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गर्भवती महिला ने थ्री व्हीलर पर ही जन्मे दो बच्चे
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अल्हागंज। सीएचसी से प्रसव के मेडिकल कॉलेज भेजी गई गर्भवती को गंभीर बताकर लखनऊ ले जाने को टरकाया तो तंगहाल पति टेंपो में ही पत्नी को लेकर घर चल दिया। मगर शाहजहांपुर से तीन किलोमीटर आगे जाते ही महिला ने दो स्वस्थ बच्चों को जन्म दे दिया, जिनमें एक पुत्र तथा एक पुत्री है।
थाना क्षेत्र के गांव समापुर निवासी रामसनेही अपनी गर्भवती पत्नी लक्ष्मी देवी को प्रसव कराने के लिए शुक्रवार सुबह कस्बे के सीएचसी पर ले गए। वहां स्टाफ नर्स ने उसकी हालत को देखते हुए गंभीर बताकर शाहजहांपुर मेडिकल कॉलेज (जिला अस्पताल) रेफर कर दिया। वे लोग 108 एंबुलेंस शाहजहांपुर मेडिकल पहुंचे और लक्ष्मी को भर्ती करा दिया। रामसनेही का आरोप है कि वहां भी अस्पताल वालों ने प्रसव कराने से मना कर दिया और हालत गंभीर बताकर उसे पत्नी को लखनऊ ले जाने के लिए कहा। कोई संसाधन न होने की वजह से वह टेंपो में पत्नी को लेकर घर की तरफ चल दिए, सोचा कि फर्रुखाबाद में दिखा लेंगे। शाहजहांपुर से तीन किलोमीटर ही चल पाए होंगे कि पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। आसपास के लोगों की मदद से टेंपो में ही प्रसव हुआ और लक्ष्मी ने दो बच्चों को जन्म दिया, जिसमें एक पुत्र तथा एक पुत्री है। इसके बाद वे लोग घर चले गए। इस संदर्भ में अल्हागंज की स्टाफ नर्स चित्रा ने बताया लक्ष्मी देवी के पूरे शरीर में बहुत सूजन थी और पैर भी काफी सूजे हुए थे। हालत गंभीर थी, इसी स्थिति को देखते हुए उन्होंने 108 एंबुलेंस से शाहजहांपुर जिला अस्पताल रेफर किया था। चालक ने उसे सकुशल अस्पताल पहुंचाया भी लेकिन इसके बाद क्या हुआ उन्हें पता नहीं है।
लक्ष्मी को 27 अगस्त को सुबह 9.45 बजे भर्ती किया गया था। 11 बजे जब चिकित्सक राउंड पर आए तो वह अपने बेड पर नहीं मिली। लक्ष्मी के परिजन उसे अपनी इच्छा से लेकर गए हैं। इसके मेडिकल कॉलेज के स्टाफ का कोई दोष नहीं है।
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- डॉ. पूजा त्रिपाठी, प्रवक्ता, राजकीय मेडिकल कॉलेज
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थाना क्षेत्र के गांव समापुर निवासी रामसनेही अपनी गर्भवती पत्नी लक्ष्मी देवी को प्रसव कराने के लिए शुक्रवार सुबह कस्बे के सीएचसी पर ले गए। वहां स्टाफ नर्स ने उसकी हालत को देखते हुए गंभीर बताकर शाहजहांपुर मेडिकल कॉलेज (जिला अस्पताल) रेफर कर दिया। वे लोग 108 एंबुलेंस शाहजहांपुर मेडिकल पहुंचे और लक्ष्मी को भर्ती करा दिया। रामसनेही का आरोप है कि वहां भी अस्पताल वालों ने प्रसव कराने से मना कर दिया और हालत गंभीर बताकर उसे पत्नी को लखनऊ ले जाने के लिए कहा। कोई संसाधन न होने की वजह से वह टेंपो में पत्नी को लेकर घर की तरफ चल दिए, सोचा कि फर्रुखाबाद में दिखा लेंगे। शाहजहांपुर से तीन किलोमीटर ही चल पाए होंगे कि पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। आसपास के लोगों की मदद से टेंपो में ही प्रसव हुआ और लक्ष्मी ने दो बच्चों को जन्म दिया, जिसमें एक पुत्र तथा एक पुत्री है। इसके बाद वे लोग घर चले गए। इस संदर्भ में अल्हागंज की स्टाफ नर्स चित्रा ने बताया लक्ष्मी देवी के पूरे शरीर में बहुत सूजन थी और पैर भी काफी सूजे हुए थे। हालत गंभीर थी, इसी स्थिति को देखते हुए उन्होंने 108 एंबुलेंस से शाहजहांपुर जिला अस्पताल रेफर किया था। चालक ने उसे सकुशल अस्पताल पहुंचाया भी लेकिन इसके बाद क्या हुआ उन्हें पता नहीं है।
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लक्ष्मी को 27 अगस्त को सुबह 9.45 बजे भर्ती किया गया था। 11 बजे जब चिकित्सक राउंड पर आए तो वह अपने बेड पर नहीं मिली। लक्ष्मी के परिजन उसे अपनी इच्छा से लेकर गए हैं। इसके मेडिकल कॉलेज के स्टाफ का कोई दोष नहीं है।
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- डॉ. पूजा त्रिपाठी, प्रवक्ता, राजकीय मेडिकल कॉलेज