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Shahjahanpur News: महिलाएं बनीं सशक्त, शुरू किया खुद का कारोबार
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शाहजहांपुर में स्टॉल पर रखे भगवान के वस्त्र। संवाद
शाहजहांपुर। महिलाएं सिर्फ घरेलू काम करने तक सीमित नहीं हैं। वे पुरुषों की तरह कारोबार कर खुद सशक्त बन रही हैं। उत्पाद भी कुछ अलग तरीके के हैं। महिलाएं भगवान के वस्त्र बनाकर आत्मनिर्भर बनीं तो कई ने पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने के साथ ही स्वरोजगार की राह पकड़ी है। उनके बनाए उत्पाद जिले से लेकर आसपास के जनपदों तक पसंद किए जा रहे हैं।
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भगवान के डिजाइनर वस्त्र तैयार करती हैं ज्योति
आवास विकास कॉलोनी निवासी ज्योति सक्सेना भगवान के वस्त्र और सिंहासन बनाती हैं। उन्होंने अपने शौक को हुनर बनाया और भगवान के वस्त्र सिलने का काम शुरू किया। वह डिजाइनर वस्त्र बनाकर बिक्री करती हैं। कपड़े को मंगाकर सिलने के बाद जरी-जरदोजी का काम कराकर आकर्षक रूप दिया जाता है। उनके तैयार किए वस्त्र जयपुर और मथुरा तक में पसंद किए जाते हैं। ज्योति बताती हैं कि सोशल मीडिया मनोरंजन के साथ व्यापार का रास्ता बना है। सोशल मीडिया के ग्रुपों के जरिये लोग भगवान के वस्त्रों को खरीदने के लिए संपर्क करते हैं। उन्होंने चार लोगों को रोजगार भी दिया है।
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हैंडमेड बैग तैयार कर दे रहीं पर्यावरण संरक्षण का संदेश
टॉउन हॉल निवासी ऊषा गर्ग पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने के साथ ही हैंडमेड बैग, डिजाइनर रजाइयां और डबल बेड में इस्तेमाल होने वाला सामान तैयार करती हैं। ऊषा गर्ग बताती हैं कि बैग के जरिये पॉलीथिन का दुष्प्रभाव कम करने की कवायद है। लोगों से पर्यावरण संरक्षण के लिए कपड़े का बैग का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करते हैं। बैग पर कबीर के दोहे समेत जागरूक रहने वाले स्लोगन भी लिखे होते हैं। वह लघु उद्योग भारती की महिला इकाई से भी जुड़ी हैं। वह जीएफ कॉलेज में शिक्षिका रह चुकी हैं।
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छह लोगाें को दिया इला ने रोजगार
इला सक्सेना हैंडबैग, हॉट बॉटिल कवर, रोटी नैपकिन, शंक के कवर, मैक्सी, चुनरी आदि का कारोबार करती हैं। उनके बनाए गए उत्पाद लोग काफी पसंद करते हैं। वह संस्थाओं के विभिन्न जगहों पर होने वाले आयोजनों में स्टॉल भी लगाती हैं। जहां से उनके उत्पादों की बिक्री होती है। इला बताती हैं कि वह पहले बुटिक का काम करती थीं। अब घर में ही कारोबार शुरू किया। घर से भी लोग उत्पाद खरीद कर ले जाते हैं। उन्होंने करीब छह लोगों को रोजगार दिया है।
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भगवान के डिजाइनर वस्त्र तैयार करती हैं ज्योति
आवास विकास कॉलोनी निवासी ज्योति सक्सेना भगवान के वस्त्र और सिंहासन बनाती हैं। उन्होंने अपने शौक को हुनर बनाया और भगवान के वस्त्र सिलने का काम शुरू किया। वह डिजाइनर वस्त्र बनाकर बिक्री करती हैं। कपड़े को मंगाकर सिलने के बाद जरी-जरदोजी का काम कराकर आकर्षक रूप दिया जाता है। उनके तैयार किए वस्त्र जयपुर और मथुरा तक में पसंद किए जाते हैं। ज्योति बताती हैं कि सोशल मीडिया मनोरंजन के साथ व्यापार का रास्ता बना है। सोशल मीडिया के ग्रुपों के जरिये लोग भगवान के वस्त्रों को खरीदने के लिए संपर्क करते हैं। उन्होंने चार लोगों को रोजगार भी दिया है।
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हैंडमेड बैग तैयार कर दे रहीं पर्यावरण संरक्षण का संदेश
टॉउन हॉल निवासी ऊषा गर्ग पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने के साथ ही हैंडमेड बैग, डिजाइनर रजाइयां और डबल बेड में इस्तेमाल होने वाला सामान तैयार करती हैं। ऊषा गर्ग बताती हैं कि बैग के जरिये पॉलीथिन का दुष्प्रभाव कम करने की कवायद है। लोगों से पर्यावरण संरक्षण के लिए कपड़े का बैग का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करते हैं। बैग पर कबीर के दोहे समेत जागरूक रहने वाले स्लोगन भी लिखे होते हैं। वह लघु उद्योग भारती की महिला इकाई से भी जुड़ी हैं। वह जीएफ कॉलेज में शिक्षिका रह चुकी हैं।
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छह लोगाें को दिया इला ने रोजगार
इला सक्सेना हैंडबैग, हॉट बॉटिल कवर, रोटी नैपकिन, शंक के कवर, मैक्सी, चुनरी आदि का कारोबार करती हैं। उनके बनाए गए उत्पाद लोग काफी पसंद करते हैं। वह संस्थाओं के विभिन्न जगहों पर होने वाले आयोजनों में स्टॉल भी लगाती हैं। जहां से उनके उत्पादों की बिक्री होती है। इला बताती हैं कि वह पहले बुटिक का काम करती थीं। अब घर में ही कारोबार शुरू किया। घर से भी लोग उत्पाद खरीद कर ले जाते हैं। उन्होंने करीब छह लोगों को रोजगार दिया है।

शाहजहांपुर में स्टॉल पर रखे भगवान के वस्त्र। संवाद

शाहजहांपुर में स्टॉल पर रखे भगवान के वस्त्र। संवाद

शाहजहांपुर में स्टॉल पर रखे भगवान के वस्त्र। संवाद