नदी में डूबकर दो भाइयों की मौत: बहू लाने की तैयारी में थे रामकुमार, घर आए बेटों के शव; बेसुध हुए मां-बाप
सेहरामऊ दक्षिणी क्षेत्र के नौगवां निवासी वासुदेव और सुखदेव दोनों भाई नदी में डूब गए थे। दोनों के शव गुरुवार को जब घर पहुंचे तो परिवार में कोहराम मच गया। माता-पिता रो-रोकर बेसुध हो गए।
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शाहजहांपुर के थाना सेहरामऊ दक्षिणी क्षेत्र के गांव नौगवां निवासी रामकुमार अपने बड़े बेटे सुखदेव की शादी करना चाहते थे। सुखदेव के मामा मकरंद ने लड़की देखना भी शुरू कर दी थी, लेकिन घर में बहू आने के बजाय बड़े बेटे सुखदेव (17) और छोटे पुत्र वासुदेव (16) के शव आए तो दंपती का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। कई बार रोते हुए दोनों बेहोश हो गए। गुरुवार शाम दोनों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
रामकुमार के परिवार में पत्नी ऊना के अलावा बेटा सुखदेव, वासुदेव व रामसनेही व बेटी सुजाता है। वह सब्जी का ठेला लगाने के साथ मजदूरी भी करते थे। बड़ा बेटा सुखदेव 18 साल का होने वाला था। उसके मामा मकरंद ने हरदोई जिले के थाना शाहबाद के गांव अब्दुल्लागंज में सुखदेव की शादी के लिए लड़की देखी थी।
दोनों पक्षों में बातचीत भी हुई थी। रामकुमार अगले साल बेटे की शादी करना चाहते थे। लेकिन, उससे पहले रामकुमार और ऊना देवी के ऊपर दुखों का पहाड़ टूटा पड़ा। गर्रा नदी में भैंसों को हांकने के दौरान सुखदेव व वासुदेव की डूबने से मौत हो गई। बच्चों का शव देखकर दोनों बिलख पड़े। उनकी आंखों से आंसू नहीं रुक रहे थे।
ताऊ ने नदी पर जाने से किया था मना
रामकुमार बुधवार को खेत पर पानी चलाने दोनों बेटों के साथ गए थे। दो घंटे पानी चलाने के बाद वासुदेव व सुखदेव को घर भेज दिया था। इस बीच उन्हें समझाया था कि जानवरों को चराने न ले जाए। रामकुमार के अनुसार, दोनों के घर आने पर उनके बड़े भाई ब्रह्मानंद ने टोका था। कहा था कि उनके साथ नदी पर जानवर लेकर चलना। फिर भी दोनों ने जानवर खोले व नदी की तरफ हांक दिए।भाई को बचाने को नदी में कूदा था वासुदेव
नदी के पार जानवरों के जाने पर वासुदेव हांकने के लिए नदी में उतर गया। उसके डूबने पर सुखदेव भी बचाने गया। दोनों के नदी में डूबते देखकर गोलू ने शोर मचाते हुए गांव की ओर दौड़ लगा दी। जिसके बाद लोगों में खलबली मच गई। ग्रामीणों ने पहुंचकर पुलिस को सूचना दी। इसके बाद गोताखोरों की मदद से शवों को निकाला गया।