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वाडीलाल नाम से चल रही आइसक्रीम फैक्ट्री पर जुर्माना
अमर उजाला ब्यूरो शाहजहांपुर/बरेली।
Updated Mon, 18 Dec 2017 11:51 PM IST
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दूध का नमूना अधोमानक पाया गया, पांच लाख देने पड़ेंगे
संग्रह करके दूध सप्लाई करने वाले पर भी 50 हजार अर्थ दंड
एक मशहूर आइसक्रीम ब्रांड के नाम से गढ़िया रंगीन में चल रही आइसक्रीम फैक्ट्री पर सोमवार को पांच लाख का जुर्माना लगाया है। आरोप है कि वहां गाय-भैंस का मिलावटी दूध इस्तेमाल किया जा रहा था। नमूना यूनिट को दूध संग्रह करके उसे सप्लाई करने वाले एक व्यक्ति से लिया गया था। जुर्माना लगाने वाले खाद्य सुरक्षा विभाग के न्याय निर्णायक अधिकारी/एडीएम प्रशासन जितेंद्र कुमार शर्मा का कहना है कि यह यूनिट वाडीलाल की है, जबकि वाडीलाल कंपनी से जुड़े अधिकारियों ने बरेली के अलावा कहीं उत्पादन न होने की बात कही है।
गढ़िया रंगीन क्षेत्र के गांव पृथ्वीपुर स्थित आइसक्रीम यूनिट को दूध सप्लाई करने वाले गांव के ही रतन गौड़ पुत्र अशोक कुमार गौड़ से खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरपी गंगवार ने चार जून 2014 को गाय और भैंस के मिश्रित दूध का नमूना लिया था। अधिकारियों के अनुसार रतन गौड़ से पूछताछ करने पर पता चला कि वाडीलाल का फैक्ट्री प्रबंधन उसी से दूध लेता है। दूध के नमूने की राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला में जांच कराने पर वह अधोमानक पाया गया और सॉलिड नाट फैट की कमी से उसमें पानी की मिलावट प्रमाणित हुई। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी डीपी सिंह के अनुसार इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर न्याय निर्णायक अधिकारी के न्यायालय में आइसक्रीम फैक्ट्री संचालक और विक्रेता के विरुद्ध विभागीय स्तर पर मुकदमा दायर किया गया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान विक्रेता रतन गौड़ ने यह कहकर अपना बचाव करना चाहा कि वह दूध की खरीद और बिक्री के बजाए केवल उसके संग्रह का काम करते हैं और सारा माल (संग्रहीत दूध) दुग्ध संघ को सप्लाई कर देते हैं, लेकिन जांच के तथ्यों के आधार पर न्याय निर्णायक अधिकारी/एडीएम प्रशासन जितेंद्र कुमार शर्मा ने इस दलील को खारिज कर दिया। उन्होंने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 51 के तहत दोषी पाते हुए सोमवार को यूनिट के संचालक को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत पांच लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। इसी के साथ आइसक्रीम फैक्ट्री के दुग्ध संग्रह कर्ता/विक्रेता पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। इस मामले में परसाखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया (बरेली) स्थित वाडीलाल फैक्ट्री के प्रमुख दिनेश सिंह का कहना है कि वाडीलाल का बरेली के अलावा यूपी में कहीं उत्पादन होता ही नहीं है। पृथ्वीपुर के इस पूरे प्रकरण से कंपनी का कोई वास्ता नहीं है।
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प्रतिवादी रतन गौड़ वडीलाल का कर्मचारी है और उसे इसी कंपनी ने दुग्ध संग्रह के लिए पृथ्वीपुर में नियुक्त किया था। मुकदमे की शुरुआती सुनवाई में रतन ने वडीलाल से पल्ला झाड़ने की कोशिश की, लेकिन जांच में कंपनी का कर्मचारी साबित होने पर वडीलाल को भी प्रतिवादी बनाया गया। कंपनी ने इस पर आपत्ति करने के बजाय मुकदमा लड़ने के लिए रतन के वकील को ही अपना अधिवक्ता नामित किया था। यही नहीं, मुकदमे के दौरान वडीलाल ने आरोपी रतन को टिसुआ (बरेली) यूनिट स्थानान्तरित कर दिया और वह इस समय वहीं कार्यरत है।
