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Shahjahanpur News: रोजा-इबादत के साथ जिम्मेदारियां भी निभा रहीं महिलाएं
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तराना जमाल।
- फोटो : दिन के साथ रातें भी होने लगीं गर्म
शाहजहांपुर। रमजान का महीना विदा होने को है। बृहस्पतिवार को 23 रोजे पूरे हो गए। बरकत वाले महीने में रोजेदार अपना समय इबादत में गुजार रहे हैं, लेकिन बड़ी तादाद में महिलाएं ऐसी भी हैं, जो रोजों के साथ अपनी जिम्मेदारियां भी निभा रही हैं। नौकरीपेशा महिलाएं रमजान में परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के साथ अपने फर्ज भी निभा रही हैं। सहरी में उठना और शाम तक कार्य करने में लगातार चढ़ रहा तापमान भी उनका हौसला डिगा नहीं पा रहा है।
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काम और इबादत दोनों जरूरी
रमजान में सुबह चार बजे ही उठ जाते हैं। बोर्ड परीक्षा के दो पालियों में परीक्षा होने के चलते दिन में सारा समय कॉलेज में निकल जाता है। ऐसे में सुबह छह से सात बजे तक एक घंटा सो लेते हैं। शाम को घर पहुंचकर इफ्तारी बनाना होती है। काम और इबादत दोनों जरूरी है। इसलिए भागदौड़ ज्यादा बढ़ गई है।
- शाइस्ता नसीम, प्रधानाचार्य-नेशनल गर्ल्स कॉलेज
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सामंजस्य बनाकर कर रहे कार्य
रमजान बरकतों वाला महीना है। इसका पूरे वर्ष इंतजार रहता है। रोजा रखने के लिए सहरी के लिए उठते हैं। इबादत करने के बाद बच्चे को स्कूल भेजने की तैयारी करना पड़ती है। उसके बाद स्कूल में सारा समय कक्षाओं में गुजर जाता है। रमजान में परिवार और कार्य को लेकर समय प्रबंधन करना पड़ रहा है।
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- फरहीन, निवासी मंडी
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कर रखा है समय प्रबंधन
रमजान के महीने में काम थोड़ा बढ़ जाता है, पर अल्लाह का शुक्र है कि सारे रोजे हो रहे हैं। सुबह सहरी में उठने से लेकर इफ्तार तक के लिए समय प्रबंधन कर रथा है। स्कूल में कार्य के लिए भी सब तय है। शाम को परिवार के सभी सदस्य बैठकर इफ्तार करते हैं। रोजा रखने से सब्र और अनुशासन सीखने को मिलता है।
- तराना जमाल, तारीन टिकली
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सब्र, शुक्र की सीख देता है रमजान
रमजान में रोजा रखना थोड़ा कठिन होता है, लेकिन इबादत का जज्बा ताकत देता है। सहरी खाने के बाद कुरान की तिलावत भी करते हैं। रमजान सब्र, शुक्र की सीख देता है। रोजा रखकर दिल को सुकून मिलता है। रोजा सिर्फ भूख प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि इबादत और खुशियां बांटने का महीना है।
-वरीषा, मोहल्ला अंटा
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काम और इबादत दोनों जरूरी
रमजान में सुबह चार बजे ही उठ जाते हैं। बोर्ड परीक्षा के दो पालियों में परीक्षा होने के चलते दिन में सारा समय कॉलेज में निकल जाता है। ऐसे में सुबह छह से सात बजे तक एक घंटा सो लेते हैं। शाम को घर पहुंचकर इफ्तारी बनाना होती है। काम और इबादत दोनों जरूरी है। इसलिए भागदौड़ ज्यादा बढ़ गई है।
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- शाइस्ता नसीम, प्रधानाचार्य-नेशनल गर्ल्स कॉलेज
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सामंजस्य बनाकर कर रहे कार्य
रमजान बरकतों वाला महीना है। इसका पूरे वर्ष इंतजार रहता है। रोजा रखने के लिए सहरी के लिए उठते हैं। इबादत करने के बाद बच्चे को स्कूल भेजने की तैयारी करना पड़ती है। उसके बाद स्कूल में सारा समय कक्षाओं में गुजर जाता है। रमजान में परिवार और कार्य को लेकर समय प्रबंधन करना पड़ रहा है।
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- फरहीन, निवासी मंडी
कर रखा है समय प्रबंधन
रमजान के महीने में काम थोड़ा बढ़ जाता है, पर अल्लाह का शुक्र है कि सारे रोजे हो रहे हैं। सुबह सहरी में उठने से लेकर इफ्तार तक के लिए समय प्रबंधन कर रथा है। स्कूल में कार्य के लिए भी सब तय है। शाम को परिवार के सभी सदस्य बैठकर इफ्तार करते हैं। रोजा रखने से सब्र और अनुशासन सीखने को मिलता है।
- तराना जमाल, तारीन टिकली
सब्र, शुक्र की सीख देता है रमजान
रमजान में रोजा रखना थोड़ा कठिन होता है, लेकिन इबादत का जज्बा ताकत देता है। सहरी खाने के बाद कुरान की तिलावत भी करते हैं। रमजान सब्र, शुक्र की सीख देता है। रोजा रखकर दिल को सुकून मिलता है। रोजा सिर्फ भूख प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि इबादत और खुशियां बांटने का महीना है।
-वरीषा, मोहल्ला अंटा

तराना जमाल।- फोटो : दिन के साथ रातें भी होने लगीं गर्म

तराना जमाल।- फोटो : दिन के साथ रातें भी होने लगीं गर्म

तराना जमाल।- फोटो : दिन के साथ रातें भी होने लगीं गर्म