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Shahjahanpur News: कालीन से मिला महिलाओं को रोजगार, बनीं आत्मनिर्भर
Thu, 11 Dec 2025 11:12 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Thu, 11 Dec 2025 11:12 PM IST
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निगोही में कालीन की बुनाई करतीं महिला व युवती। संवाद
निगोही। कस्बे समेत आसपास के गांवों की युवतियां व महिलाएं सशक्त हो गईं हैं। ये ठेके पर कालीन की बुनाई कर आत्मनिर्भर बन रहीं हैं। इनके तैयार किए कालीन बड़े शहरों में पसंद किए जाते हैं।
गांव धुल्लिया व जिंदपुरा में कई महिलाएं कालीन के कारोबार से जुड़ी हैं। आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं व युवतियों ने परिवार का सहारा बनने के लिए कालीन का काम शुरू किया।
महिलाओं ने भी घर की दहलीज से बाहर निकलकर काम करना शुरू किया। उन्होंने कालीन बुनाई का कार्य सीखा। जब प्रशिक्षित हो गईं तो अधिकतर महिलाओं ने अड्डा लगा लिया और ठेके पर कालीन बुनने का काम करने लगीं। कालीन बुनकर वह अपने घर के खर्चे में सहयोग करती हैं।
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कस्बे की अमरीन, मुस्कान, नाजरा, जिंदपुरा गांव की शमा और नजमी समेत गांव की कई महिलाएं कालीन के कारोबार से जुड़ी हैं। उनके बनाए गए कालीन पहले भदोही भेजे जाते हैं। वहां से दिल्ली, लखनऊ में बिक्री किए जाते हैं। वहां से विदेशों में भी आपूर्ति की जाती है। गांव के प्रधान छोटे बख्श ने बताया कि कालीन की बुनाई का काम अब काफी कम हो गया है। पूर्व में महिलाएं व पुरुष भी काम करते थे। बुनकरों को सरकारी प्रशिक्षण और सहायता मिल जाए तो इनकी आय और बढ़ जाएगी।
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गांव धुल्लिया व जिंदपुरा में कई महिलाएं कालीन के कारोबार से जुड़ी हैं। आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं व युवतियों ने परिवार का सहारा बनने के लिए कालीन का काम शुरू किया।
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महिलाओं ने भी घर की दहलीज से बाहर निकलकर काम करना शुरू किया। उन्होंने कालीन बुनाई का कार्य सीखा। जब प्रशिक्षित हो गईं तो अधिकतर महिलाओं ने अड्डा लगा लिया और ठेके पर कालीन बुनने का काम करने लगीं। कालीन बुनकर वह अपने घर के खर्चे में सहयोग करती हैं।
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कस्बे की अमरीन, मुस्कान, नाजरा, जिंदपुरा गांव की शमा और नजमी समेत गांव की कई महिलाएं कालीन के कारोबार से जुड़ी हैं। उनके बनाए गए कालीन पहले भदोही भेजे जाते हैं। वहां से दिल्ली, लखनऊ में बिक्री किए जाते हैं। वहां से विदेशों में भी आपूर्ति की जाती है। गांव के प्रधान छोटे बख्श ने बताया कि कालीन की बुनाई का काम अब काफी कम हो गया है। पूर्व में महिलाएं व पुरुष भी काम करते थे। बुनकरों को सरकारी प्रशिक्षण और सहायता मिल जाए तो इनकी आय और बढ़ जाएगी।