-जितेंद्र कुमार शर्मा, न्याय निर्णायक अधिकारी/एडीएम प्रशासन
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संग्रह करके दूध सप्लाई करने वाले पर भी 50 हजार अर्थ दंड
एक मशहूर आइसक्रीम ब्रांड के नाम से गढ़िया रंगीन में चल रही आइसक्रीम फैक्ट्री पर सोमवार को पांच लाख का जुर्माना लगाया है। आरोप है कि वहां गाय-भैंस का मिलावटी दूध इस्तेमाल किया जा रहा था। नमूना यूनिट को दूध संग्रह करके उसे सप्लाई करने वाले एक व्यक्ति से लिया गया था। जुर्माना लगाने वाले खाद्य सुरक्षा विभाग के न्याय निर्णायक अधिकारी/एडीएम प्रशासन जितेंद्र कुमार शर्मा का कहना है कि यह यूनिट वाडीलाल की है, जबकि वाडीलाल कंपनी से जुड़े अधिकारियों ने बरेली के अलावा कहीं उत्पादन न होने की बात कही है।
गढ़िया रंगीन क्षेत्र के गांव पृथ्वीपुर स्थित आइसक्रीम यूनिट को दूध सप्लाई करने वाले गांव के ही रतन गौड़ पुत्र अशोक कुमार गौड़ से खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरपी गंगवार ने चार जून 2014 को गाय और भैंस के मिश्रित दूध का नमूना लिया था। अधिकारियों के अनुसार रतन गौड़ से पूछताछ करने पर पता चला कि वाडीलाल का फैक्ट्री प्रबंधन उसी से दूध लेता है। दूध के नमूने की राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला में जांच कराने पर वह अधोमानक पाया गया और सॉलिड नाट फैट की कमी से उसमें पानी की मिलावट प्रमाणित हुई। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी डीपी सिंह के अनुसार इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर न्याय निर्णायक अधिकारी के न्यायालय में आइसक्रीम फैक्ट्री संचालक और विक्रेता के विरुद्ध विभागीय स्तर पर मुकदमा दायर किया गया।
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मुकदमे की सुनवाई के दौरान विक्रेता रतन गौड़ ने यह कहकर अपना बचाव करना चाहा कि वह दूध की खरीद और बिक्री के बजाए केवल उसके संग्रह का काम करते हैं और सारा माल (संग्रहीत दूध) दुग्ध संघ को सप्लाई कर देते हैं, लेकिन जांच के तथ्यों के आधार पर न्याय निर्णायक अधिकारी/एडीएम प्रशासन जितेंद्र कुमार शर्मा ने इस दलील को खारिज कर दिया। उन्होंने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 51 के तहत दोषी पाते हुए सोमवार को यूनिट के संचालक को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत पांच लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। इसी के साथ आइसक्रीम फैक्ट्री के दुग्ध संग्रह कर्ता/विक्रेता पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। इस मामले में परसाखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया (बरेली) स्थित वाडीलाल फैक्ट्री के प्रमुख दिनेश सिंह का कहना है कि वाडीलाल का बरेली के अलावा यूपी में कहीं उत्पादन होता ही नहीं है। पृथ्वीपुर के इस पूरे प्रकरण से कंपनी का कोई वास्ता नहीं है।
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प्रतिवादी रतन गौड़ वडीलाल का कर्मचारी है और उसे इसी कंपनी ने दुग्ध संग्रह के लिए पृथ्वीपुर में नियुक्त किया था। मुकदमे की शुरुआती सुनवाई में रतन ने वडीलाल से पल्ला झाड़ने की कोशिश की, लेकिन जांच में कंपनी का कर्मचारी साबित होने पर वडीलाल को भी प्रतिवादी बनाया गया। कंपनी ने इस पर आपत्ति करने के बजाय मुकदमा लड़ने के लिए रतन के वकील को ही अपना अधिवक्ता नामित किया था। यही नहीं, मुकदमे के दौरान वडीलाल ने आरोपी रतन को टिसुआ (बरेली) यूनिट स्थानान्तरित कर दिया और वह इस समय वहीं कार्यरत है।
-जितेंद्र कुमार शर्मा, न्याय निर्णायक अधिकारी/एडीएम प्रशासन