला समूह ने एक दशक पहले बेटी बचाओ अभियान शुरू किया और समाज को संवारने में महिलाओं की भूमिका पर मंथन करते हुए नया नारा दिया-बेटी ही बचाएगी। प्रारंभ में महाविद्यालय की छात्रा गुलफ्शां खान ने चंदन तिलक कर और मनीषा व प्रिया ने बैज लगाकर अतिथियों का स्वागत किया। अमर उजाला की ओर प्रदीप जौहरी ने अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार प्रकट किया। संचालन एसएस कॉलेज के वाणिज्य विभागाध्यक्ष डॉ. अनुराग अग्रवाल ने किया। डॉ. प्रतिभा सक्सेना द्वारा राष्ट्रगान के गायन से कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. केेएल वर्मा, एसएस कॉलेज शिक्षा संकाय के डॉ. प्रभात शुक्ला, डॉ. ब्रजेश, डॉ. मीना शर्मा, डॉ. एमके वर्मा, डॉ. प्रतिभा सक्सेना, डॉ. कविता भटनागर, डॉ. एमके वर्मा, तराना जमाल, स्तुति गुप्ता, डॉ. विनीत श्रीवास्तव, डॉ. शैलजा मिश्रा, चंद्रभान त्रिपाठी, डॉ. मनीष कुमार, इंदरप्रीत कौर, डॉ. गौरव सक्सेना, डॉ. आलोक कुमार सिंह आदि मौजूद थे।
अतिथियों ने कहा
प्रदेश की मौजूदा सरकार ने महिलाओं के हितों और मान के लिए नारी सम्मान कोष की स्थापना की है। इस कोष से किसी भी स्तर पर सताई गईं अथवा उत्पीड़न का शिकार हुई महिलाआें को तीन लाख से लेकर सात लाख रुपये तक सहायता देने का प्रावधान किया गया है। इसी तरह निराश्रित विधवा पेंशन कार्यक्रम के साथ गरीब मजदूरों की मौत पर उनके आश्रितों को पांच लाख रुपये तक सहायता दी जाती है। महिलाओं के कल्याण की इन सारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए समाज के लोगों को आगे आना चाहिए।
- राम गणेश, जिलाधिकारी शाहजहांपुर।
पुरुषों की तुलना में महिलाओं के आगे नहीं बढ़ पाने में सबसे प्रमुख कारण है-बच्चियों से दोहरा व्यवहार और इसकी शुरुआत घर से हो जाती है। देश के सम्पन्न कहे जाने वाले राज्यों में लिंगानुपात गड़बड़ा रहा है, जबकि पिछड़े राज्यों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या अधिक है। दहेज और बेटे की चाहत की देन है कि समाज में आपत्तिजनक कहावत प्रचलित हो गई है कि महिला ही महिला की दुश्मन है। यह कथन समाज में मनोवैज्ञानिक सुधार की जरूरत को रेखांकित करता है। भ्रूण के लिंग परीक्षण पर रोक के लिए देश में वर्ष 1994 में पीएनडीटी एक्ट लागू है लेकिन विदेश में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं लागू हैं क्योंकि वहां के समाज की मानसिकता अपने देश जैसी नहीं है।
- डॉ. मनोज कुमार, एसपी शाहजहांपुर।
नारी सम्मान का कार्य आगे बढ़ना चाहिए। महिलाएं नेवी, आार्मी, आईएएस, आईपीएस आदि सभी क्षेत्रों मेें आगे बढ़ रही हैं। रियो ओलंपिक में 125 करोड़ की आबादी वाले अपने देश को तीन महिला खिलाड़ियों ने पदकों का तोहफा दिया। मदर टेरेसा यहीं पर अपने कार्यों से संत बन गईं। कन्या विद्या धन और लैपटॉप पाने वाली छात्राएं इसका लाभ अपनी उन्नति के लिए करें ताकि वह आत्मनिर्भर होकर अपना भविष्य संवार सकें।
- कमलेश कौर माटा, समाजसेवी और गुरुद्वारा श्री गुरुसिंह सभा की प्रधान।
स्वस्थ महिलाएं ही स्वस्थ समाज दे सकती हैं। इसलिए प्रदेश सरकार ने गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए नगद प्रोत्साहन पर आधारित संस्थागत प्रसव, जननी सुरक्षा योजना, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, टीकाकरण आदि योजनाएं संचालित की हैं। महिलाएं उतनी ही सशक्त हैं जितने पुरुष, बशर्ते वे स्वयं में आत्म विश्वास पैदा करें और खुद को पीछे न समझकर दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें।
- डॉ. लक्ष्मण सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी, शाहजहांपुर।