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चीनी मिलों का पानी और राख लोगों को कर रहा बीमार
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,शाहजहांपुर
Updated Fri, 23 Feb 2018 08:10 PM IST
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चीनी मिलों और क्रशर मशीनों का गंदा पानी, बॉयलर की राख लोगों को कई तरह की बीमारियां दे रहे हैं। मिलों का गंदा पानी खुलेआम नदियों में जा रहा है, लेकिन अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं, हालांकि कई मिलों के अधिकारियों का कहना है कि वे लोग पानी का शोधन करने के बाद ही नदियों में छोड़ते हैं।
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चीनी मिलों में एक टन गन्ने की पेराई पर लगभग दो सौ लीटर पानी खर्च होता है। इस दौरान यह पानी बेहद ही गंदा और जहरीला हो जाता है। नियमानुसार गंदे पानी को साफ कर सिंचाई आदि के काम में लाया जाना चाहिए, लेकिन पानी को साफ करने पर भारी खर्च आने के कारण कई मिल मालिक गंदे पानी को सीधे नजदीक की नदियों आदि में गिरा देते हैं। इससे नदी का पानी प्रदूषित होता है और लोगों के स्वास्थ्य को भी खतरा पैदा हो जाता है।
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पानी को साफ करने के लिए मिलों में ईटीपी (प्रदूषण नियंत्रण संयंत्र) लगा होता है। समय समय पर प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी इसका निरीक्षण भी करते हैं, लेकिन इसके बाद भी मिलों के आसपास रहने वाले लोगों की शिकायत रहती है कि मिलों के गंदे पानी और राख से उन्हें तमाम तरह के रोग हो रहे हैं।
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ऐसे होना चाहिए पानी का शोधन
पुवायां। चीनी बनने के दौरान खराब हुए पानी को सबसे पहले ऑयल स्कीमर में भेजा जाता है। यहां पर पानी में मिल जाने वाला तेल, ग्रीस आदि अगल हो जाता है। इसके बाद पानी को एकुलाइजिंग टैंक में डाल दिया जाता है। इस टैंक में गंदगी नीचे बैठ जाती है और पानी ऊपर आ जाता है। जल शोधन की अगली प्रक्रिया प्राइमरी क्वालीफायर में होती हैं, यहां भी गंदगी नीचे बैठ जाती है और ऊपर आने वाले पानी को एरेशन टैंक में भेज दिया जाता है। इस टैंक में पानी को साफ करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है और फिर सेकेंडरी क्वालीफायर में भी यही प्रक्रिया होती है। इसके बाद मल्टीग्रेड फिल्टर और एक्टीवेटेड फिल्टर में भी गंदगी को रोक कर साफ पानी बाहर निकालने की प्रक्रिया होती है। इसके बाद पानी को लैगून पक्का में एकत्र किया जाता है और सिंचाई के लिए किसानों को दे दिया जाता है।
सहकारी मिल का दावा पानी पूरी तरह होता है साफ
किसान सहकारी चीनी मिल पुवायां में 150 किसान रजिस्टर्ड हैं। इन्हें मिल की ओर से पानी को शोधन करने के बाद सिंचाई के लिए निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। मिल के पानी से किसानों की 50 एकड़ और मिल की 25 एकड़ भूमि सिंचित की जाती है। मिल के चीफ केमिस्ट एसएल पॉल का कहना है कि उनके यहां से जो पानी निकलता है वह पूरी तरह से साफ होता है। इस पानी का पीने के अलावा अन्य कार्यों में उपयोग किया जा सकता है।
मकसूदापुर/बंडा। यहां बजाज चीनी मिल की ओर से जल शोधन के बावत जानकारी ली गई तो मिल अधिकारी एक दूसरे का नंबर देकर बात करने को कहते रहे। किसी भी अधिकारी ने इस संबंध में ठीक से जानकारी नहीं दी। मिल से खन्नौत नदी तक एक नाला बनाया गया है। आसपास के लोगों का आरोप है कि मिल से गंदा पानी रात में नदी में बहा दिया जाता है। इसके अलावा मिल की राख जिस प्लाट में एकत्र की जा रही है, वहां आसपास के खेतों में राख उड़कर पहुंच जाती है, जिससे फसलें खराब हो रही हैं।
मिल की राख ने किया जीना दूभर
खुटार। नगर के पुवायां रोड पर कसबे के किनारे श्रीराम खंडसारी उद्योग के नाम से क्रशर लगा हुआ है। मिलकर्मियों के मुताबिक उनके यहां जल शोधन संयंत्र और राख को उड़ने से रोकने के लिए डस्टर लगा हुआ है, जबकि खुटार कसबे के लोग मिल से उड़ने वाली राख से परेशान हैं। घरों की छतों पर राख की परत जैसी जम जाती है। मिल के पीछे की ओर खेत और बाग के पास मेड़ जैसी बनाकर गंदा पानी भर दिया जाता है। यह पानी धीरे धीरे जमीन के अंदर चला जाता है। साफ है कि इससे भूगर्भ जल प्रदूषित होने की पूरी आशंका है। मिल के पार्टनर किशन खंडेलवाल का कहना है कि उनके यहां से पानी साफ करने के बाद ही निकाला जाता है। राख को उड़ने से रोकने को डस्टर लगा है।